हिचकें नहीं 'न' कहने से

हिचकें नहीं न कहने से

हर इंसान एक दूसरे से किसी न किसी तरह से जुड़ा हुआ है। यदि समाज में हम अलग-थलग रहें तो हम अपना निर्वाह ठीक से नहीं कर सकते, इसलिए सामाजिक संबंधों की आवश्यकता हमेशा पड़ती रहती हैं। एक दूसरे की आवश्यकता के समय काम आना, शरीर से, मन से, धन से एक दूसरे के साथ जुड़े रहना ही जीवन है।
पर कभी-कभी ऐसा वक्त भी आता है जब आप दूसरों के फैसले को अंधाधुंध नहीं मान सकते। आपको लगता है कि आपकी भी अपनी जिंदगी है जिसे आप अपने तरीके से चलाना चाहते हैं, कुछ फैसले स्वयं लेना चाहते हैं। ऐसे में आपको दूसरों को कभी कभी 'न' कहना पड़ सकता है।
'न' कहना कोई बुराई या अपराध नहीं है पर कहने का अंदाज सही होना आवश्यक है। ऐसे में आप एक मजबूत इंसान बनेंगे और आगे के फैसले लेने में मदद मिलेगी क्योंकि तब तक आप भी समझ चुके होंगे कि कहां 'न' करने से फायदा हुआ और कहां नुक्सान। वैसे भी बिना मन से किया काम मजेदार नहीं लगता पर हमेशा 'न' भी न करें। 'न' करने का साहस सचमुच परिस्थितियों को देखते हुए ही करें।
आउटिंग:- अगर परिवार वालों, मित्रों या संबंधियों को कहीं आउटिंग पर जाना है और आप सचमुच बहुत थके हैं और तबियत भी खराब सी लग रही हो तो ऐसे में 'न' कहने में कोई बुराई नहीं। अपनी मजबूरी बताते हुए मना कर दें। हां, बात कुछ ऐसी हो कि मित्र, परिवार के किसी सदस्य का, संबंधी का जन्मदिन या शादी की वर्षगांठ हो तो आपको 'न' करना शोभा नहीं देगा। टीनएज में मौज मस्ती कुछ ज्यादा होती है। ऐसे में परिवार वालों के साथ कुछ प्रोग्राम है तो 'न' कहने में हिचकिचाएं नहीं। दोस्तों के दबाव में आकर परिवार वालों को नेगलेक्ट न करें। यदि दोस्त दोस्ती का हवाला भी दे तो उसे समझाएं कि परिवार पहले है। हां, यदि कुछ विशेष प्रोग्राम हो तो परिवार वालों को पहले से बता दें।
डिनर या स्नैक्स:- डिनर घर पर खाना हो या बाहर या फिर किसी मित्र, संबंधी के घर में खाना हो, यदि आप शाकाहारी हैं और अधिकतर लोग मांसाहारी हैं तो ऐसे में 'न' कहें। उनके प्यार दुलार के सामने अपने असूलों को न झुठलाएं।
कभी-कभी आप ऐसी परिस्थितियों में होते हैं जब सब लोग पिज़ा बर्गर, कोल्ड ड्रिंक पीने वाले होते हैं और आपका अंदर से बिल्कुल मन नहीं है इन सब चीजों को खाने का। ऐसे में दबाव में न आएं। 'न' कहें और कुछ अपनी पसंद का मंगवाएं। यदि और कुछ उपलब्ध नहीं है तो प्लेट में थोड़ा सा रख कर बैठे रहें।
अगर आप डाइटिंग पर हैं या कैलोरी कांशियस हैं और फैटी फूड ही सामने परोसा हुआ है तो आप कम से कम फैट वाला फूड प्लेट में रखें और इतना कम खाएं कि प्लेट पार्टी के अंत तक आपका साथ दे सकें।
हेल्प:- वैसे परिवार वालों, मित्रों, सगे संबंधियों की मदद करना कुछ गलत नहीं है। बस ध्यान रखें कि अपनी सेहत की कीमत पर मदद करने के लिए न तुलें।
जितना आपकी सेहत, समय व परिवार की परिस्थितियां आपको इजाजत दें, उतना ही करें। कभी भी मित्रों को खुश करने के चक्कर में परिवार वालों से बुराई मोल न लें, न ही सगे संबंधियों की मदद करते करते अपने बच्चों और पति-पत्नी से नाराजगी मोल लें। जिनकी मदद करनी हो, उनकी परिस्थिति, नजाकत और संबंधों को ध्यान में रखें। अधिक आवश्यक न होने पर 'न' कहना भी सीखें, जैसे कभी बच्चों की परीक्षा है, पति का घर आने का समय है, ऐसे में कोई मित्र जिद्द करे कि उसका घूमने का मन है या फिल्म देखने की इच्छा है तो ऐसे में अपनी मजबूरी बताते हुए स्पष्ट 'न' कहें।
स्मोकिंग:- यदि आप पहले से स्मोकिंग करते हैं तो दोस्तों के साथ कभी-कभी कर लें। अगर आप पहले नहीं करते तो सख्ती से उनके आग्रह को टाल दें। उनकी इस बात पर न चलें कि बस एक से क्या फर्क पड़ता है। वैसे भी पब्लिक प्लेस पर धूम्रपान करना ठीक भी नहीं है। पहले आप स्मोक करते थे और अब स्मोकिंग छोडऩे का फैसला कर लिया है तो उनके अनुरोध को न मानें और अपने फैसले पर अडिग रहें।
ड्रिंकिंग:- दोस्तों और अपनी उम्र के कजन्स के साथ स्मोकिंग और ड्रिंकिंग बड़े शहरों में आम बात है पर कभी-कभी पीने वाले लोग भी इसके आदी हो जाते हैं जो सेहत और पर्स दोनों के लिए हानिकारक सिद्ध होता है। अगर आपने कभी भी ड्रिक नहीं किया तो दोस्तों, संबंधियों व बिजनेस डील करने वालों के अनुरोध को नकार दें। एक बार की 'न' आपको आगे सुकून देगी।
अगर पहले ड्रिंक करते हैं और अब छोडऩे का मूड बना लिया है तो अपनी सेहत को ध्यान में रखते हुए मना करना ही बेहतर है।
अधिकतर लोग दोस्तों की बात को टाल नहीं सकते पर जिस बात पर आपका मन न माने और पता हो कि यह आदत गलत है तो उसे कभी न मानें।
नाइट स्टे:- मित्रों, संबंधियों की खातिर नाइट स्टे बाहर न करें। अपने शहर में भी बिना मजबूरी के मस्ती के लिए घर से रात भर बाहर न रहें। मित्र कितना भी दोस्ती का वास्ता दें, कहें कि नहीं, मुझे घर ही जाना है।
दूसरों को खुश रखने के लिए अंधाधुंध अनुसरण न करें और अपनी इच्छाओं और परिस्थितियों के अनुसार 'न' कहना भी सीखें ताकि बाद में पछताना न पड़ें।
- नीतू गुप्ता

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