आत्मविश्वास जगाएं

आत्मविश्वास जगाएं

आज भारत में प्रतिभाओं की कमी महसूस की जा रही है। भारत की धरा चैंपियनों से खाली मानी जा रही है। चैंपियन अथक परिश्रम और लगन से बनते हैं।
खिलाडिय़ों की मानसिक चेतना को बदलना होगा। इसके लिए सर्वप्रथम आत्मविश्वास की आवश्यकता है। यदि एक बार आपका आत्म विश्वास बन गया तो सफलता आपके कदम चूमेगी। महानता का स्रोत मस्तिष्क है लेकिन भारत में जैसे सभी जन्म से ही हीन भावना के शिकार हैं। प्रतिद्वंद्वी देखकर हाथ पांव फूल जाते हैं और ऐसी बाजी हार जाते हैं जो जीतनी आसानी होती है। अत: आत्मविश्वास के साथ तगड़े से तगड़े प्रतिद्वंद्वी का सामना करना चाहिए लेकिन हमारे खिलाडिय़ों को यही सिखाया जाता है कि बड़ों की कभी भी अवमानना मत करो, समझौतावादी बनो। यही वजह है जिससे भारतीय खिलाड़ी बहुत पीछे हैं।
दुनिया के दूसरे देशों के मुकाबले हम कितने पीछे हैं। हर देश का नाम किसी न किसी विशेषण से जुड़ा है। अशिष्ट आस्टेऊलियाई, एथलेटिक अमेरिका, यांत्रिक रूसी, अविचल स्वीडिश लेकिन भारत के आगे कुछ नहीं। कोई ऐसी विशेषता नहीं जो दूर से दिखे। हम ऐसे खिलाड़ी नहीं बना पायेंगे जिनकी चाल ढाल देखकर ही प्रति़द्वंद्वी की हवा सरक जाए।
हमारे खिलाड़ी एकजुट होकर टीम भावना से खेलें। फिर देखिए एक के बाद एक जीत भारत की होगी। हम खेल के हर क्षेत्र में उत्साहित हो उठते हैं और जब हार के समीप पहुंचते हैं तो बिखर जाते हैं। अब यह सब छोडऩा होगा और जीत हार दोनों को एक ही तरह देखना होगा। यदि ऐसा हुआ तो जीत हमारी होगी।
-जगतकिशोर सोलंकी 'अनीत'

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