अहंकार छोड़ नम्रता धारण करें?

अहंकार छोड़ नम्रता धारण करें?

आज के इस समय में सभी यही समझ रहे हैं, कि यह जो होता है, मेरे द्वारा ही होता है। मैं और मेरा, ये दो शब्द ही ऐसे हैं जो मानव का जीना दूभर कर देते हैं। मैं नहीं रहूंगा तो मेरे घर का, मेरे परिवार का क्या होगा पर घर का एक सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति जब मर जाता है तो क्या घर समाप्त हो जाता है-कदापि नहीं। यह हमारा अहंकार है जो हमें ऐसी स्थिति में ला खड़ा करता है।
गाड़ीवान गाड़ी चला रहा था। दो हृष्टपुष्ट बैल उस भरी गाड़ी को खींच रहे थे, गाड़ी चली जा रही थी। दोनों बैलों के बीच एक कुत्ता भी चल रहा था, जो यह समझ रहा था कि इतनी बड़ी सामान से भरी गाड़ी मैं ही खींच रहा हूं। गाड़ीवान ने कुत्ते को देखा और वह कुत्ते के मन की बात समझ गया। अबकी बार चाबुक की मार बैलों को पडऩे के बजाय कुत्ते की पीठ पर पड़ी और वह कराह कर भाग खड़ा हुआ। अब उसे मालूम हुआ कि गाड़ी वह नहीं खींच रहा था। उसका अहंकार समाप्त हो गया।
मोमबत्ती और अगरबत्ती दो सगी बहनें थी। दोनों ही एक मंदिर में रहती थी। बड़ी बहन मोमबत्ती हर बात में अपने को गुणवान समझती थी। आखिर प्रकाश जो फैलाती थी। अपने को ज्यादा ज्ञानवान समझकर छोटी बहन को सदा नीचा दिखाने का प्रयास करती रहती थी। अगरबत्ती उसके इस प्रयास से दु:खी होती थी पर अपनी व्यथा वह प्रकट नहीं कर पाती थी।
सदा की भांति मंदिर का पुजारी आया और उसने मोमबत्ती और अगरबत्ती दोनों को जला दिया। और वह किसी कार्यवश मंदिर के बाहर चला गया। तभी हवा का एक तेज झोंका आया और मोमबत्ती बुझ गई पर अगरबत्ती तो जलती रही। यह देखकर अगरबत्ती ने अपना मुख खोला-बहन तुम्हारे प्रकाश को तो हवा के एक ही झोंके ने समेट लिया पर मेरी सुगंध को तो उसने और ज्यादा फैला दिया है। यह सुनकर मोमबत्ती को अपने अहंकार का बोध हो गया।
भारत के प्रथम प्रधानमंत्री स्व. जवाहरलाल नेहरू से अक्सर लोग पूछा करते थे, कि आप जब नहीं रहोगे तो देश का क्या होगा? पंडितजी सभी से सदा एक ही बात कहते थे कि क्या मेरे भरोसे देश चल रहा है। मेरे बाद तो देश को मुझसे भी अच्छा प्रधानमंत्री मिलेगा और इतिहास साक्षी है, नेहरूजी की मृत्यु के बाद देश को लाल बहादुर शास्त्री जैसा लोकप्रिय प्रधानमंत्री मिला था।
सोने की लंका का विनाश सिर्फ रावण के अहंकार के कारण हुआ था, जो सर्वविदित है। अहंकार से ही स्वर्ग से घरेलू वातावरण नर्क में बदल जाया करते हैं।
जब भयंकर तूफान आता है, आंधी सी हवाएं चलती हैं, बड़े से बड़े पेड़ों को धराशाही कर देता है पर धरती पर वह घास का बाल बांका भी नहीं कर सकता। क्या कारण है, पेड़ झुक नहीं सकते जबकि घास पूरी झुक जाती है और तूफान उनके ऊपर से उन्हें बिना किसी क्षति पहुंचाए निकल जाता है।
- संदीप फाफरिया 'सृजन'

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