समाज पर कलंक है बलात्कार

समाज पर कलंक है बलात्कार

बलात्कार या रेप किसी भी नारी के जीवन का वह हादसा है जो उसे मौत की तरह जीने के लिए मजबूर कर देता है। यह अमानवीय घटना पुरूष समाज द्वारा औरतों पर अपना वर्चस्व सिद्ध करने का एक दुखद प्रयास है जबकि इस घटना से पीडि़त नारी न केवल सामाजिक प्रताडऩा की शिकार होती है वरन मानसिक रूप से असहाय व निर्बल हो जाती है। इस हादसे से गुजरने वाली नारी अपने शरीर को भले ही ढो ले मगर आत्मिक रूप से टूट कर बिखर जाती है।

यदि बलात्कार करने वालों के कठोरतम दंड की कहानी भी प्रकाशित की जाए तो इस घटना को अंजाम देने वाले की रूह कांप जाएगी।

इस कड़ी में न्याय प्रक्रि या से गुजरने वाली सारी प्रक्रि या उस बलात्कार पीडि़त नारी की भावनाओं को आहत करने का काम करती है जब पीडि़त नारी समाज से लोहा लेने की कोशिश करती है। यदि कोई पीडि़त नारी न्याय के मंदिर में न्याय मांगने जाती है तो सर्वप्रथम समाज में उसे कुलटा और चरित्रहीन की उपाधि दी जाती है। न्यायालय में उससे इतने निम्न स्तरीय प्रश्न पूछे जाते हैं जो किसी भी स्वाभिमानी इंसान की आत्मा को कचोटेंगे। ऐसे घटिया प्रश्न जो दो विवाहित सहेलियां भी आपस में नहीं बोलती होंगी।

क्या ऐसे प्रश्न पूछकर भरे न्यायालय में पुरूष प्रधान समाज नारी के ऊपर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध नहीं करना चाहता। क्या कोई भी वकील अपनी बलात्कार पीडि़त बहन से ऐसे प्रश्न पूछ सकता है? क्या यह उस नारी के आत्मविश्वास को तोडऩे का प्रयास नहीं है?

निस्संदेह निर्दोष लोगों को छोड़ते हुए दुष्ट लोगों के लिए यह सजा उचित है क्योंकि जिस नारी के साथ बलात्कार होता है न केवल उसका शरीर मरता है बल्कि उसकी आत्मा भी घायल होती है। यह हादसा किसी भी लड़की या औरत के लिए हत्या ही है जो मानवता के मुंह पर जबर्दस्त तमाचा है। समाज के माथे पर कलंक का टीका है परंतु इसके लिए एक सामाजिक वातावरण बनाने की जरूरत है जो ताकतवर बलात्कारियों के खिलाफ सख्त विरोध ही दर्ज नहीं करे बल्कि उसे अंजाम तक पहुंचा कर दम ले।

कानून का रखवाला हो, सत्ता के गलियारों का चमचा या धनी या ताकवतर व्यक्ति हो, उसके खिलाफ जबर्दस्त प्रतिरोध करके उसका सामाजिक बहिष्कार अनिवार्य है। सर्वाधिक बलात्कार से पीडि़त नारी मध्यम या निम्न वर्ग की होती है जिसे उच्च वर्ग के तबके शोषित करते हैं। ऐसे में जब तक एक वातावरण का निर्माण नहीं होगा, नारी को प्रोत्साहन नहीं मिलेगा, न्यायिक प्रक्रि या सरल व स्वच्छ नहीं होगी और ऐसी घटनाएं नहीं रूक सकेंगी।

- विकास कुमार गर्ग

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