पर्यटन: तरोताजा कर देती है तीर्थन घाटी

पर्यटन: तरोताजा कर देती है तीर्थन घाटी

गर्मी में ठंडक और सुकून दे सकने वाली जगह तलाशने वाले पर्यटकों के लिए हिमाचल प्रदेश की तीर्थन घाटी एक मनपसंद जगह हो सकती है। पहाड़ों पर कुछ जगहें ऐसी भी हैं जहां ज्यादा भीड़ रहने लगी है और ऐसे में अब पर्यटक उन जगहों की तलाश करते हैं जहां भीड़भाड़ कम हो और इस दृष्टि से तीर्थन घाटी उपयुक्त है। यह घाटी घने जंगलों और पहाडिय़ों के बीच ऐसी जगह है जहां आप शांत माहौल में अकेले, परिवार या दोस्तों के साथ सुकून के पल गुजार सकते हैं।

पहाड़ों के बीच खूबसूरत हरे-भरे जंगलों में स्थित यह जगह विभिन्न तरह के ट्रेक का प्रवेश द्वार भी है। इसलिए अगर आपको एडवेंचर पसंद है तो भी यह जगह आपको खूब भाने वाली है। यहां आप ट्रेकिंग, फिशिंग, वाइल्ड लाइफ सभी का मजा ले सकते हैं। छुट्टियां बिताने के लिए यह अच्छा विकल्प है।

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में समुद्र तल से 1600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है तीर्थन घाटी। यह कसोल से करीबन 75 किलोमीटर की दूरी पर है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह हिमाचल प्रदेश की सबसे खूबसूरत घाटियों में से एक है जो सालभर बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करती है। रोमांच की तलाश में रहने वाले पर्यटकों के लिए तो यह घाटी स्वर्ग से कम नहीं है। पूरे वर्ष के दौरान ही यहां प्रकृति के अलग-अलग रंग नजर आते हैं। जब मैदानी इलाकों में गर्मी मुंह चिढ़ाने लगती है तब यह जगह अच्छी शरणस्थली बन जाती है। गर्मी का मौसम और सर्दियों के शुरूआती महीने इस जगह पर समय बिताने का सबसे ठीक समय माना जाता है। अप्रैल से जून के बीच तो तीर्थन घाटी का मौसम बेहद सुहावना रहता है। आप कहीं भी चले जाइए, आपको आसपास हरे-भरे जंगल मिलेंगे और उनसे होकर बहने वाली ठंडी हवाएं। इस दौरान घाटी फूलों से भी महकती है।

तीर्थन नदी के किनारे होने की वजह से इसका नाम तीर्थन घाटी पड़ा। हरे-भरे जंगलों से गुजरती हुई तीर्थन नदी आगे जाकर व्यास नदी में मिल जाती है। इस नदी के किनारे हिमाचल के कई खूबसूरत गांव भी बसे हुए हैं जहां आप असीम, अनछुई खूबसूरती देख सकते हैं। जिन लोगों को नदी के किनारे पसंद हैं, यह जगह उनके लिए आदर्श है। नदी के साथ ही झरने देखना सभी को भाता है, खासतौर पर बच्चों और युवाओं को यहां के छोटे-बड़े झरनों में खूब मजा आता है। तीर्थन घाटी को घूमते हुए आप कई खूबसूरत झरनों से रूबरू होते हैं जहां पर्यटकों की भीड़ बिलकुल नहीं होती। बहुत इत्मीनान के साथ इस जगह का लुत्फ पर्यटक उठा सकते हैं। तीर्थन घाटी के आसपास इतनी खूबसूरत जगहें हैं कि आप यहां तीन-चार दिन आनंद ले सकते हैं।

तीर्थन घाटी के प्रमुख दर्शनीय स्थल:

ग्रेट हिमालय नेशनल पाकर्: तीर्थन घाटी से तीन किलोमीटर की दूरी पर ग्रेट हिमालय नेशनल पार्क है। 5० वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह राष्ट्रीय पार्क 30 से अधिक स्तनधारियों और 300 से अधिक पक्षियों की प्रजातियों सहित वनस्पतियों और जानवरों की कई प्रजातियों की एक विस्तृत विविधता को समेटे हैं। प्रमुख वनस्पतियों में चंदवा वन, ओक, अल्पाइन झाडिय़ां, उप अल्पाइन समुदायों और अल्पाइन घास शामिल हैं। पार्क कई फूलों की प्रजातियों के लिए भी प्रसिद्ध है जिनका सुगंध और औषधीय गुणों के लिए उपयोग किया जा सकता है। इस पूरे क्षेत्र में वनस्पतियां फैली हैं और जब तेज हवाएं चलती हैं तो उनके साथ पूरी घाटी फूलों की खुशबू से महकती है।

पाराशर झील: तीर्थन घाटी की खूबसूरती में चार चांद लगाती है पाराशर झील। इस झील के किनारे पर तीन मंजिला पगोड़ा स्टाइल का मंदिर है। मंदिर और झील दोनों ऋषि पाराशर के नाम पर है जिन्होंने यहां ध्यान किया था।

श्रृंगी मंदिर: तीर्थन घाटी के आसपास के गांवों में बसे यहां के स्थानीय लोग आज भी अपनी मूल परंपराओं से बहुत ज्यादा जुड़े हुए हैं। अपने रीति-रिवाजों का पालन बहुत श्रद्धा के साथ करते हैं। यहां स्थित श्रृंगी मंदिर में भगवान के 24 विभिन्न अवतारों को बताया गया है।

जिभी झरना: यहां का एक और मुख्य आकर्षण जिभी झरना है। पहाड़ों से गिरते झरने खूबसूरत तो लगते ही हैं लेकिन उनकी तेज रफ्तार वाली धार को देखने का मजा ही कुछ अलग होता है। यहां आप घंटों बैठकर बहते पानी का आनंद ले सकते हैं। ज्यादा भीड़ नहीं होने के कारण आपको पूरा सुकून मिलता है।

चौहणी गांव: यहां स्थित चैहणी गांव बहुत ही खूबसूरत गांव है। इस छोटे से गांव की खूबसूरती अपने आप में अनोखी है। यहां एक चैहणी कोठी है। लकड़ी से बनी ये कोठी तकरीबन 1500 साल पुरानी है। यह कोठी कभी कुल्लू के राजा राणा ढांढियां का निवास स्थान हुआ करता था। पहले यह कोठी 15 मंजिला थी लेकिन 1905 में आए भूकंप के बाद यह इमारत बस 10 मंजिला ही रह गई है। यह कोठी पूर्वी हिमालय क्षेत्र की सबसे ऊंची कोठी है। चैहणी के अलावा यहां के नागिनी, घुशैनी, बंजर और शोजा गांव भी सौंदर्य से भरपूर हैं।

जलोरी पास और सिरोलसार झील:

अगर आप तीर्थन घाटी जा रहे हैं तो जलोरी पास और सिरोलसार झील देखना न भूलें। यहां पहुंचने का रास्ता भी बहुत ही रोमांचकारी है। सर्दी में लगता है रास्तों पर बर्फ की चादर बिछी हुई है। बीच में जमी हुई झील और उसके चारों ओर बर्फ ही बर्फ और ऊंचाई पर बना एक मंदिर। इसका खूबसूरत नजारा देखते ही बनता है। यहां बैठकर आप घंटों अपना समय बिता सकते हैं।

किस समय जाएं: सालभर तीर्थन घाटी का मौसम सुहावना रहता है। इसी वजह से यहां हर मौसम में लोग आते हैं। हालांकि सर्दियों के मौसम में बहुत ज्यादा ठंड होती है। यहां जाने का सबसे उपयुक्त समय गर्मियों में और सर्दियों की शुरूआत तक है। मार्च से अक्तूबर तक आप कभी भी इस घाटी का आनंद ले सकते हैं। इसमें भी जून तक का समय सबसे आदर्श है। इस समय पूरी घाटी फूलों और फलों से सजी हुई नजर आती है। साथ ही मौसम भी इतना सर्द नहीं होता। इसके साथ ही आप कई सारे एडवेंचर स्पोटर््स का आनंद भी ले पाएंगे। गर्मियों के महीने में जलोरी पास और हिमालयन नेशनल पार्क की ट्रैकिंग भी कर सकते हैं। जुलाई से सितंबर के बीच बारिश की वजह से पहाड़ों पर घूमना-फिरना जरा मुश्किल होता है।

कहां रूकें: यूं तो रूकने के लिए आसपास कई रिसोर्ट हैं लेकिन नदी के किनारे स्थित लकड़ी के बने घरों में रूकने का मजा ही कुछ और है। यहां पहुंचने के लिए एक तार से लटकी हुई डलिया से नदी को पार करना रोमांचक है। अगर आपको ट्रेकिंग का शौक है तो यहां आप अपनी क्षमता और कठिनाई के स्तर के आधार पर, आधा दिन या फिर पूरे दिन ट्रेकिंग कर सकते हैं। कैंपिंग भी की जा सकती है।

कैसे पहुंचे:

सड़क मागर्: दिल्ली से वॉल्वो और हिमाचल टूरिज्म की बसें मिलती हैं जो आपको सुबह 6 बजे के करीब ओट पहुंचाएगी। यहां से तीर्थन घाटी की दूरी 30 किलोमीटर है जिसके लिए आपको टैक्सी लेनी होगी।

रेल मागर्: तीर्थन घाटी का अपना कोई रेलवे स्टेशन नहीं है। शिमला तक पहुंचने के बाद आपको टैक्सी से तीर्थन घाटी जाना होगा। वैसे चंडीगढ़ से नजदीक कालका तक की ट्रेन भी उपलब्ध है।

हवाई मागर्: अगर आप हवाई यात्र कर रहे हैं तो भुंतर सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है जहां से टैक्सी लेकर तीर्थन घाटी तक पहुंचा जा सकता है।

- नरेंद्र देवांगन

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