बोध कथा: इनाम

बोध कथा: इनाम

बात काफी पुरानी है। महाराष्ट्र राज्य के रत्नगिरी जिले के एक गांव में 'गोपा' नामक एक बालक रहता था। एक दिन उसके विद्यालय में गणित के शिक्षक ने घर से हल करने के लिए कुछ सवाल दिये। बालक गोपाल को उसमें से एक सवाल भी नहीं आता था, इसलिए अपने दूसरे साथियों से मिलकर सारे सवाल हल कर लिये। दूसरे दिन स्कूल में जब सभी बालकों की कॉपी देखी गयी तो उसमें केवल गोपाल के ही सारे सवाल सही मिले।
मास्टर जी इससे बहुत खुश थे और उन्होंने इसके लिए बालक गोपाल को इनाम देना चाहा। इस पर गोपाल रो पड़ा। मास्टर जी ने जब उससे रोने का कारण पूछा तो बालक ने बताया कि सारे प्रश्न उसने खुद हल नहीं किये हैं बल्कि इन्हें हल करने के लिए उसने अपने साथियों की मदद ली है, इसलिए उसे सजा मिलनी चाहिए, इनाम नहीं।
अबोध बालक गोपाल के मुंह से सच्चाई और ईमानदारीपूर्ण बातें सुनकर मास्टरजी और अधिक खुश हुए और बोले-तुमने सच्चे दिल से सब कुछ बताकर इस कक्षा में उपस्थित विद्यार्थियों के समक्ष एक आदर्श प्रस्तुत किया है, इसलिए मैं तुम्हें यह इनाम सत्य बोलने के लिए दे रहा हूं। याद रखना परिस्थितियां चाहें जो भी हों, जीत हमेशा सच्चाई और ईमानदारी की ही होती है। यदि तुम आगे भी सच्चाई और ईमानदारी के रास्ते पर चलते रहोगे तो एक दिन निश्चित ही महान बनोगे। सारी दुनियां में तुम्हारा नाम होगा। सभी लोग तुम्हारा यशगान करेंगे।
बड़े होकर बालक गोपाल ने सम्पूर्ण देशवासियों को ईमानदारी और सच्चाई का पाठ पढ़ाया और अंग्रेजी दासता से देश को आजाद कराने के लिए तन-मन-धन का सहयोग दिया। वे महात्मा गांधी के राजनैतिक गुरू भी थे। उनका पूरा नाम गोपाल कृष्ण गोखले था। आज भी सम्पूर्ण देश में उनका नाम बड़े आदर एवं श्रद्धा से लिया जाता है।
-दुर्गा प्रसाद शुक्ल 'आजाद'

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