ऐसा हो बच्चों का अध्ययन कक्ष

ऐसा हो बच्चों का अध्ययन कक्ष

जब तक बच्चे छोटे होते हैं, तब तक वे अधिक समय माता-पिता के साथ व्यतीत करते हैं। जब बच्चे स्कूल जाकर अपनी पढ़ाई नियमित रूप से शुरू करते हैं तो बच्चों को एक ऐसे स्थान की आवश्यकता महसूस होने लगती है जहां वे निश्चित होकर सो, पढ़ और आराम कर सकें, अपनी पुस्तकों और कापियों को अपनी मर्जी से फैला सकें और उन्हें संभाल सकें।
ऐसे में समझदार माता-पिता बार-बार की टोकाटाकी से बचने के लिए बच्चों को अलग से अध्ययन कम बैडरूम दे देते हैं। बच्चों को पढ़ाई के लिए अलग कमरा देते समय उन्हें मानसिक रूप से तैयार कर देना चाहिए कि उन्हें यह कक्ष इसलिए दिया जा रहा है ताकि वे एकाग्रचित होकर पढ़ाई कर सकें। ऐसा उनकी भलाई के लिए किया जा रहा है।
बच्चों को अध्ययन कक्ष देते समय माता-पिता को कुछ बातों पर ध्यान देना चाहिए।
बच्चों का अध्ययन कक्ष शांत होना चाहिए। बच्चों का अध्ययन कक्ष अतिथि गृह और टी. वी. रूम से अलग कुछ दूरी पर होना चाहिए जिससे असमय घर आए अतिथियों से उन्हें कोई परेशानी न हो या घर के अन्य सदस्य अपनी सुविधानुसार टी. वी. के प्रोग्राम देख सकें।
प्रकाश की उचित व्यवस्था का होना अति आवश्यक है। स्टोर जैसा प्रकाशहीन कमरा कभी भी बच्चों को पढऩे के लिए न दें। ऐसी जगह, जहां प्राकृतिक प्रकाश नहीं पहुंच पाता है स्वास्थ्य की दृष्टि से भी नुक्सान पहुंचा सकती है, इसलिए कक्ष में प्राकृतिक प्रकाश का आगमन आवश्यक है जिससे बच्चा दिन में बैठकर बोर महसूस न करे या बिजली न होने पर उस कमरे में जाते हुए डरे। पढऩे के लिए उचित लाइट, उचित स्थान पर लगवायें जिससे उसे पढ़ते समय उचित प्रकाश प्राप्त हो सके। कम प्रकाश होने पर बच्चे को टेबल लैम्प की सुविधा प्रदान करें जिसका उपयोग बच्चा अपनी सुविधानुसार कर सके।
बच्चों के अध्ययन कक्ष में खिड़कियों, दरवाजों, रोशनदान की उचित व्यवस्था होनी चाहिए जिससे दिन में ताजी हवा आ सके। बच्चों के कमरे में पंखा कूलर आदि सुविधानुसार प्रदान करें जिससे ग्रीष्म ऋतु में उन्हें गर्मी से जूझना न पड़े या बिजली न होने पर भी खिड़की, दरवाजे खोलकर अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।
बच्चों के अध्ययन कक्ष खेल के मैदान की तरफ न हों या गली में उनके दरवाजे से आना जाना न हो क्योंकि गली से आने जाने वाले हॉकरों की आवाज से उनको असुविधा होगी और जब गली में अन्य बच्चे खेल रहे होंगे तो उनको मन को काबू करना मुश्किल हो जायेगा।
अगर आपने बच्चे को अध्ययन कक्ष में कम्प्यूटर लगा कर दिया हुआ है तो समय-समय पर जांच करते रहें कि कहीं ऐसा न हो कि वह कहीं कम्प्यूटर में गेम्स ही खेलता रहे और पढ़ाई पर ध्यान न दे। यही नहीं, लगातार कम्प्यूटर पर काम करते रहने से उसकी आंखों पर भी बुरा प्रभाव पड़ेगा, इसलिए बिना आवश्यकता के कम्प्यूटर बच्चे के अध्ययन कक्ष में न रखें और आवश्यकता होने पर अगर कंप्यूटर अध्ययन कक्ष में रखते हैं तो ध्यान दें कि बच्चा कंप्यूटर पर क्या कर रहा है।
माता-पिता को बच्चों के अध्ययन का समय निश्चित कर देना चाहिए और उन्हें समयानुसार चलने के लिए पूरा सहयोग देना चाहिए। एक बार बच्चे समय की पाबंदी को समय गए तो आगे जाकर आपको और उन्हें किसी समय संबंधी उलझन का सामना नहीं करना पड़ेगा।
बच्चों के टाइम टेबल में मदद करें और समझाएं कि स्कूल से आने के बाद भोजन आदि से निवत्त होकर घंटा आराम करने के बाद अपना होमवर्क निपटा लें। शाम को एक घंटा खेलने के बाद 1/2 घंटा इसलिए दें कि बच्चे हाथ मुंह धोकर, दूध आदि पीकर पुन: शेष होमवर्क खत्म कर लें। फिर थोड़ा सा अंतराल लें। उसमें बच्चा अपना बैग अगले दिन के लिए तैयार कर ले और अपनी यूनिफार्म और जूते तैयार कर लें।
पुन: पाठों के अध्ययन के लिए एक घंटा लगाये। सुबह थोड़ा समय पाठ दोहरायें जिससे परीक्षाओं के दिनों में एकदम बच्चे और माता-पिता पर पढ़ाई का बोझ अधिक न पढ़े। रात्रि को 9 बजे के बाद बच्चों को रूटीन में न पढऩे दें। खाना आदि खाकर न्यूज देखें और आधा घंटा अपनी पसंद का कार्यक्रम देखें जिससे मन और दिमाग तरोताजा बना रह सके। बच्चों को समय पर सोने के लिए भेजें।
अच्छा अध्ययन कक्ष बच्चों का पढ़ाई से तालमेल बैठाने में मदद कर सकता है।
- नीतू गुप्ता

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