बाल कथा: राजा का आदेश

बाल कथा: राजा का आदेश

बहुत दिन पहले की बात है। उन दिनों मनुष्यों के पास कोई पालतू पशु नहीं था। उस समय राजाओं का शासन चलता था।
एक दिन किसी नगर के राजा ने बहुत से दूसरे राजाओं को अपने यहां आमंत्रित किया।
सभी राजाओं के बीच विचार विमर्श होने लगा। पृथ्वी पर इतने सारे जीव जंतु हैं मगर इन में से कौन ऐसा है जो मनुष्य का सच्चा साथी हो सकता है।
विचार करने के बाद सभी राजाओं की राय थी, सब जानवरों में कुत्ता ही ऐसा है। यह निश्चय हो जाने पर उन राजाओं ने मिल कर एक आदेश पर हस्ताक्षर किए।
उस आदेश में लिखा था, आज से कुत्ता हमेशा आदमी के साथ रहेगा। वह जिस आदमी के साथ रहेगा, उसे अपना मालिक समझेगा। अपने मालिक को कभी नुक्सान नहीं पहुंचाएगा और मालिक की धनसंपत्ति के साथ साथ उस की हर तरह से रक्षा करेगा।
बिल्लियों को इस आदेश के बारे में पता चला तो उन्हें बहुत गुस्सा आया।
उन्होंने सोचा, आखिर कुत्तों में कौन से खास गुण हैं जो राजाओं को भा गया। हम भी कुत्तों से कम नहीं। महारानी स्वयं बिल्ली पालती हैं। रात में हमारी पैनी नजरें अधिक काम आएंगी, कुत्तों की नहीं।
तब बिल्लियों ने तय किया, क्यों न हम उस आदेश को चुरा लें। न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी।
बिल्लियों ने महारानी की पालतू बिल्ली से सलाह मशविरा किया। उस बिल्ली ने राजा की अलमारी से वह आदेश चुरा लिया।
अब बिल्लियों के सामने समस्या आई, उस आदेश को कहा रखें? अपने पास रखती हैं तो पकड़े जाने का भय था।
सोच विचार करने के बाद उन्होंने आदेश को चूहों के बिल में छिपा दिया।
चूहों को जब यह पता चला, तो उन्होंने सोचा, आदमी के साथ कुत्ता रहे या बिल्ली, हमें इस से क्या? राजा को इस चोरी किए गए आदेश की भनक लग गई तो हमारी खैर नहीं, इसलिए इसे तुरंत नष्ट कर देना चाहिए।
बस, सारे चूहे उस आदेश पर टूट पड़े। आननफानन में कुतर कुतर कर आदेश के टुकड़े टुकड़े कर दिए।
उधर कुत्तों ने जब राजा के इस आदेश के बारे में सुना तो बहुत खुश हुए। राजधानी के कुत्ते एक जगह इकटठे हुए। राजा को धन्यवाद दिया गया।
कई कुत्तों ने कहा, यह आदेश तो जारी हो गया मगर बहुत से आदमियों को इस बारे में मालूम नहीं है। सिर्फ राजा लोग ही जान रहे हैं इसलिए वह आदेश हमें मिलना चाहए जिस से कि उसे दिखा कर हम सभी का विश्वास पा सकें।
कुत्तों ने राजा से यह बात कही। राजा ने बात मान ली मगर आदेश तो गायब था। खोजने पर पता चला, उसे बिल्लियां चुरा ले गई।
यह जान कर सारे कुत्ते गुस्से में पूरी ताकत के साथ जमीन पर पंजा मारने लगे और जोर जोर से भौंकने लगे।
कुत्ते झुंड के झुंड बिल्लियों के पास पहुंचे। कुत्तों को आया देख बिल्लियां घबरा गई।
कुत्तों की बात सुन कर पहले तो बिल्लियों ने मना किया पर जब उन्हें लगा, कुत्ते उन की बहानेबाजी मानने वाले नहीं हैं तो उन्होंने आदेश को देने का निश्चय किया।
कुछ देर इंतजार करो, एक बिल्ली ने कहा।
अब बिल्लियां पहुंची चूहों के पास।
चूहों ने कहा, कौन सा आदेश? हम ने सोचा, न जाने यह कागज का टुकड़ा हमारे बिल में कैसे आ गया? इसलिए हम ने उसे के टुकड़े टुकड़े कर दिए।
बिल्लियां अपना सा मुंह लिए कुत्तों के पास आई, पूरी बात सुनाई।
सुन कर कुत्तों को बहुत गुस्सा आया। वे गुर्राते हुए बिल्लियों पर टूट पड़ें।
इधर बिल्लियां चूहों पर झपटी।
राजा को पूरी घटना पता चली, तो उन्होंने कुत्तों से कहा, चिंता की जरूरत नहीं। हम उस आदेश के बारे में आज ही पूरे नगर में घोषणा करा देते हैं
राजा ने पूरे नगर में घोषणा करा दी।
पर उसी दिन से कुत्ते बिल्लियों के विरोधी बन गए और बिल्लियां चूहों की जानी दुश्मन।
- नरेंद्र देवांगन

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