शक सिर्फ शक नहीं, कमजोरी भी है

शक सिर्फ शक नहीं, कमजोरी भी है

पूजा को अपने पति पर चौबीसों घंटे शक रहता है। उसके आते-जाते वह उसे शक की निगाहों से देखती है। बात-बात पर वह अपना शक ज़ाहिर करती है। आखिर इसके पीछे कारण क्या है

उसके पति की कई सहकर्मी हैं जो उसके साथ काम करती हैं। पूजा अपने पति को तब भी गलत समझती है जबकि उसका पति अपनी सहकर्मियों की कभी तारीफें नहीं करता, घर में उनका जिक्र नहीं करता। अगर वे कहीं मिल जायें तो केवल 'हैलो' करके निकल जाता है। पूजा ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं है। आखिरकार इस शक के पीछे क्या छिपा है

अधिकांश मध्यमवर्गीय परिवारों की यही परेशानी रहती है। यदि पति कमाता है तो पत्नी और यदि पत्नी बाहर कमाती है तो पति के मन में शक की उपज हो जाती है। कहना गलत न होगा कि यह शक एक अच्छे-भले घर को बिखेर देता है। देखा गया है कि यदि एक ही जोड़े में से कम पढ़ा-लिखा साथी बाहर कमाने जाये तो शक बहुत जल्दी उपजता है।

पति-पत्नी एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं, इसी कारण वे एक-दूसरे पर बहुत जल्दी शक कर बैठते हैं। यह कहावत बहुत पहले से चली आ रही है पर क्या वाकई में यह कारण है शक का? गौर किया जाये कि यदि कमाऊ पति किसी और का हो जाये तो पत्नी कहां से गुजारा करेगी? अथवा कमाऊ पत्नी किसी और की हो जाये तो निठल्ला या कम कमाने वाला पति अकेला क्या खायेगा? यह एक तरह से निर्भरता ही तो है जो शक जैसे कांटे को पनपने के लिए जगह देती है।

पैसे की निर्भरता ही हमेशा शक को पैदा नहीं करती। ऐसा भी होता है जब पति-पत्नी दोनों कमाने वाले हों, तब शक का कारण क्या होगा दरअसल लोगों पर अपना प्रभावी असर खो देने का डर भी शक को उत्पन्न करता है। क्या होगा यदि आपका जीवनसाथी आपको छोड़ जाये? निश्चित ही लोग आपको खरी-खोटी सुनायेंगे। आप न किसी से दबे हैं, न कभी किसी की सुनी है, तब यह सब सोचते-सोचते शक पैदा होना लाजिमी है, मगर यह शक इसी रिश्ते के दरमियां ही क्यों जगह बनाता है

सबसे कमजोर और नाजुक रिश्ता पति-पत्नी का होता है। दो अजनबी जब शादी के बंधन में बंधते हैं तो जरूरी नहीं कि वे एक दूसरे के स्वभाव को पहले भी जानते हों। यदि जानते हों तो भी भटकने में कितनी देर लगती है।

नकारात्मक सोच वाले व्यक्ति विश्वास की जगह शक को अपने रिश्ते का आधार बनाते चलते हैं जो वक्त के साथ परिपक्व होता जाता है मगर इस चीज का आधार कमजोरी ही है। उस पर निर्भर रहने की कमजोरी यदि आप में है तो निकाल फेंकिए इस कमजोरी को। फिर आप न उन पर शक कर पायेंगी, न उन पर निर्भर रहेंगी।

- शिखा चौधरी

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