यह 'स्वराज पार्टी' का पंगा क्या है?

यह स्वराज पार्टी का पंगा क्या है?

सच कहूं तो मैं योगेंद्र यादव का प्रशंसक हूं। 'हूं' कहना शायद उचित नहीं है, इसलिए कहूंगा- रहा हूं। महामना जब तक सामाजिक वैज्ञानिक थे, चुनाव विश्लेषक थे। दिल्ली स्थित सीएसडीएस के वरिष्ठ शोध फेलो थे, तब तक मुझे बहुत प्रिय थे। जनाबे-आला मुझे बहुत अक्लमंद प्राणी लगते थे। मेरे जो मित्र उर्दू से नावाकिफ हैं यानी उससे पहचान नहीं रखते, उनके लिए स्पष्ट कर देता हूं कि यह लफ्ज यानी शब्द अज्ञानी के लिए प्रयोग नहीं किया जाता है यानी 'मंद' इसमें इस तरह प्रयुक्त हुआ है कि वह अक्ल को मंद नहीं करता बल्कि उसमें इजाफा करता है। प्रिय इसलिए कि तब तक तर्कपूर्ण और तथ्यपूर्ण बात करते थे लेकिन जैसे ही सदी के सर्वश्रेष्ठ सत्यवादी केजरीवाल के सान्निध्य में आए, देश की आकाशवाणी और दूरदर्शन पर इनकी बातें सुन कर मेरे मस्तिष्क पर घनघोर घटाएं घिर आईं। केजरीवाल यानी एक हजार फीसदी फ्यूज अनार। वैसे आप चाहें तो दो चीजों के लिए मैं इस बनिए की प्रशंसा करने के लिए तैयार हूं - इसने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत अच्छा काम किया है। अन्य राज्यों के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया है लेकिन संकट 'मोदी मंत्र' का है। बेचारा, किस्मत का मारा क्या करे? काम पर ध्यान देने के बजाय 'राग मोदी' अलाप कर इसने अपना सत्यानाश कर लिया। शुरू में साहित्य से जुड़े कुछ तोंदू टाइप लोग भी वाममार्ग छोड़ कर इसके साथ हो लिए थे लेकिन फिर मेरी समझ में आया कि यह मौसमी बुखार है। बनिया को देख कर बनिया रंग बदलता ही है। धंधा ऐसे ही चलता है। खैर, यह सब छोड़ें और मुद्दे पर आएं। हुआ यह कि आज एक स्कार्पियो मेरे घर से कुछ दूर रुकी। उस पर एक माइक लगा था और दो सफेद दाढ़ीधारी सज्जन उसमें बैठे थे। एक रिकार्डेड भाषण बज रहा था-भाइयों और बहनों (वे गलत भाइयों और बहनों बोल रहे थे), हम आपको मोहल्ला सरकार देने आए हैं। हम आपको उम्मीदवार को वापस बुलाने का अधिकार देंगे। हमारा उम्मीदवार आपको अपना बजट बताएगा। उसे कहां खर्च करना है, यह बताएगा। आपके इलाके में मोहल्ला सरकार बनेगी। आपको अभिव्यक्ति की आजादी दिलाई जाएगी। इस पार्टी में योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण जैसे योद्धा हैं। कृपया सोच-समझ कर वोट दें। मैं बालकनी में खड़ा सिगरेट पी रहा था। मैंने उन्हें पुकारा - भाईसाहब, जरा इधर आओ। वे हर्षित मुद्रा में वाहन फौरन मेरे दरवाजे पर ले आए। मैंने पूछा - यह प्रशांत भूषण आपको बुद्धिमान आदमी लगता है? प्रफुल्लित मुद्रा में मेरे घर के सामने आए दोनों सज्जनों का चेहरा अचानक कालिख पुता सा हो गया। मुझे उनके श्रीमुख से लेडी गागा जैसा कुछ सुनाई दिया तो कुछ और आश्चर्य हुआ। मैंने कहा - यदुवंशी आंकड़ेबाज को कहिएगा कि अपनी पार्टी ढंग से चलानी है तो इस अनपढ़ से फौरन पीछा छुड़ाए। इससे समझदार तो केजरीवाल था। दोनों फौरन गाड़ी में बैठे और भागने लगे। मैंने आवाज लगाई - अरे मियां, पानी तो पीते जाओ। क्या बताऊं, रुके ही नहीं। मैं तो सलीम मियां तक पानी पहुंचाना चाहता था पर अफसोस दोनों ऐसे तड़ीपार हुए कि मैं पकड़ ही नहीं सका।

-आलोक शर्मा

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