होली के रंगों का त्वचा पर प्रभाव और बचाव

होली के रंगों का त्वचा पर प्रभाव और बचाव

रंगों का इतिहास अनोखा है। फिर होली के साथ ये यूं जुड़े हैं जैसे मनुष्य के साथ उसका नाम। होली पर रंगों से खेलना एक प्राचीन रस्म है। आज भी यह रस्म वैसे ही चली आ रही है।

होली रंगों का त्यौहार है और बहुत कम लोग इस बात को जानते हैं कि इन रंगों का हमारे शरीर और स्वास्थ्य पर अद्भुत प्रभाव पड़ता है। हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिये जैसे विविध प्रकार के तत्वों की आवश्यकता है, इसी प्रकार रंगों की भी है।

होली के सुअवसर पर जिस रंग के प्रयोग का विधान शास्त्रकारों ने किया है वह है पलाश। अपने विशिष्ट गुणों की वजह से हमारे यहां सदैव पुनीत एवं प्रशस्त पेड़ों में गिना जाता है। इस पेड़ की सबसे खास विशेषता है ढाक के फूलों से तैयार किया हुआ रंग जो एक प्रकार से उसके फूलों का अर्क ही होता हैं। यदि उस रंग से रंगा हुआ कपड़ा भिगो कर शरीर पर डाल दिया जाए तो हमारे शरीर के रोमकूपों व स्नायुमंडल पर अपना असर डालता है और संक्रामक बीमारियों को शरीर के पास आने से रोकथाम करता है। अत: ढाक के फूल कुष्ठ, दाह जलन, वायुरोग तथा मूत्र कृच्छादि रोगों की भी महौषधि है।

इस तरह होली के एक दिन पूर्व ही टेसू के रंग तैयार कर लें। टेसू के रंग एक तो नुकसानदायक नहीं होते और इनसे तमाम रोगों से सुरक्षा भी हो जाएगी। रंग तैयार करने के लिए एक बाल्टी जल में 50 ग्राम टेसू के फूल भिगो दें। इन फूलों से प्यारी महक वाला रंग तैयार हो जाएगा।

एक ओर जहां हमारे शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए होली के रंग-गुलाल एक वरदान हैं वहीं दूसरी ओर वर्तमान में कृत्रिम ढंग से निर्मित रंग हमारे स्वास्थ्य पर प्रभाव डालते हैं। एक दूसरे पर कीचड़ गंदगी आदि फेंकना, तारकोल लगाना, यहां तक आयल पेंट से भी होली खेलने की परंपरा चल पड़ी है। यह अशिष्टता का परिचायक तो है ही, स्वास्थ्य के लिए भी घातक हैं।

ये रंग शारीरिक व मानसिक आधार से कष्टदायक हैं ही, सौंदर्य की दृष्टि से भी बहुत हानिकारक हैं। सूखे रंग काया को इतना नुकसान नहीं करते जितना गीले रंग लेकिन आजकल सूखे रंग कृत्रिम ढंग से विषैले रासायनिक पदार्थों के मेल से तैयार किए जाते हैं जो यदि शरीर पर अधिकतर समय तक लगे रहें तो त्वचा फट सकती है। कभी-कभी चकत्ते व दाने भी निकल आते हैं।

होली खेलने के लिए हमें अच्छे किस्म के रंग व गुलाल का ही इस्तेमाल करना चाहिए। पालिश, पेंट, ग्रीस या सस्ते और घटिया किस्मों के रंगों का प्रयोग कभी नहीं करना चाहिए। इससे त्वचा संबंधी तमाम व्याधियां हो जाती हैं। बालों में लग जाने पर ये सुगमता से साफ नहीं होते और नाक, नेत्र तथा कान पर चले जाने पर खतरे और भी बढ़ जाते हैं। बालों में लगने से न केवल रंगों के छूटने में कठिनाई होती है अपितु बाल टूटते भी अधिक हैं। अक्सर बालों का वर्ण भी समाप्त हो जाता है।

चूंकि हम सब को इनके प्रयोग से मना नहीं कर सकते, अत: खुद इनका प्रयोग न करने का हम संकल्प करें और साथ ही अपनी सुरक्षा के लिए पूरे बदन में तैलीय वस्तु से चिकनाहट पैदा कर लें। स्निग्धता पैदा हो जाने से जहां एक ओर नुकसानदायक चीजों के प्रत्यक्ष प्रभाव से त्वचा नहीं आती, वहीं बाद में रंगों को हटाने में भी सरलता होती है। निरोगता के आधार पर टेसू के फूलों का रंग लाभदायक है अत: प्राचीन परंपरा के मुताबिक ही जब हम शालीनता और शिष्टता के साथ होली खेलेेंगे, तभी हम अपने स्वास्थ्य व प्राचीन संस्कृति की रक्षा कर सकते हैं।

होली खेलना बुरा नहीं है लेकिन यदि कुछ उपायों का रंग खेलने वाला व्यक्ति पालन करे तो होली की खुशी और उमंग कुछ अधिक ही होगी। साथ ही होने वाली परेशानियों से छुटकारा पाकर वे होली के रंग का सही ढंग से उल्लासपूर्वक आनंद उठ सकते हैं।

होली खेलने के पहले अपने मन को होली खेलने के लिए सही ढंग से तैयार कर लें क्योंकि होली को एक स्वाभाविक हास-परिहास का पर्व मानकर आप होली खेलेंगे तो आपको यही रंग लाजवाब लगेंगे। रंगों से तनिक न डरें।

किसी रिश्तेदार महिला या युवती को रंग या गुलाल लगाने से पहले आप उसका स्वभाव जान लें। जबरन थोपे गये रंग में कभी मजा नहीं आता।

जहां तक संभव हो, अपनी त्वचा को ढक कर रखें। पूरी बाजू के वस्त्र ही धारण करें। गला भी छोटा होना चाहिए। इससे एक ओर जहां रंग आपकी त्वचा पर न लगकर कपड़ों पर लगेगा, वहीं दूसरी तरफ गीले कपड़े-शीघ्र सूख भी जाएंगे।

होली के एक दिन पहले ही समस्त शरीर पर सरसों के तेल की मालिश कर लेनी चाहिए। होली के दिन आप सारे बदन पर सरसों का तेल या कोल्ड क्रीम सही ढंग से मालिश कर लें। इससे एक ओर चिकनाई त्वचा में समा जाने से रंग का असर त्वचा पर बहुत कम होगा, दूसरी तरफ रंग साबुन और तेल की सहायता से शीघ्र साफ हो जाएंगे। साबुन के पश्चात बदन पर उबटन जरूर लगाएं।

चेहरे और शरीर की त्वचा का रंग छुड़ाने के लिए आटे या बेसन में जरा सा तेल या मलाई तथा हल्दी डालकर उबटन बना लें। इस उबटन से जहां रंग छूट जायेगा, वहीं त्वचा की चिकनाहट व कोमलता भी कायम रहेगी।

होली खेलने के पश्चात तिल के तेल में हल्दी तथा चंदन का मिश्रण बना लें। इसमें जरा सा आटा मिला लें। इस उबटन को चेहरे, हाथ-पैरों पर लगाकर मालिश करें। आपकी त्वचा की सुरक्षा, कांति व कोमलता के लिए बेहतर व उपयोगी साबित होगी।

अपने बदन से रंग उतारने के पश्चात बदन को कम रोयें वाले तौलिए से धीरे-धीरे साफ कर लें। अधिक जल्दी-जल्दी न रगड़ें क्योंकि तेजी से पोंछने से जलन पैदा हो सकती है। तत्पश्चात गुलाब जल और ग्लिसरीन मिलाकर सारे बदन पर मालिश करें। कुछ देर पश्चात हल्के गर्म पानी से धो-पोंछ लें। फिर कच्चे दुग्ध में रूई के फाहे को भिगो कर अपने चेहरे को साफ करें। दो घंटे पश्चात त्वचा पर कोल्ड क्रीम जरूर लगाएं। होली वाले दिन ग्लिसरीन युक्त साबुन से स्नान करना बेहतर रहता है।

होली के रंगों को उतारने के लिए पुराने मोजों का प्रयोग करें। मोजों पर अच्छा साबुन लगाकर त्वचा पर धीरे-धीरे मलिए। आपको त्वचा पर जलन महसूस नहीं होगी और रंग भी शीघ्रातिशीघ्र साफ हो जाएगा।

स्नान करने वाले पानी में नींबू अथवा जरा सी फिटकरी मिला सकते हैं। इससे बदन पर लगा हुआ रंग भी सरलता से छूट जाता है। स्नान के पश्चात सारे बदन पर बेसन रगड़कर दोबारा स्नान कर लें इससे शरीर में ताजगी आयेगी। स्नान के लिए शीतल या ताजे पानी का ही प्रयोग करें।

शरीर में रंग लगने के पश्चात साफ ताजे पानी से बीच-बीच में धोते रहे। इससे रंग के दुष्प्रभावों में कमी आती रहेगी।

यदि आपके पैर में बिवाइयां हैं, तो पैर में पुराने मोजे पहनकर होली खेलें नहीं तो बिवाइयों में रंग समा जाने की हालत में साफ करना कष्टदायी साबित होगा और बिवाइयों का असर और गहरा हो जाएगा।

रंग डालने वाले व्यक्ति को यह एहतियात बरतने की जरूरत है कि रंग किसी की आंख अथवा मुख में प्रवेश न करने पाये। पेंट, कीचड़, काला रंग, या गहरे रंग से होली की उमंग समाप्त हो जाती है। हरदम अच्छे रंगों का प्रयोग करें। अपनी और अन्य लोगों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए ही रंग खेलना चाहिए। यदि मुंह में रंग चला जाए तो जल्द ही पानी के कुल्ले करके मुंह साफ कर लेना चाहिए। यदि रंग पेट में पहुंच जाएगा तो उसका प्रभाव शरीर पर खराब पड़ेगा।

गुलाल प्राय: चेहरे पर लगाया जाता है। ऐसी हालत में आंखें बंद कर लेनी चाहिए। सूखे रंग चेहरे पर कदापि न डालें। गुलाल में पोटेशियम डाइक्रोमेट होता है जो त्वचा रोगों को पैदा करता है।

कुछ लोग होली में स्याही को ही एक दूसरे पर डालते हैं। स्याही का प्रयोग ज्यादातर बच्चे करते हैं। स्याही के दाग छुड़ाने के लिए तुरंत नींबू का रस रगड़ें। न मिल पाने की दशा में टमाटर सरीखी किसी दूसरी खट्टी चीज से भी काम चला सकते हैं। इसके पश्चात इसे पानी से धोएं।

होली के दिन जहां तक हो सके, बालों में तेल का प्रयोग न करें। इससे बालों में लगे गुलाल को साफ करने में सुविधा होगी। बालों में पड़े हुए रंग छुड़ाने के लिए दही या आंवले का भी इस्तेमाल करें।

गुलाल को मिट्टी के तेल से नहीं साफ करना चाहिए एवं न ही जल से छुड़ाना चाहिए क्योंकि पानी पडऩे से रंग और चटक हो जाएगा। इसे पंखे की हवा में झाड़कर रीठे से धोएं।

कपड़ों का कच्चा रंग सोडियम हाइड्रोसल्फाइट या साबुन व सिरके की सहायता से छुड़ाया जा सकता है। पक्का रंग नमक के हल्के गर्म पानी में कपड़े को डुबोकर साबुन से धोना चाहिए। नमक के पानी को अधिक उबालना नहीं चाहिए नहीं तो रंग और अधिक गहरा हो जाएगा।

- डा. हनुमान प्रसाद उत्तम

Share it
Top