होती है शराब, कहते सब खराब!

होती है शराब, कहते सब खराब!

शराब और शराबियों के साथ राज्य सरकारों की भी ऐसी-तैसी के दिन आ गए। सोमरस नामक इस प्राचीनतम लोकप्रिय,लोकरंजक पेय का इतिहास में इसके पहले शायद ही कभी इतनी बेइज्जती हुई हो। सुप्रीम कोर्ट का हुक्मनामा हो गया कि राजमार्गों पर दुर्घटनाओं को देखते हुए देश भर के राजमार्गों के दोनों ओर पांच सौ मीटर की दूरी तक कोई मदिरालय नहीं होगा।
बताइए, देवताओं के इस प्रिय पेय का ऐसा निरादर...! सोमरस न हुआ अछूत कुल-कलंक हो गया। लगता है 'माई आनर' ने इसे चखकर कभी इसकी मस्ती अनुभव नहीं की नहीं तो ऐसा नीरस दिल तोडऩे वाला निर्णय देते क्या...?
राजमार्गों से गुजरती पेट्रोल और डीजल वाली गाडिय़ाँ बेचारी निराहारी ही रह जायेंगी। गाडिय़ों में कितना भी पेट्रोल और डीजल भरवा लीजिये, उससे गाडिय़ों की भूख-प्यास कहाँ बुझती है जब तक रास्ते के ढाबे और होटलों में मुर्गे की टांग के साथ देसी और अंग्रेजी लाल परी की बोतलें न खुल जाएँ ?सुरूर ही नहीं तो गाडिय़ां आगे बढ़ेंगी कैसे? माय लार्ड और माय आनरों ने इस ज्वलंत समस्या के बारे में तो सोचा ही नहीं।
चलो, मद्यपियों की नही सोची,अरे बेचारे मद्य-विक्रेताओं का तो ख्याल कर लिया होता ? बड़े-बड़े होटल,माल और ढाबों का समापन समारोह करवा दिया। बाल-बच्चों के पेट का सवाल है। विक्रेता गरीब क्या करें ? राजमार्ग का वासन्तिक हवाओं वाला खुला नीला आसमान छोड़कर वह दो पैसे के लिए गंधाती-बजबजाती बस्तियों की तरफ दौड़ा तो वहां लाठी-डंडा लिए ठठ्ठ की ठठ्ठ औरतें पिल पड़ी। हालत जाएँ तो जाएँ कहाँ हो गई !
छत्तीसगढ़ सरकार बड़ी चतुरी निकली। उसने कहा कि भैया इस झमेले से दूर हम तो अपने सरकारी कार्यालयों में खुद ही प्यालों में जाम भरकर हसीन साकियों की तरह नैनों के बाण चला-चलाकर पब्लिक को जी भर पिलायेंगे परन्तु हमसे सोमरस की कमाई माता लक्ष्मी त्यागी नहीं जायेगी।
राज्य सरकारों को अपने-अपने प्रदेश में लोक-कल्याणकारी,जन-हितकारी नीतियों को लागू करके सबका साथ,सबका विकास करना है पर इसके लिए माता उलूकवाहिनी की बेशुमार कृपा कहाँ से प्राप्त हो ? इसका हल तो बस देवों के मादक और पवित्र पेय सोमरस के पास ही है। जनता पी-पी के जाए भाड़ में, सरकार को क्या ? वो जनहितकारी, लोक-कल्याणकारी नीतियों को लागू करके प्रदेश का बहुमुखी विकास किये बिना थोड़ी मानेगी ? मुख्यमंत्री जी ने मंत्रिमंडल के साथियों और सेक्रेटरियों की बैठक बुलाई और कहा कि मद्यदेव की कृपा से प्राप्त माता लक्ष्मी को रूठकर इधर-उधर जाना नहीं चहिये। अपने-अपने चिंतन को नया आयाम दो।
सबने चिंतन को नया आयाम दिया और इस निष्कर्ष पर आये कि शहर से लगे जितने राजमार्ग हैं, उन सबसे उनकी राजमार्ग की उपाधि तत्काल छीनकर उन्हें आम सड़क घोषित कर दिया जाये। बेचारे राजमार्ग अपने इस डिमोशन पर जार-जार रोते रहे पर निर्दयी प्रशासन का पत्थर दिल नहीं पसीजा। लीजिये सर्वोच्च न्यायालय महाराज,...और दीजिये जनता के हित के लिए फैसले ! तुम डाल-डाल,हम पात-पात...! क्या पंजाब को नशामुक्ति का वचन देने वाली कैप्टन की सरकार,क्या राजस्थान, क्या महाराष्ट्र और बंगाल की सरकारें, सब की सब 'महाजनों येन गता स पंथा' की कतार में लग गईं।
बेचारी गुजरात और बिहार की सरकारें ढिढोरा पीटती ही रह गईं कि शराबबंदी के बाद हमारे प्रदेश का चहुंमुखी विकास तो देखो...! राजस्व में एक पैसे की भी हानि नहीं हुई, उल्टे प्रदेश में अपराध कम हो गए, लोगों के चेहरों पर लाली सुन्दरी इठलाने लगी। कल तक सोमरस के कहर में चीखते-रोते घरों में सुख-शान्ति का वैकुंठ उतर आया पर इतने पवित्र उपदेशों के बाद भी सोमरस के मादक,दिव्य बाटली से झरती परम सुन्दरी माता लक्ष्मी का मोह इन बेवड़े राज्य-सरकारों से छोड़ा नहीं गया।
तो बन्धुओं ये है देवताओं के मुंह लगने के बाद आदमी के मुंहलगी देवी सोमसुन्दरी की हजारों सालों से गतिमान दिव्य कथा। जिसके मादक सुरूर से देवता नहीं बच सके उससे तुम आदमी क्या बच पाओगे। न कोई प्रदेश बच पायेगा, न उसका अंतिम व्यक्ति। कर लो जितनी चाहे शराबबंदी, पीने वाले सूंघते हुए अड्डे पर पहुंच ही जायेंगे। भले ही मन मनाने को कह लो 'होती है शराब,कहते सब खराब....!'
~ कस्तूरी दिनेश

Share it
Share it
Share it
Top