लोकप्रिय है हिना

लोकप्रिय है हिना

हिना का ज्यादा प्रचलित नाम है मेंहदी। भारतीय जीवन में मेंहदी के रंग सदियों से रचे बसे हैं। इसमें सिर्फ गुण ही गुण हैं, कोई साइड इफेक्ट, कोई नुकसान नहीं। इसकी तासीर ठंडी होने से गर्मी में यह हाथ, पैर और सिर को, जहां यह उपयोग में लाई जाती है, शीतलता प्रदान करती है।
राजस्थान और मध्यप्रदेश में पहले इसका खासतौर से उपयोग होता था। कोई तीज त्यौहार हो, दुल्हन का श्रृंगार करना हो तो मेंहदी के बगैर सब अधूरा था। हाथों पर मेंहदी की तरह-तरह की कलाकारिता ने जहां कई बेसहारा गरीब औरतों को रोजगार दिया, वहीं उम्र से पहले बाल पक जाने की त्रसदी झेलने वाली स्त्रियों को राहत भी दी। आखिर जवान और खूबसूरत कौन नहीं दिखना चाहता। हर दिल अजीज मनभावन मेंहदी आखिर है क्या?
हरे रंग की ये पत्तियां झाडिय़ों में लगती हैं। हाथ और बालों पर कुछ घंटे बाद यह अपना करिश्मा रंग कर दिखाती हैं। यह रंग काफी पक्का होता है और एकदम आसानी से नहीं छूटता। पानी में भीगने के पश्चात् ही इसे काम में लाया जाता है। इस की सुगंध तेज होती है।
मेंहदी बालों के लिए सर्वोत्तम कंडीशनर भी है। अत्यधिक चिकने बालों को जब सेट करना मुश्किल होता है तो हिना के प्रयोग से प्राकृतिक तेल की मात्र कम की जा सकती है। इससे केश सूख कर ठीक से सेट हो जाते हैं। रंग के साथ हिना बालों को अतिरिक्त चमक भी देती है, बालों को पर्मिंग जैसा लुक देती है।
बालों को प्राकृतिक रंग देने के लिये हिना में अन्य कई तत्व मिलाये जाते हैं जैसे कॉफी पाउडर, नीम, आंवला, मेथीदाना, अखरोट इत्यादि। अन्य तत्व अगर हिना में न मिलाये जाएं तो यह लाल रंग देती है जो आंखों को अच्छा नहीं लगता और साफ पता चलता है कि ये मेंहदी रंगे बाल हैं, खासकर अगर बाल बिलकुल ही सफेद हों लेकिन वही हिना अगर उपयुक्त तत्वों को मिलाकर काले, भूरे गहरे बालों पर लगाई जाती है तो जो रंग यह छोड़ती है उसके क्या कहने!
हिना कम से कम डेढ़ दो घंटे बालों में लगा रहना चाहिए, तभी अच्छा रंग देगा। तत्पश्चात् हमें खूब खुले पानी से धो लेना चाहिए। याद रहे साबुन शैंपू इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। धोना इसलिए जरूरी है क्योंकि इसके रेतीले कण बालों के कोर्टेक्स को नष्ट करने की शक्ति रखते हैं। कोर्टेक्स ही बालों को मुलायमियत और लचीलापन प्रदान करता है।
हिना लगाने के बाद बालों से छेड़-छाड़ उचित नहीं क्योंकि बाद में लगाया जाने वाला कोई भी केमिकल इसकी रंगत बदल देगा। यह पर्म के प्रभाव को भी कम कर देती है इसलिए अगर पर्मिंग करवाना हो तो उसे हिना लगाने से पहले करवायें। हिना के गुणों के कारण यह विदेशों में भी अपना स्थान बना रही है।
जहां पारंपरिक चीजों के गुणों से आज देश विदेश फिर से प्रभावित हो चले हैं उनमें हिना का अपना महत्त्वपूर्ण स्थान है।
- उषा जैन 'शीरीं'

Share it
Top