गोमुख से निकली है गंगा

गोमुख से निकली है गंगा

पृथ्वी लोक में गंगा का उश्वम स्थल है गंगोत्री हिमनां (ग्लेशियर)। संतोपथ ग्लेशियर से गोमुख ग्लेशियर तक यह 3० किमी. लम्बा और लगभग 3 किमी. चौड़ा ग्लेशियर है। ग्लोबल वार्मिंग का असर इस पर भी पड़ा है और पिघलने के कारण इसके क्षेत्र की धीरे-धीरे सिकुडऩे की खबरें आती रहती हैं।
धार्मिक दृष्टि से गंगा का सर्वोच्च स्थान है। संसार की सभी नदियों में लम्बाई की दृष्टि से 39 वां तथा एशिया की नदियों में पांचवां स्थान प्राप्त है। गंगा की सहायक नदी ब्रहमपुत्र की लंबाई गंगा से ज्यादा है।
अपने उदगम् स्थल गोमुख से गंगासागर तक गंगा की लम्बाई 2525 किलोमीटर है। ऋषिकेश से ऊपर के क्षेत्र में 5 अलग अलग धाराएं (नदी) हैं भागीरथी, अलकनंदा, मंदाकिनी, धौलीगंगा और पिण्डार। ये सब मिलकर ऋषिकेश के मैदानी क्षेत्र में गंगा का रूप धारण कर लेती हैं।
इन पांचों धाराओं में अलकनंदा सबसे लंबी है। यह नंदादेवी पर्वत शिखर के उत्तर में लगभग 30 मील दूरी से निकली है। भागीरथी लगभग 10 हजार फीट की ऊंचाई से गंगोत्री ग्लेशियर में एक गुफा से निकली है। गंगा का उद्गम स्थल गोमुख को ही माना जाता है जो इस स्थान से 13 मील दूर दक्षिण की ओर स्थित है।
गढ़वाल क्षेत्र में 5 प्रयाग हैं-देवप्रयाग, रूद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, विष्णुप्रयाग और नंदप्रयाग। प्रयाग ज्ञान संगम, देवप्रयाग में ही आकर भागीरथी व अलकनंदा का संगम होता है। यहां भागीरथी का उग्र रूप है जबकि अलकनंदा शांत रूप में है। यहां से गंगा बनी धारा ऋषिकेश होते हुए हरिद्वार पहुंचती है।
गंगा की पृथ्वी लोक की यात्रा हरिद्वार से मैदानी क्षेत्र में शुरू हो जाती है। अपनी इस यात्रा में गंगा लगभग 100 महत्त्वपूर्ण नगरों व स्थानों से होकर गुजरती है। यह उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के जिन क्षेत्रों से होकर बह रही है, उसी क्षेत्र में संपूर्ण भारत की 25 प्रतिशत जनता निवास कर रही है। यह क्षेत्र
कृषि व्यापार की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र
है।
गंगा की इस यात्र में पटना पहुंचने पर गंगा नदी की चौड़ाई-गहराई ज्यादा हो जाती है। यहीं पर बना है गांधी सेतु। यह पुल गंगा की धारा पर बने (भारत में) पुलों में सबसे लम्बा पुल है।
पटना तक पहुंचते-पहुंचते व विभिन्न नगरों से होती हुई गंगा अपने साथ विभिन्न अवशिष्ट पदार्थ भी ले आती है। औद्योगिक नगरों की गंदगी गंगा में आ जाने के कारण उसकी पवित्रता प्रभावित होने लगी है।
गंगा में भारत और नेपाल से निकलने वाली नदियां सहायक रूप में मिलती हैं। इनमें यमुना, गोमती, घाघरा, चंबल, सोन, कोसी, गण्डक व शारदा नदी प्रमुख हैं। ये नदियां गंगा को पानी देती हैं।
तिब्बत की नदी मस्तांग-सांपो (ब्रह्मपुत्र) भारत के उत्तर पूर्वी क्षेत्र से होती हुई बांग्ला देश की सीमा में प्रवेश करती है। यहां फीदपुर नगर के उत्तरी क्षेत्र में गंगा व ब्रह्मपुत्र का संगम होता है। यहीं बना है फरक्का बांध। इसी बांध पर गंगा के प्रवाह को रोककर उसी पानी को हुगली नदी के रूप में कलकत्ता की ओर छोड़ा जाता है।
गंगा की यात्रा बंगाल की खाड़ी में पहुंचकर पूर्ण हो जाती है। भारतीय जनमानस की आस्था का केन्द्र गंगा का पानी कई जगह भले ही आचमन के योग्य भी न रह गया हो किंतु धर्मपरायण जनता के लिए गंगाजल अमृत के समान है।
-डा. अनिल शर्मा 'अनिल'

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