कब तक चलेगा धर्म गुरुओं का अधर्म

कब तक चलेगा धर्म गुरुओं का अधर्म

बहु भाषा-भाषी, बहु जाति, बहु धर्म-संप्रदाय के बाद भी भारतीय धर्म प्रिय हैं, आस्थावान हैं और धर्म भीरू हैं। इनके इसी धर्म अनुराग का कथित बाबा, महाराज, साधु, संन्यासी सदियों से शोषण करते चले आ रहे हैं और नानाविध लाभ उठा रहे हैं।
इन धर्म गुरुओं की धर्म दुकानें चलती हैं। इनके द्वारा समाजसेवा का दिखावा कार्य होता है और इसकी आड़ में अनैतिकता के अड्डे चलाए जाते हैं। एक बाबा के राज फाश होने की सुर्खी सूख भी नहीं पाती कि दूसरे बाबा की मदमस्त तस्वीर सामने आ जाती है।
भारतीयों का मन भले ही किसी भी कोने से अपने धर्म संस्कृति के प्रति कट्टर हो किंतु वह सदैव दूसरे धर्म का आदर करता है। इसी उदार भाव का भरपूर लाभ ये बाबा उठा लेते हैं। इनके प्रवचन, डेरे व आश्रमों में आस्थावान जन सैलाब पहुंच जाता है। यह भीड़ उसके तामझाम से प्रभावित और गदगद हो जाती है। ऐसे ही चमत्कारी चोंचलों को प्रचार का पंख लग जाता है और देखते ही देखते चेले चपाटियों की फौज खड़ी हो जाती है। इस फौज में प्रोपेगेण्डा करने वाले, प्रभावित, दिखावटी एवं अवसरवादी लोग भी होते हैं।
अपने भारत में कितने बाबा, महाराजाओं की धार्मिक दुकानें चल रही हैं एवं फल-फूल रही हैं, यह कह पाना कठिन है। क्रूर अपराधी भी सिर पर केश व दाढ़ी बढ़ा रातों रात धर्म गुरु, बाबा, महाराज, साधु संन्यासी, चमत्कारी कुछ भी बन सकता है। ये पर्दाफाश होने पर डाकू लुटेरे से ऋषि बने बाल्मीकि का हवाला देकर अपना पक्ष मजबूत करते हैं। ऐसे धर्म गुरुओं के प्रोपेगेण्डा व प्रचारकर्ताओं की कमी नहीं है। यही प्रचार दल उनका गुणगान करते घूमता है जो उस कथित धर्मगुरु के जमने का आधार बनने में मददगार होता है।
अपने देश में दुकानदारी वाले जितने भी धर्म गुरु हैं, सभी के कार्यक्रमों एवं आयोजनों को खूब प्रसारित किया जाता है। भीड़ जुटायी जाती है और सुरक्षा इंतजामों के अभाव में किसी कारण भगदड़ मच जाने और मौत का ताण्डव होता है तो वे भागते फिरते हैं, छिप जाते हैं। समाजसेवा एवं धर्म सेवा की आड़ में जितने भी बाबा व धर्म गुरु अनैतिक कार्य कर रहे हैं, ऐसे बाबा जो अनैतिकता के अड्डे या आश्रम चला रहे हैं, सभी का भण्डाफोड़ कर उन्हें सींखचों के पीछे भेजना चाहिए। जो ऐसे धर्म गुरुओं को राज आश्रय देकर बढ़ावा दे रहे हैं, ऐसे प्रमुखों व राजनेताओं को किसी भी हालत में नहीं बख्शना चाहिए।
हर उस व्यक्ति को सजा मिलनी चाहिए जो भोली भाली जनता को बहका कर उसका किसी न किसी रूप में शोषण करता है। यह समय इन बाबा महाराजा एवं साधु संन्यासियों के बीच में छद्म आवरणधारी व्यक्ति को बेनकाब करने का है। इन्हें छूट नहीं, लूट की, सजा मिलनी चाहिए। धर्म गुरुओं के अधर्म पर हर हाल में रोक लगनी चाहिए।
-सीतेश कुमार द्विवेदी

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