आज भी असुरक्षित है नारी

आज भी असुरक्षित है नारी

औरतों के अधिकारों की रक्षा के लिए, उन पर हो रहे अत्याचारों को रोकने के लिए दुनियां की अनेक सरकारें कदम उठा रही हैं। भारत में भी औरतों पर अत्याचारों को रोकने के लिए घरेलू हिंसा कानून बनाया गया है। लिंग आधारित हिंसा कई शताब्दियों से मानव इतिहास का एक काला अध्याय रहा है और सारे कानूनों, नारी आन्दोलनों, सात्विक परम्पराओं के बावजूद पुरूष बर्बरता, वहशीपन और स्त्रियों के प्रति अपराध भावना में कोई परिवर्तन नहीं आया लगता। स्त्रियां भ्रूण हत्या में मारी जाती हैं, गरीबी के कारण मारी जाती हैं, युद्धों के कारण मारी जाती हैं। ये हत्यायें औरतों और पुरूषों दोनों की ही होती हैं किन्तु जो हत्यायें बलात्कार कर मार देने की है उनकी लगातार वृद्धि हो रही है। छेडख़ानी के किस्से भी लगातार बढ़ रहे हैं। दिल्ली जैसे महानगरों में बसों में चढऩा भी खतरनाक होता जा रहा है। औरत सभी जगह असुरक्षित है। औरत को मनुष्य समाज का भाग नहीं, केवल भोग की वस्तु माना जाता है। जब तक यह दृष्टि नहीं बदलती, कुछ बदला नहीं जा सकता। दुर्भिक्ष, बाढ़ तो प्राकृतिक विपदायें हैं, मनुष्य द्वारा स्त्री के संबंध में अपनायी गयी वृत्तियां उनसे कहीं ज्यादा कष्टकारी हैं तथा पुरूष की विकृत मनोवृत्ति का परिणाम है। नारी सशक्तिकरण हो रहा है। पंचायतों ने इसे दिशा दी है। पश्चिम से ही विचार आ रहे हैं, आन्दोलन का स्वरूप आ रहा है। मैरी वोलस्टोन क्राफ्ट महिला आन्दोलन की जननी बताई जाती है, फ्रेडरिका ब्रेशर ने उसे परम्परागत छवि से मुक्ति दिलाई है। ओ. दे. गाज, जूडिथ मुरे, सी गिलमैन के नाम भी सामने आते हैं। सिमोंन दबोउवा को नई औरत की जुबान समझा जाता है। रोबिन मोर्गन, बैटी फ्रिदा इवाकिन, सुजेन ग्लोरिया आदि के नाम भी सामने आते हैं। हर लहर सफलता का संदेश लेकर आती है और विफल होकर इतिहास में समा जाती है। भारत में भी नारीवाद की एक लम्बी, असफल परम्परा रही है। द्रोपदी, मैत्रेयी, गार्गी से लेकर नूरजहां, अहल्याबाई, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, चांदबाई, रजिया सुल्ताना से लेकर सरोजनी नायडू, कमलादेवी चट्टोपाध्याय और अरूणा आसफ अली, सुचेता कृपलानी से लेकर इन्दिरा गांधी तथा सोनिया गांधी की कतार है जिसमें मायावती व अन्य राजनेत्रियां भी हैं- जयललिता भी, ममता बनर्जी भी। ये भारतीय नारियां या भारत में बसी नारियां नारीवादी आन्दोलन का भाग नहीं थीं किन्तु इन्होंने, इन सबने, भारतीय नारी के उत्थान में जबरदस्त भाग लिया है।
-उपध्यान चन्द्र कोचर

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