विद्वानों के अनुभव के मोती

विद्वानों के अनुभव के मोती

. मूर्ख शिष्य को उपदेश, कर्कशा स्त्री का पालन-पोषण, दुखी लोगों से संबंध रखने पर सज्जन पुरूषों को भी दुख उठाना पड़ता है।

. सेवा के अवसर पर सेवकों की, दुख के समय बंधु-बांधवों की, संकट आनेपर मित्र की, धन हानि होने पर पत्नी की परीक्षा होती है।

. निश्चित वस्तु को छोड़कर जो व्यक्ति अनिश्चित की ओर भागता है, वह निश्चित वस्तु से भी हाथ धो बैठता है।

. राजा को सेवा शोभा देती है, बनिए को व्यापार और सुन्दर स्त्री से घर की शोभा होती है।

. बिना संतान के घर शून्य, बिना भाइयों के दिशा शून्य, मूर्ख का हृदय शून्य तथा निर्धन का सब कुछ शून्य होता है।

. आलस्य से विद्या, दूसरों के हाथ में चले जाने से धन, बीज की कमी से खेत, सेनापति के बिना सेना नष्ट हो जाया करती है।

. धन से धर्म की, यम नियम आदि से योग विद्या की और अच्छी स्त्री से घर की रक्षा होती है।

. दान के द्वारा दरिद्रता नष्ट होती है। शीघ्र-दुखों का हरण करता है। बुद्धि अज्ञान को मिटाती है तथा भावनामय का नाश करती है।

पुरूषों में नाई, पक्षियों में कौवा, चौपायों में गीदड़ और स्त्रियों में मालिन चालाक होते हैं।

. योग्य पुत्र वही है जो पिता का आज्ञाकारी हो। पिता वह योग्य कहलाता है जो बच्चों को विद्याध्ययन कराता है। मित्र वही है जो विश्वासी होता है।

. नदी किनारे के पेड़, दूसरे के घर जा बैठने वाली स्त्री, बिना मंत्री का राजा, यह सब शीघ्र नष्ट हो जाते हैं।

. पत्नी की मृत्यु, अपनों द्वारा अपमान, कर्ज का रहना, दुष्ट राजा की सेवा, गरीबी, दुष्टों का संग-साथ इनके होने पर मनुष्य का शरीर बिना आग के ही जलता है।

. निर्धन को वेश्या, शक्तिहीन राजा को प्रजा, फलहीन वृक्ष को पक्षी, भोजन करने के बाद अतिथि घर को छोड़ देते हैं।

. कुल का पता व्यवहार से, देश का पता बोली से, प्रेम का पता आदर से, शरीर का पता भोजन से चलता है।

. दोष किसके कुल में नहीं होता, बीमारी से कौन पीडि़त नहीं होता, दुख किसको नहीं मिलता, सदा सुख कभी किसी को नहीं मिलता।

. एक अकेले का तपस्या करना, दो का एक साथ मिलकर पढऩा, तीन का गाना, चार का मिलकर यात्रा करना, पांच का खेती करना और बहुत जनों का मिलकर युद्ध में भाग लेना अच्छा होता है।

- मनोज वर्मा

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