कोई ज्यादा खाए, कोई फाके करे

कोई ज्यादा खाए, कोई फाके करे

क्या खाने की चीजों को देखते ही आप चिड़चिड़ाहट या अपराधबोध से भर जाती हैं? क्या आपको ऐसा महसूस होता है कि खाने-पीने के इस संघर्ष में आप बिलकुल अकेली हैं और एक सुडौल तथा तंदुरूस्त काया बनाए रखने का बोझ सिर्फ आप ही पर सवार है? तो यह मुमकिन है कि आप किसी 'ईटिंग डिस्आर्डर' या खाने की बीमारी से ग्रस्त हैं।
ईटिंग डिस्आर्डर एक तरह की मानसिक, शारीरिक या भावनात्मक समस्या है। कहते हैं मानसिक तनाव या भावनात्मक उथल-पुथल को शांत करने का एक जरिया होता है यह ईटिंग डिस्आर्डर। आमतौर पर खाने की इन बीमारियों को चार भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है जैसे एनोरेक्सिया, बुलीमिया नर्वोसा, कंपल्सिव ओवर ईटिंग और बिंज ईटिंग डिस्आर्डर।
एनोरेक्सिया को 'भूख की कमी' कहा जाता है, जो पूरी तरह गलत है। अपने शरीर से संबंधित कोई भी गलत धारणा पालना, मोटापे का डर पालना और महिलाओं में एमेनोरिया की समस्या भी एनोरेक्सिया के ही लक्षण माने जाते हैं। एक और परिभाषा के अनुसार एनोरेक्सिया अपने आपको भूखा रख कर शरीर के सामान्य वजन से 15 प्रतिशत कम वजन हासिल करने का एक जरिया है। वजन घटाना एक प्रकार का जुनून है, जिस पर काबू पाना एक बहुत ही मुश्किल काम है। एनोरेक्सिया एक ऐसी बीमारी है, जिसमें इंसान चाहे जितना भी वजन क्यों न घटा ले, उसे संतुष्टि नहीं मिलती।
बूलीमिया नर्वोसा भी एक ऐसा ईटिंग डिस्ऑर्डर है जिसमें इंसान लगातार खाता रहता है और फिर उल्टी, डाइयूरेटिक्स, पेट साफ करने की दवाई या उपवास जैसे उपाय करके वजन घटाने की कोशिश करता है। बूलीमिया के मरीज 'खाने की जरूरत' की अभूतपूर्व भावना से पीडि़त होते हैं। वे तब तक खाते हैं, जब तक पेट ही न उबल पड़े।
कंपल्सिव ओवर ईटिंग : यह एक ऐसा मर्ज है, जिसमें मरीज लगातार खाने का आदी होता है लेकिन वह अपने इस असामान्य व्यवहार से वाकिफ होते हुए भी कुछ भी कर पाने में असमर्थ होता है क्योंकि खाना उसके लिए तनावमुक्त होने का एक जरिया मात्र है। बुलीमिया के मरीजों की तरह ये खाने को बाहर निकालने के तरीके नहीं अपनाते।
बिंज ईटिंग डिस्आर्डर: बिंज ईटिंग डिस्आर्डर खास कर मोटे व्यक्तियों में पाई जाने वाली मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति को वक्त-बेवक्त कुछ न कुछ खाने की बात सूझती है। ऐसे लोगों में अक्सर कैविटीज, दांतों का हिलना तथा मसूड़ों से खून आने की समस्या दिखाई देती है।
क्यों होता है ईटिंग डिस्आर्डर: ईटिंग डिस्आर्डर के पीछे मानसिक तनाव, सामाजिक स्तर, रिश्तों में अनबन या फिर वंशानुगत कारण भी शामिल हो सकते हैं। यह समस्याएं खास कर टीनेजर्स में दिखाई पड़ती हैं क्योंकि इस समय हमारा शरीर कई परिवर्तनों के दौर से गुजरता है जिसके कारण हमउम्र लड़के-लड़कियों में अपने शारीरिक गठन को ले कर एक तरह की हीनभावना पनपने लगती है और वे काफी तनाव व अकेलापन महसूस करते हैं।
इस तरह की हीनभावना मीडिया व पत्रिकाओं के चटकदार विज्ञापनों व बड़ी-बड़ी हस्तियों की ग्लैमरस जीवनशैली से प्रभावित होती है। अपने रोल मॉडल जैसा आदर्श फिगर पाने की चाह में युवतियां क्रैश डाइटिंग करने पर उतारू हो जाती हैं और फलस्वरूप एनोरेक्सिया या बूलीमिया जैसी बीमारी की शिकार हो जाती हैं।
रिश्तों में दरार पडऩे या फिर सगे-संबंधियों के बीच अनबन होने पर भी हम में इस तरह की आदतें पैदा हो सकती हैं, क्योंकि हमारे मन में यह गलत धारणा बैठ जाती है कि हम खाने से ही तनावमुक्त हो सकते हैं।
- खुंजरि देवांगन

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