नाक बताती है आपके बारे में

नाक बताती है आपके बारे में

नाक किसी प्राणी का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण अंग है क्योंकि इसी के सहारे वह प्राण-वायु को खींचता और अशुद्ध-मलयुक्त अपान वायु को बाहर फेंकता है अर्थात श्वसन करता है। नाक (घ्राणेन्द्रिय) के सहारे ही वह सुगंध से सुवासित होता और दुर्गन्ध से बचता है। यही नहीं, नाक ही तो उसे भक्ष्य अथवा पदार्थों का अन्तर करना बतलाती है। इस अर्थ में सचमुच यह शरीरशास्त्रियों के मतानुसार चेहरे का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण अंग है।
किन्तु शरीराकृति विज्ञानी मनुष्य की नाक को व्यक्ति के स्वभाव का संवाहक मानते हैं। उनके मतानुसार नाक की आकृति देखकर मानव की प्रकृति की जानकारी हो सकती है। यह सही है कि भौगोलिक प्रभावों, आनुवंशिक गुणों आदि के कारण इसके आकार प्रकार में काफी अन्तर पाया जाता है, किन्तु फिर भी इसके निष्कर्ष सामान्य ही आते हैं। आइए, हम भी इसे जानें।
- बीच में गोलाई लिए तोते की चोंच की सी नाकवाले सुयोग्य, जिम्मेदार एवं दृढ़प्रतिज्ञ होते हैं। इनकी सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि ये जितना अधिकार के प्रति सजग होते हैं, अपने कर्तव्य निर्वाह में भी अग्रणी होते हैं।
- मोटी नाक वाले शरीर की दृष्टि से बलवान माने जाते हैं जबकि पतली नाक वाले कमजोर।
- मोटी तथा बीच में उभरी नाक वाले प्राय: धनी, गुणवान, बहादुर, सेनापति एवं अधिकारी बनने के गुण से ओत-प्रोत माने जाते हैं। भारतीय परम्परा में देवताओं को उभरी नाक वाला ही चित्रित किया गया है। इतिहास में वर्णित महान योद्धाओं चन्द्रगुप्त, राणा सांगा, महाराणा प्रताप तथा वीर शिवाजी की नाक अधिकांश चित्रों में इसी तरह की दिखाई गई है।
- बड़े चेहरे पर छोटी नाक या छोटे चेहरे पर बड़ी नाक शंकालु चरित्रवाले की निशानी है। ऐसे व्यक्ति अव्यवस्थित चित्त वाले होते हैं, जो जीवन में प्राय: विफल रहते हैं।
- पतली नाक के बड़े नथुने तथा मोटी नाक के छोटे नथुने लंबाई से अधिक चौड़ी और चौड़ाई से अधिक लंबी नाक वाले कमजोर दिल व मस्तिष्क के होते हैं।
- सीधी, पतली, लंबी तथा समानाकार औसत नाक वाले चरित्रवान, मर्यादापालक, कलाप्रिय एवं उत्साही माने जाते हैं।
- जिनकी नाक पतली और लंबी होते हुए भी टेढ़ी, गुद्देदार तथा बेडौल हो, वे खुदगर्ज, निष्ठुर तथा शुष्क स्वभाव के माने जाते हैं।
- नीचे की ओर झुकी नोंक वाली नाक, आचरणहीनता, परनिंदक तथा उदासीन स्वभाव के तो ऊंची नोंक वाली चटपटे, विनोदप्रिय, हंसोड़, स्वतंत्रताप्रिय, चतुर तथा व्यवहार कुशल व्यक्तित्व के परिचायक हैं।
- चपटी नाक वाले लोग बुजदिल कायर एवं क्रूर प्रकृति के होते हैं। शायद इसीलिए तथाकथित पौराणिक अनार्यो को आर्यो ने चपटी नाक वाला दर्शाया था। हां, भूगोल के प्रभाव से निष्कर्ष में भिन्नता आ सकती है।
- जिनकी नाक की जड़ ज्यादा दबी हो, वे बौने व्यक्तित्व के माने जाते हैं किन्तु यदि चपटी नाक बिलकुल सीधी तथा समानाकार हो तो व्यक्ति कलाकार, वाकपटु तथा व्यक्तित्व संपन्न होगा।
- चपटी नाक से ऊपर झुकी भौंहें और आगे की ओर निकले ललाट वाले अन्वेषक, दूरदर्शी तथा शोधार्थी होते हैं।
- औसत दर्जे की नाक जिसका बीच वाला भाग मोटा हो, वाले व्यक्ति विद्याव्यसनी तथा चिन्तन-मनन करने वाले होंगे। पत्र लिखने में तो उन्हें महारत हासिल रहती ही है। अद्वितीय श्रेष्ठ प्रेम-पत्र लिखने वाले सम्राट नेपोलियन की नाक इसी आकृति की बताई जाती है।
- चपटे से नथुने वाले डरपोक तथा कमजोर स्वभाव के तो चौड़े और फूले नथुने वाले भावुक एवं कामुक स्वभाव के बताए जाते हैं। ये तिल को ताड़ बनाने में भी माहिर होते हैं।
- पैने तथा नुकीले नथुने वाले खुदगर्ज, घमण्डी व जिद्दी तो मोटे मांसल नथुने वाले समझदार, ईमानदार, वफादार, होशियार किन्तु शरीर से बीमार और आर्थिक दृष्टि से फटेहाल होते हैं।
- सूखी सी नाकवाले दीर्घायु, बीच में बैठी नाक वाले मधुरभाषी, उद्यमी, किन्तु परस्त्रीगामी होंगे। स्त्रियां भी पतिव्रता नहीं रहतीं, शरीराकृतिविज्ञानी ऐसा मानते हैं।
- आपने अंगुल से साढ़े तीन अंगुल लंबी नाकवाले पुरूषार्थी, धनी, किन्तु सन्तान सुख से वंचित होते हैं। तीन अंगुल नाकवाले दीर्घायु व सामान्य चित्त वाले होते हैं। इससे बड़ी तथा छोटी दोनों तरह की नाकवाले मूर्ख, लड़ाकू तथा दरिद्र होते हैं।
-विपिन कुमार

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