स्वर में मिठास कैसे लाएं

स्वर में मिठास कैसे लाएं

सुरीला स्वर सबको प्रिय लगता है। मधुर स्वर का ही कमाल है कि काली कोयल की कूक पर लोग मुग्ध हो जाते हैं। सुरीले स्वर के कारण ही सुरैया अपने जमाने में कोकिल कंठिनी कहलाती थी। सुरीला स्वर ही है जिसकी बदौलत लता मंगेशकर सुर साम्राज्ञी कहलाती हैं।
आखिर स्वर सुरीला कैसे बनता है? कुछ लोगों का मानना है कि मीठी चीजें ज्यादा खाने से आवाज में मिठास आती है और स्वर सुरीला होता है। लोगों द्वारा ऐसा मानना बिलकुल निराधार है। अमेरिकी विशेषज्ञ इसे स्वीकार नहीं करते। सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर का कहना है कि खट्टे और मीठे खाद्य पदार्थों से ज्यादा से ज्यादा परहेज रख कर ही स्वर को सुरीला बनाए रखा जा सकता है। योग के सहारे भी स्वर में मिठास लाई जा सकती है। स्वर को सुरीला बनाए रखा जा सकता है। यदि गहरी सांस लेते समय बाएं नथुने को बन्द रखा जाय और दाएं नथुने से सांस ली जाये तथा छोड़ते समय दाएं नथुने को बन्द रखते हुए बाएं नथुने से सांस छोड़ी जाय तो इस क्रिया से गला साफ रहेगा और धीरे-धीरे आवाज का भारीपन दूर होगा।
स्वर की मधुरता को कायम रखने के लिए ठंडक से सदैव बचना चाहिए। ठंडे पेय पदार्थों से बचना भी स्वर के लिए हितकर होता है। रात को सोते समय तथा सुबह उठकर एक छोटी इलायची चबा कर खाएं तथा गुनगुना पानी पी ले। इससे कंठ नली का विकार दूर होकर वह साफ हो जाता है। प्रतिदिन कम से कम एक या दो लौंग अवश्य खाने चाहिए। सुपारी जैसी चीजों के सेवन से गले में भारीपन पैदा होता है, इसलिए ऐसी चीजों के सेवन से बचना चाहिए।
दूध में छुहारा उबालकर पीने से लाभ मिलता है लेकिन दूध को पीने के बाद कम से कम एक घंटे बाद तक पानी नहीं पीना चाहिए। दूध में तुलसी के 2-4 पत्ते और दो छोटी इलायची उबाल कर पीने से स्वर में सुरीलापन आता है।
मुलेठी, इलायची, मिश्री और ईसबगोल को समान मात्रा में लेकर पीस लें और शहद के साथ गोली बनाकर रख लें। सुबह-शाम एक-एक गोली चूसने से स्वर में मिठास आती है। केवल मुलेठी की लकड़ी चूसने से भी आवाज मीठी होती है।
गला साफ रहने से ही आवाज में सुरीलापन आएगा। इसके लिए हल्का गुनगुना पानी ज्यादा से ज्यादा व्यवहार करना चाहिए। दिन में एक बार नमक मिले गुनगुने पानी से गरारा जरूर करना चाहिए। यदि इन सबको ध्यान में रखा जाय तो आवाज में सुरीलापन अवश्य आएगा।
- राजा तालुकदार

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