डाक्टर मरीजों के साथ कैसा बर्ताव करें

डाक्टर मरीजों के साथ कैसा बर्ताव करें

डाक्टर मरीजों के साथ कैसा बर्ताव करें
आजकल प्राय: देखा गया है कि डॉक्टरों का मरीजों के साथ बर्ताव (व्यवहार) अच्छा नहीं रहता। कारण है कुछ डॉक्टरों की पैसे की भूख तो कुछ डॉक्टरों का मरीजों के साथ बातचीत करने का ढंग। जिन डॉक्टरों का जनता के साथ अच्छा बर्ताव नहीं रहता अथवा पैसे कमाने का लालच सताये रहता है, उनकी स्वयं ही मरीजों के द्वारा कलई खुल जाती है और डॉक्टर मरीजों की नजर से गिर जाता है।
आज दुनियां में शायद ही ऐसा कोई डॉक्टर हो जिसने अपने मरीजों का दिल जीत लिया हो। मरीजों के चेहरों पर छाई मायूसी स्पष्ट बता रही है कि डॉक्टरों का व्यवहार उनके साथ अच्छा नहीं है।
क्या कारण है कि डॉक्टर मरीजों को संतुष्ट नहीं कर पाते। डॉक्टरों में ऐसा क्या है जो कि मरीजों का दिल नहीं जीत पाते? मरीजों के साथ डॉक्टरों को कैसा बर्ताव करना चाहिए? इन सभी बिन्दुओं पर चर्चा हेतु मैं आम लोगों को अपने सुझावों से इस लेख द्वारा परिचित कराना चाहूंगा।
आप किस स्तर के डॉक्टर हैं:- जहां तक मरीजों का सवाल है तो वह डॉक्टर के पास जाने से पहले यह अवश्य विचार करेगा कि डॉक्टर किस स्तर का है,उसका बर्ताव कैसा है, यह कितना योग्य व अनुभवी है। अब वह आप पर निर्भर करता है कि आप मरीजों को अपनी ओर आकर्षित करने में कितने सफल रहते हैं। अधिकांश मरीज अपना इलाज कराने से पहले डॉक्टरों का व्यवहार और बातचीत करने का ढंग देखते हैं किन्तु अधिकांश डॉक्टर यहीं मात खा जाते हैं कि मरीजों से बात करने से पहले ही अपनी फीस बता देते हैं।
आप का व्यवहार अच्छा है तो जहां आप मरीजों का दिल जीत सकते हैं, वहीं एक सफल डॉक्टर बन सकते हैं। डॉक्टर को चाहिए कि अपने मरीजों के साथ एक दायरे के अंदर बात करें। अपनी फीस बताने से पहले मरीजों का दिल जीतने की कोशिश करें और उसे बीमारी का इलाज करने की सांत्वना देते रहें।
जहां तक संभव हो, डॉक्टर मरीजों के साथ प्यार से पेश आयें और यदि मरीज को गंभीर बीमारी है तो उसके साथ ऐसा व्यवहार करें कि उसको बीमारी के बारे में मालूम न होने पाये। समय-समय पर मरीजों के पास बैठ कर सांत्वना देते रहें और शीघ्र स्वस्थ रहने का ढांढस बंधाते रहें।
आपका मरीज किस स्तर का है:- निम्न स्तर एवं सम्पन्न परिवार का मरीज अधिकतर छोटे-छोटे डॉक्टरों के पास जाना पसन्द करता है क्योंकि उच्च वर्ग के डॉक्टरों का बर्ताव अच्छा नहीं रहता। वे पैसे को ज्यादा महत्त्व देते हैं। प्राय: देखा गया है कि जो डॉक्टर जितना ऊंचा होगा, उसके हाव-भाव भी वैसे ही होंगे।
डॉक्टरों को चाहिए कि वे निम्न स्तर के मरीजों के साथ उदार भावना से पेश आयें। जहां तक संभव हो, पैसे का लालच सामने नहीं आना चाहिये। यदि डॉक्टर चाहें तो अपने बर्ताव से मरीजों का दिल जीत सकते हैं।
आप किस बीमारी के अच्छे जानकार हैं:- आजकल देखा गया है कि अच्छे से अच्छे अनुभवी डॉक्टर पैसे के लालच में मरीजों की भरमार कर लेते हैं। पैसा अच्छा कमाया जा सके, इसी भावना को लेकर वे सभी प्रकार की बीमारी के मरीजों की भीड़ जमा कर लेते हैं। फलत: जिस बीमारी का इलाज करने की उनमें क्षमता है, उसे भी नष्ट कर देते हैं और मरीजों को निराश कर देते हैं।
डॉक्टरों को सलाह दी जाती है कि वे उस बीमारी का उपचार करें जिसमें उनका अच्छा अनुभव हो और अनुभव में सफलता मिलने वाली हो। अपने ज्ञान और अनुभव से बीमारी का इलाज करने से डॉक्टर जहां एक अच्छे रोग विशेषज्ञ के रूप में उभर कर आम लोगों के सामने आयेगा, वहीं धंधा भी अच्छा चलेगा।
मरीजों को गुमराह न करें:- आजकल देखने में आया है कि अधिकांश डॉक्टर पैसा कमाने के लालच में स्वस्थ व्यक्ति को बीमार अथवा मामूली सी बीमारी को गंभीर बीमारी बता देते हैं। इससे डॉक्टरों के द्वारा मरीजों को गुमराह करने की नीति सामने आती है और व्यक्ति फिर कभी ऐसे डॉक्टरों के पास जाना पसंद नहीं करता है जो झूठ बोलते हैं। डॉक्टरों को चाहिए कि वे हमेशा सत्य बोलें और व्यक्तियों को गुमराह न करें।
उपचार में जल्दबाजी न करें:- देखने में आया है कि कुछ डॉक्टर मरीज को शीघ्र स्वस्थ करने की कोशिश करते हैं। मरीज के उपचार में जल्दबाजी कभी-कभी गंभीर रूप धारण कर सकती है। उपचार में शीघ्रता की कोशिश से मरीज पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, अत: डॉक्टरों को चाहिये कि इलाज ठण्डे दिमाग से करें। मरीज को धीरे-धीरे स्वस्थ करने का प्रयास करें।
बीमारी के अनुरूप ही दवाई दी जाये:- डॉक्टरों को सुझाव दिया जाता है कि वे मरीज को बीमारी के अनुरूप ही दवाई दें क्योंकि कुछ डॉक्टर छोटी सी बीमारी होने पर भी ढेर सारी दवाइयां लाने को कह देते हैं। ज्यादा दवाइयां खाने से मरीज के स्वास्थ्य पर गलत असर पड़ सकता है।
आपरेशन का जिम्मा न लें:- यहां छोटे एवं मध्यम स्तर के डॉक्टरों को सलाह दी जाती है कि वे कभी भी स्वयं मरीज का आपरेशन न करें। आपरेशन की पूर्ण सुविधा, समान एवं अच्छा अनुभव होने पर ही मरीज का आपरेशन करें।
इंजेक्शन के प्रयोग में सावधानी बरतें:- आमतौर पर देखा गया है कि डॉक्टर मरीज को इंजेक्शन लगाते एवं ग्लूकोस चढ़ाते समय सावधानी नहीं बरतते। डॉक्टरों को चाहिए कि इंजेक्शन लगाते समय विशेष सावधानी बरतें।
यदि डॉक्टर अपने पेशे में उक्त बिन्दुओं पर विचार करें और गंभीरता से अध्ययन कर मरीजों को लाभप्रद चिकित्सा सुविधा दें तो अपनी ख्याति चारों ओर फैलाने के साथ ही कुशल डॉक्टर का श्रेय हासिल कर सकते हैं। अन्त में डॉक्टरों को सलाह देना चाहूंगा कि जहां तक संभव हो, मरीजों को खुश रखें ।
-गोविन्द कृष्ण गर्ग

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