आत्म विन्नस: देखने दो सपने...

आत्म विन्नस: देखने दो सपने...

लोगों को जब सुनता हूं यह कहते कि देखो ज्यादा ऊंची छलांग मत मारो या ज्यादा ऊंचे सपने देखने की आवश्यकता नहीं है तो बड़ा दु:ख होता है।

माता-पिता यों तो अंगुली पकड़कर अपनी संतान को इस दुनियां में चलना सिखाते हैं और जब तक उसके पैर जमीन पर ठीक से पडऩे लायक नहीं हो जाते उसकी अंगुली को थामे ही रहते हैं परन्तु जैसे-जैसे उनके बच्चे बड़े होने लगते हैं तब भी वे ऐसे मंत्र से विचलित करने का प्रयास करते रहते हैं जो सफलता की तरफ ले जाते हैं अर्थात माता-पिता अपने बच्चों को ऊंचे सपने सजाने से रोकने लगते हैं।

यदि हम फिर सफल व्यक्तियों की जीवनियों पर नजर डालें या उनका अवलोकन करें तो पाएंगे कि जीवन में सपने देखना अति आवश्यक है। कहा जाता है कि आपके सपने जितने ऊंचे होंगे, आप उतना ही ऊंचा उठेंगे। हमारा आत्मबल बढ़ेगा और हम अपने सपनों को पाने के लिए उतनी ही मेहनत भी करेंगे।

जब माता-पिता के विचारों को देखेंगे तो उनके पास यही तथ्य रहता है कि यदि उनके बच्चे ऊंचे सपने देखने लगे और वे उनको न पा सकें तो जीवन में उनको निराशा और डिप्रेशन मिलता है परन्तु ऐसा करके या सोच रखकर भी तो वे जीवन में अपने बच्चों को नकारात्मकता की ओर ही धकेल रहे हैं। अनजाने में ही सही, वे अपने बच्चों के जीवन में खुद ही अंधकार को अग्रसर करते हैं।

कभी भी बच्चों को सपने देखने से रोकना नहीं चाहिए। ऐसा करने से उनके आत्मबल को भी ठेस पहुंचती है। उनका स्वयं पर से भी विश्वास उठने लगता है। हां! यदि माता-पिता कुछ करना ही चाहते हैं या अपने बच्चों का साथ देना चाहते हैं। उन्हें जीवन में आगे बढ़ाना चाहते हैं तो कुछ इस प्रकार कर सकते हैं:-

- अपने बच्चों को ऊंचे सपने देखने दें और उन्हें सजाने की भी छूट दें।

- उनको बताएं कि किस प्रकार सफलता पाने के लिए या अपने ऊंचे ख्वाबों को सजाने के लिए उन्हें किस दिशा में काम करना चाहिए।

- उनके मनोबल को हमेशा ऊंचा बनाए रखें। उनको तरह-तरह की उत्प्रेरक कहानियां सुनाकर उनका मार्गदर्शन करते रहें।

- उनकी सपनों को पाने की चाहत को बनाए रखने में उनकी हमेशा सहायता करते रहें।

- संसाधनों के अभाव को भी कमजोरी बनाने का प्रयास न करें।

- नरेश सिंह नयाल

Share it
Top