विश्लेषण: अब दुनियां भर में सबसे ऊंचे कद के होंगे सरदार डा. वल्लभभाई पटेल

विश्लेषण: अब दुनियां भर में सबसे ऊंचे कद के होंगे सरदार डा. वल्लभभाई पटेल

विश्वभर में सबसे चर्चित और ऊंची दिखने वाली प्रतिमा लौहपुरुष सरदार पटेल की प्रतिमा अब गुजरात में बनकर पूर्णतया तैयार हो चुकी है

इसका लोकार्पण 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की जयंती पर तत्कालीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाएगा। कुछ राजनीतिक पंडितों का कहना है कि आगामी आम चुनाव में यह सत्तारूढ़ बीजेपी के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही है जबकि कुछेक मानते हैं कि इससे बीजेपी को कोई खास लाभ नहीं होने वाला है क्योंकि एक प्रतिमा देश की असलियत को बिलकुल ही नहीं बदल सकती। खैर जो भी हो लेकिन विंध्याचल और सतपुड़ा की पहाडिय़ों के बीच साधुबेट टापू पर बनने वाली यह 182 मीटर ऊंची मूर्ति का निर्माण 42 महीने के रिकार्ड समय में पूर्ण होना वाकई अपने आप में एक मिसाल को दर्शाता है जो कि मौजूदा प्रधानमंत्री मोदी के पूर्व में देखे गए सपने को सम्पूर्ण करके दिखाता है।

निस्संदेह, विश्व में सबसे ऊंची स्टैच्यू आफ यूनिटी अब भारत ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व में एक विशाल प्रतिमा की छटा को बिखरता हुआ दुनियाभर के लोगों का ध्यान बरबस ही अपनी ओर खींच लेती है। नर्मदा नदी की कल-कल लहरों के बीच सात मंजिला इमारत के बराबर ऊंची यह प्रतिमा 85 फीट लंबे अपने पैरों पर खड़ी है जिसके होंठ की मोटाई एक आदमी की लंबाई के समतुल्य लगभग 6 फीट है।19 हजार,700 वर्ग मीटर में फैली इस परियोजना के साथ करीब 17 किलोमीटर लंबे तट पर फूलों की घाटी तैयार और सुसज्जित ऐसी घाटी है जो विदेशी पयर्टकों के मन को न चाहते हुए भी अपनी ओर आकर्षित करने पर विवश कर देता है। इतना ही नहीं, प्रतिमा में ऐसी व्यवस्था की गई है कि पर्यटक लिफ्ट के जरिये सरदार पटेल के हृदय तक भी बड़ी आसानीपूर्वक पहुँच सकते हैं।

यहां देखने वाली बात तो यह है कि 153 मीटर लंबी गैलरी से एक साथ 200 पर्यटक प्रतिमा को बड़ी सहजता से निहार सकेंगे । इंजीनियरों के मुताबिक, प्रतिमा परिसर में एक प्रदर्शनी मंजिल, एक मेमोरियल गार्डन और एक बड़ा संग्रहालय भी मौजूद है जिसमें सरदार जिंदगी से जुड़ी कई चीजों को बड़ी सहजता से सहेजा गया है जिसे ढूंढ पाना एक व्यकि के लिए बड़ी टेढ़ी खीर सिद्ध होता है। इनमें उनके करसमद में जन्म से लेकर लौह पुरुष बनने तक की विकास यात्र, व्यक्तिगत जिंदगी और गुजरात से उनके जुड़ाव को

भली-भांति पूर्वक देखा व समझा जा सकता है।

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गौरतलब है कि इस प्रतिमा को देखने के पश्चात अद्भुत इंजीनियरिंग का यह करिश्मा इंसान को तुच्छ होने का एहसास दिला देता है। इसमें कोई शक नहीं कि यह विशालकाय प्रतिमा भारत देश ही नहीं अपितु विदेशी पर्यटकों हेतु भी एकमात्र आकर्षण का केंद्र बिंदु अवश्य ही बनेगा।

इस प्रतिमा के विषय में तमाम राजनीतिक नेताओं का बताना है कि इस प्रतिमा का आइडिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तब आया था,जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे। 6 अक्टूबर 2010 को मोदी ने घोषणा की थी कि गुजरात के 50 साल पूरे होने पर इस प्रतिमा का निर्माण नर्मदा नदी में सरदार सरोवर बांध के पास साधु बेट पहाड़ी पर करेंगे। तब शायद उन्होंने भी यह कभी सपने में नहीं सोचा था कि भारत के इस महान लौहपुरुष के कद के अनुरूप ही उनकी प्रतिमा भी इतनी ही विश्वस्तरीय बन जाएगी। इस प्रकार मोदी जी ने जो जनता से वादा किया था, वह सभी लोगों को पूर्ण करके भी दिखाया है।

दिलचस्प बात तो यह है कि इस प्रतिमा की ऊंचाई अन्य विदेशी 'स्टेच्यू आफ लिबर्टी' की ऊंचाई से दुगनी और रियो डी जेनेरो में 'क्राइस्ट द रिडीमर' से चौगुनी है। इसकी लंबाई के बारे में इंजीनियर्स और राजनीतिक लोगों का अलग अलग मत है। राजनीतिक लोग कहते है कि पटेल की प्रतिमा की ऊंचाई 182 मीटर इसलिए रखी गई है क्योंकि गुजरात विधानसभा में 182 सीटें हैं जबकि इंजीनियर्स इसे महज एक इतेफाक से अधिक और कुछ नहीं मानते।

और तो और,2,989 करोड़ रुपये के खर्च से तैयार हुई यह प्रतिमा सबसे कम वक्त में निर्मित होने वाली दुनिया की सबसे पहली प्रतिमा है। बकौल चीफ इंजीनियर, प्रतिमा का निर्माण भूकंपरोधी तकनीक से किया गया है। इस पर 6.5 तीव्रता का भूकंप और 220 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं को भी सहने की अद्भुत शक्ति है।जहां इसके निर्माण में 4,076 कर्मचारी मौजूद रहे है, वहीं स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को आम आदमी के दिल में बसाने तथा सरदार का नवनीत लुक देने हेतु भारत से लेकर अमेरिका और चीन तक के शिल्पकारों ने कड़ी मशक्कत दर्ज कराई है। इसकी समुद्रतल से ऊंचाई 237.35 मीटर है।

इस विषय में मशहूर शिल्पकार राम सुथार कहते है कि प्रतिमा को सिंधु घाटी सभ्यता की समकालीन कला से मनमुग्ध होकर निर्मित कराया गया है। इसमें चार धातुओं के मिश्रण का भी समायोजन किया गया है जिससे बरसों तक इस अद्भुत प्रतिमा को जंग छू न सके। और तो और, इस विशालकाय प्रतिमा में 85 फीसदी तक तांबे का भी उपयोग किया गया है।

सुथार बताते हैं कि प्रतिमा में 70000 टन सीमेंट और 22500 टन स्टील व 1700 मीट्रिक टन तांबा लगाया हुआ है। इसके अतिरिक्त इसके चेहरे का डिजाइन तय करने के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट ने 10 लोगों की एक समिति भी बनाई गई थी जो काफी माथापच्ची करने के बाद इसके चेहरे का डिजाइन तय कर पाई थी। अंत में यह भी हम बताते चलें कि इस प्रतिमा का चेहरा 30 फीट का बनाया गया है ताकि भविष्य में दर्शकगण इस प्रतिमा को देखकर सरदार पटेल की महान शख्सियत की यादों को पुन: तरोताजा कर सकें।

- अनूप मिश्रा

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