आफत बन गए आधुनिक बाथरूम

आफत बन गए आधुनिक बाथरूम

बाथरूम में गिरने एवं घायल होने की घटनाएं दिनों-दिन बढ़ती जा रही हैं। ऐसे मामलों में आहत हुए लोगों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। ये घटनाएं अपटुडेट बाथरूम की देन हैं। अस्पताल इलाज के लिए पहुंचने वाले ऐसे व्यक्तियों की हड्डियां टूटी या खिसकी रहती हैं अथवा सिर पर घातक चोटें होती हैं।
ऐसी घटनाओं के शिकार अधिकतर प्रौढ़ होते हैं। इनके घायल होने पर स्थिति अत्यंत जटिल होती है। इस आयु में टूटी हड्डियां पूर्णत: ठोस रूप में नहीं जुड़ती। इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है एवं सेहत सुधार की गति भी अत्यंत धीमी होती है।
प्राणघाती साज-सज्जा: आधुनिकता के फेर में हम हर कदम एवं हर क्षेत्र में आधुनिक होते जा रहे हैं। इस क्रम में सबका बाथरूम अत्यंत आधुनिक हो चला है। यह भी धन एवं आधुनिक होने का पैमाना बन गया है। यहां की साज-सज्जा में सम्पन्नता दिखती है।
समय के साथ लोगों की दैनिक उपयोग की वस्तुओं में भी बदलाव आया है इसीलिए घर के साथ-साथ बाथरूम की भी भरपूर साज-सज्जा की जाती है। बाथरूम की टाइल्स का अत्यंत चिकना होना दुर्घटना का कारण बनता है जिसकी चपेट में उपयोगकर्ता ही आते हैं। इसमें से घायल को लंबे समय तक परेशानी झेलनी भी पड़ सकती है। यह प्राणघातक भी हो सकता है।
ये हैं घातक सामान: बाथरूम में लगाए गए चिकने टाइल्स के अलावा अनेक खतरनाक सामान होते हैं जैसे-सोप डिस्पेंसर, ग्लास और स्टेनलेस स्टील के शेल्फ, सोपकैस, शावरकेबिन, टावेल रैक, रॉड फोल्डिंग पाट्स, सेविंग मिरर, कपड़ों के लिए रैक ग्लास के कार्नर केबिनेट आदि। फिसलने पर इन्हीं से ही अधिक नुक्सान पहुंचता है। इनमें से किसी से भी टकराने पर चोटें आती हैं।
पैर के फिसलने पर सिर में घातक चोटें आती हैं जिससे दिमाग प्रभावित होता है। गिरने पर हड्डियां टूटती या खिसकती हैं। कूल्हे या रीढ़ की हड्डियां टूटने पर एवं सिर में खून का थक्का जमने पर मामला गंभीर हो जाता है। यह जानलेवा भी हो सकता है। याददाश्त अथवा बोलने व सोचने-समझने की शक्ति चली जाती है।
बचाव के उपाय-टाइल्स खुरदरे हों। बाथरूम ऊंचे स्थान पर न हो। पानी निकलने की समुचित व्यवस्था हो। बाथरूम साफ-सुथरा हो। काई न जमे। दीवारों पर बुजुर्गों के पकडऩे के लिए हैंडल हों। कपड़े धोने के बाद यदि साबुन, शैंपू डिटरजेंट वाला पानी हो तो उसे साफ कर दें।
- सीतेश कुमार द्विवेदी

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