जब ऑफिस जाने का मूड न हो

जब ऑफिस जाने का मूड न हो

ऑफिस जाने का तनाव महिलाओं के लिये कम नहीं होता। उन्हें घर बाहर दोनों के बीच सामंजस्य बनाकर चलना होता है ऐसे में कई बार उन्हें शारीरिक और मानसिक थकान से जूझना पड़ता है। पीरियड्स के टाइम भी कई बार महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

ऐसे में कई बार उनका मन ऑफिस जाने का नहीं होता। वे घर पर रहकर आराम करना चाहती हैं, इसलिए वे बहाने बनाकर छुट्टी लेती हैं और यह उनकी आदत में शुमार होने लगता है। इससे बॉस की नाराजगी तो झेलनी ही पड़ती है क्लीग्स भी चिढऩे लगते हैं क्योंकि उन पर कार्यभार बढ़ जाता है। इसलिए छुट्टी को आदत न बनाकर सीमित यानी माह में एक दो बार ही लें तो ही बेहतर होगा। बीमारी के कारण ली गई ऐसी छुट्टी आपकी बैट्री रिचार्ज कर आपको तरोताजा करने वाली साबित हो सकती है। लेकिन थोड़ी केयर के साथ।

बहाना होशियारी से - बहाना ऐसे बनाएं कि पकड़ में न आएं, तभी मजा है। आप बीमारी का बहाना बनायें तो ऐसी बीमारी का जो एक ही दिन परेशान करती हो, टायॅफायड, फ्लू या मलेरिया नहीं क्योंकि इससे लोग आपको बहानेबाज मानेंगे।

गैर जिम्मेदार न बनें - आपको जब भी छुट्टी लेनी हो, स्वयं फोन कर बॉस से छुट्टी की रिक्वेस्ट करें। किसी और को यह काम न सौंपें। इससे गलत इंप्रेशन पड़ेगा। बिना बताए तो छुट्टी हर्गिज न लें यह आपको गैर जिम्मेदार दर्शाता है। काम की अधिकता से बचने के लिए छुट्टी लेना उचित नहीं और न ही बॉस की झाड़ से डर कर फिर से एक दिन और घर पर बिताना आपके लिए हितकर है। काम पूरा होने के बाद ही छुट्टी लेना ठीक होगा।

छुट्टी कब लें - छुट्टी अगर आप सोच समझकर लें, तभी आप बॉस की गुड बुक्स में रहेंगी। बिजनेस में सप्ताह का शुरूआती और आखिरी दिन ज्यादा व्यस्ततापूर्ण होते हैं इसलिए बेहतर होगा इन दिनों छुट्टी न ली जाए लेकिन यह फार्मूला हर संस्थान में लागू नहीं होगा। कई संस्थानों में शनिवार ही छुट्टी के लिये ज्यादा वाजिब दिन होगा क्योंकि इससे आपको लगातार दो दिन आराम के लिये मिल जाते हैं।

कार्यभार होने पर छुट्टी लेना वर्क एथिक्स के विरूद्ध है। कार्य समाप्त होने पर ही आराम के लिए छुट्टी लेने की सोचें। हां, इतना अवश्य है कि आप मेंटल ब्रेकडाउन की हद तक न पहुंची हुई हों। तब आपका मानसिक संतुलन ही आपकी प्राथमिकता है। इसमें जरा भी कोताही न बरतें।

ध्यान रहे - एक ही बहाना बार-बार रिपीट न करें। इससे आप पकड़ में आ जाएंगी। न ही छुट्टी लेने का एक ही पैटर्न रखें। आपकी योग्यता खतरे में नहीं पडऩी चाहिए। योग्यता के मोल पर छुट्टियां महंगी पड़ेगी। आपकी नौकरी पर बन सकती है।

जीवन में समझदारी बहुत महत्त्वपूर्ण है। इससे जीवन आसान बनता है। बुलाई हुई मुसीबतों से आप बचे रहते हैं। इसी तरह ऑफिस कल्चर के भी कुछ नियम हैं जिन्हें फॉलो करना समझदारी होगी।

मात्र मूड न होने पर ऑफिस से छुट्टी लेकर घर बैठना अपने को कुछ ज्यादा ही पेंपर करना होगा। अगर आप जीवन में आगे बढ़कर कुछ हासिल करना चाहती हैं और अपने को प्रूव करने की ख्वाहिश रखती हैं तो मन को अनुशासित करना आपका कर्तव्य है।

- उषा जैन 'शीरीं'

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