लड़की को दिखावे की वस्तु नहीं समझें

लड़की को दिखावे की वस्तु नहीं समझें

लड़कियों की सुंदरता को केवल उनकी शारीरिक बनावट या गोरे रंग से आंकने का चलन पहले से रहा है और आज भी लगातार बढ़ता जा रहा है। आज भी किसी लड़की को उसकी बौद्धिक क्षमता या उसके सदगुणों के आधार पर नहीं देखा जाता है। समाज में गैरबराबरी की वजह से सुन्दर लड़कियां जहाँ आत्मविश्वासी होती हैं, वहीं कुरूप लड़कियाँ हीन भावना से ग्रसित होती हैं।
शादी की उम्र पार कर रही असुंदर लड़कियों की अपनी अलग अलग दास्तान है। इन लड़कियों के समाज से कुछ सवालात भी हैं ? लोगों के पास उन सवालों का कोई मुक्कमल जवाब नहीं है। आइये आपको मिलवाते हैं। इन समस्याओं से जूझ रही कुछ लड़कियों से......।
32 वर्षीय सरला कुमारी बैंक में नौकरी करती है। उसके पिता इंजीनियर हैं। सरला का कद नाटा है। रंग भी सांवला है। इसकी वजह से उसकी शादी नहीं हो पा रही है। उसके इंजीनियर पिता सैंकड़ों लड़के वालों के दरवाजे पर गये। लड़के वालों ने लड़की देखी परन्तु लोग ना नुकूर कर मुकरते रहे। सरला के परिवार वालों के पास सबकुछ रहते हुए भी बेटी की शादी नहीं हो पा रही है जिसकी वजह से पूरा परिवार टेंशन में जीवन व्यतीत कर रहा
है।
28 वर्षीय ब्यूटी सिन्हा ने एम ए समाजशास्त्र से किया है। देखने में रंग गोरा है लेकिन दुबली पतली है और हाइट मात्र चार फीट चार इंच है। इसकी वजह से इसकी शादी नहीं हो पा रही है। इसके माता पिता ने कितने लड़कों वालों को प्रस्ताव दिया। जमीन बेचकर तिलक दहेज में मोटी रकम तक देने की बात हुई लेकिन अभी तक उसकी शादी तय नहीं हो पायी। लगातार पांच वर्ष से कितने लड़के वाले आये, लड़की देखी और यही बोलकर गये कि परिवार में राय विचार कर खबर करेंगे। फोन कर एक शब्द में बोलते है। परिवार में राय नहीं हो पा रही है।
30 वर्षीय सीमा शर्मा पांच फीट पाँच इंच लंबी है। एम बी ए की है परंतु रंग काला है। इसकी वजह से इसकी शादी नहीं हो पा रही है।
28 वर्षीय सरला कुमारी की शादी इस वजह से नहीं हो पा रही है कि उसके गाल पर जख्म के निशान है।
इस तरह से समाज में बहुत सारी लड़कियों की शादी काली,नाटी, दुबली, पतली या अन्य वजहों से नहीं हो पा रही है। इन लड़कियों के परिवार वालों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
जीवन साथी चुनने का अधिकार नहीं-
लड़कियों को अपनी पसंद के अनुसार जीवन साथी तक चुनने का अधिकार नहीं है। जो लड़के लड़कियां अपने पसंद के अनुसार एक दूसरे को चुनते हैं। उसमें सिर्फ सुंदरता ही मायने नहीं रखती। वे एक दूसरे के विचारों से भी सहमत होते हैं। तभी विवाह के बन्धन में बंधने के लिए राजी होते हैं।
क्या कहती हैं लड़कियाँ
इन लड़कियों का कहना है कि जिस तरह से कुदरत ने हमलोगों को बनाया है, उसी तरह लड़कों को भी परन्तु लड़के वाले अपने लड़कों को नहीं देखते। उनका लड़का कितना भी बदसूरत हो परन्तु उन्हें बीबी खूबसूरत चाहिये। लड़कों को भी खूबसूरती के मामले में अपने गिरेबाँ में झाँक कर देखना चाहिए।
समाज का दायित्व
हर किसी को खूबसूरत बीबी चाहिये परन्तु जो सुन्दर नहीं है उसमें उन लड़कियों का क्या दोष है? वे अपनी तरफ से कुछ भी नहीं कर सकती।
समाज के लोगों को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिये। यह एक अहम मुद्दा है। समाज को व्यवस्थित ढंग से चलाने के लिए शादी विवाह की परंपरा का ईजाद हुआ । शादी परिवार को बढ़ाने के लिए है। लड़की को मौज मस्ती और दिखावे की वस्तु नहीं समझे। हर किसी को सुंदर बीबी चाहिये तो उन लड़कियों का क्या होगा जो प्राकृतिक रूप से असुंदर हैं।
समाधान क्या है-
इससे निजात पाने के लिए एक ही रास्ता दिखता है और वह है प्रेम विवाह। प्रेम विवाह सौंदर्य नहीं, हृदय के मिलन से होता है। इसमें लड़का जितना अधिक प्रभावित लड़की के सौंदर्य से होता है, उससे ज्यादा प्रभावित लड़की के व्यवहार से भी होता है। इस तरह प्रेम विवाह करने वाले लोगों के बीच देखा जाता है परन्तु उसमें अड़चन पैदा करता है -पारम्परिक सामाजिक बंधन जिसे किसी ना किसी रूप में ध्वस्त होना ही चाहिए।
- शम्भू शरण सत्यार्थी

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