जब शादी पुरानी हो जाए

जब शादी पुरानी हो जाए

जिस प्रकार प्रकृति अपने रंग-रूप में नित नए परिवर्तन कर अपने आकर्षण द्वारा मानव मन को आकर्षित करती है अर्थात बांधती है, ठीक उसी प्रकार हम अपनी दिनचर्या में थोड़ा परिवर्तन लाकर, अपने दांपत्य संबंधों में सजीवता ला सकते हैं। जिन्दगी के कुछ पल तो बस आपके हों, रोमांस भरे।
इसके लिए सक्रि य होना पड़ेगा, न केवल पति को पल्लू से बांधने के लिए बल्कि इस एहसास के लिए भी कि आज भी आपका जीवन उतना ही उल्लासपूर्ण है जितना कॉलेज के जमाने में हुआ करता था।

इसके लिए हम कुछ टिप्स आपको बताते हैं। आप भी आजमाइए ताकि सरस रहे आपका दांपत्य जीवन।
संयुक्त परिवार की विवशता यह है कि पति-पत्नी एक-दूसरे से सिर्फ रात में ही मिल सकते हैं जिससे पति-पत्नी के बीच मानसिक प्यार घटता चला जाता है और उनके ऊपर पति-पत्नी का सिर्फ लेबल लगा रह जाता है। इसके लिए उन्हें चाहिए कि एक-दूसरे का मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए कुछ ध्यान रखें जैसे वे अपने बीच कोई इशारा अपनाएं जिसे वे दोनों ही समझें। जब भी एक-दूसरे के सम्मुख आएं तो वे कुछ करें। उनमें उस इशारे के द्वारा भावात्मक प्रेम बढ़ता जाएगा। इसके अलावा चाय-कॉफी या आइसक्र ीम लाकर एक ही कप से दोनों उसका मजा लें तथा आंखों ही आंखों में कुछ महसूस करें।
पति को चाहिए कि कभी-कभी पत्नी को बाहर घुमाने भी ले जाए तथा उसकी पसंद का खाना-खिलाए तथा किसी पहाड़ी या मुलायम घास पर बैठ कर वे शादी के प्रारंभिक क्षणों को याद करें। यही वो चंद लम्हे हैं जो निजी संपत्ति हैं। आप दोनों सोचें और स्मृतियों के परिदृश्य से उन क्षणों को ताजा करें जब पहली बार शादी के पूर्व या शादी के बाद कभी इसी तरह मिले थे।
वातावरण बिलकुल रोमांटिक रखें। यह नुस्खा ऐसा है कि आप किसी भी उम्र में अपना सकते हैं। यदि आप संयुक्त परिवार में नहीं रहती तो इस सारे रस का आनंद आप घर में और भी ज्यादा ले सकती हैं।
दो शायर बैठक में बैठे बातचीत में मशगूल थे कि दरवाजे पर दस्तक हुई। गृहस्वामी उठकर दरवाजे तक गया-पूछा, कौन है? जवाब आया- 'बुढ़ापा'। शायर ने वहीं से आवाज लगाई - सुनो भाग्यवान, तुम्हारा कोई रिश्तेदार आया है, उसे भीतर ले आओ।
कहने का अभिप्राय है कि अक्सर पति नहीं, पत्नी ही बुढ़ा जाती है और यह त्रसद स्थिति घरेलू औरतों के साथ ज्यादा है। वजह है पारिवारिक दायित्व और बिस्तर पर पति जो चाहता है वह चाहकर भी शारीरिक बोझिलता की वजह से पूरा नहीं कर पाती। जितना निभाऊ व नीरस वह अपनी इस दिनचर्या को मानती हैं, उतने ही निभाऊ व नीरस होते जाते हैं उनके अंतरंग संबंध।
वह दिन-प्रतिदिन चिड़चिड़ी स्वभाव की हो जाती है। खाना बनाना, घर साफ करना और बच्चों को संभालना, वह अपना भाग्य समझ लेती है। यह बोझ खुद अपने ऊपर रखकर वह अपनी खुशी को अंधेरे कुएं में धकेलती चली जाती है। यह उन स्त्रियों की व्यथा है जो काम की बोझिलता के कारण असमय बुढ़ा जाती हैं।
ऐसे में पति को चाहिए पत्नी को महीनों में एक आध बार रोमांटिक फिल्म दिखला दे। यदि वे संयुक्त परिवार में रह रहे हों तो भी उन्हें चाहिए कि वे अपने शयनकक्ष में कोई वयस्क फिल्म ले आएं जो सभी के सो जाने के बाद वे धीमी आवाज कर के सुन सकते हैं।
अपने कमरे में सुगंधित इत्र छिड़कें तथा अपना मनपसंद डेऊस भी पहन सकते हैं। यदि आपके बच्चे हैं तो बच्चों को कुछ दिन के लिए किसी निकटतम संबंधी के घर भेज सकते हैं जिससे आपकी दो दिन छुट्टियां तीन-चार महीनों के लिए स्फूर्तिदायक प्रतीत होगी।
इसके अलावा आप कभी-कभी घर व बाहर में रात के समय जाते समय वो कपड़े पहन सकती हैं जो शादी पूर्व आपको पसंद थे।
ऐसे अनेक गाने हैं जो किसी भी उम्र के लोगों को रोमांस करने के लिए मजबूर कर देते हैं। आपको जब भी मौका मिले, इस तरह के गानों के कैसेट सुनते रहिए और गुनगुनाते रहिए और खुद में एक फर्क महसूस कीजिए।
दरअसल संगीत में ऐसा जादू है कि वह किसी भी प्रकार के बोझिल क्षणों को यकायक रंगीन बना देता है। दुख के आने से पहले गुनगुना लेने से दु:ख कम हो जाता है। काम करते हुए गुनगुनाते रहने से काम बोझ नहीं लगता है।
रात में सोने से पूर्व भी हल्का-हल्का संगीत सुनते रहने से नींद अच्छी आती है। सुबह पति को उठाना हो तो बिना किसी आक्रश के कोई रोमांटिक गाना गाते हुए उठाएं जिससे वे भी बिना झल्लाए हुए ताजा होकर तुरंत उठ जाएंगे।
सुबह की ऐसी गुनगुनाती शुरूआत दोनों को दिन भर गुलाब की तरह ताजा रखेगी। इसे यदि आप दिनचर्या का अंग बना लें तो निश्चय ही जिन्दगी में किसी प्रकार की नीरसता नहीं दिखलाई देगी।
यदि कभी आप गाना सुन रही होती हैं और आपके पति की पसंद का गाना है और वे आपसे दूर बैठे हों तो आप ऊंची आवाज कर सकती हैं ताकि वे भी सुनें और आपके प्रति उनकी प्रेमभरी भावनाएं जागृत हों।
ईश्वर ने पति-पत्नी को एक-दूसरे का ख्याल रखने के लिए बनाया है। अपने साथी की किसी पसंद को नापसंद न करें। कभी-कभी न करना शायद ठीक ही होगा किंतु उसे भी प्यार से नापसंद करें।
यह मानसिकता लोग नाहक ही बना लेते हैं कि कई वर्ष पुराने विवाह का आकर्षण घट जाता है। सच तो यह है कि इसे हम नए वैवाहिक जीवन जैसा बना सकते हैं। जरूरत बस थोड़ी सी सक्रि यता की है।
बहरहाल जब भी चाहें, जहां भी चाहें इनमें से किन्हीं भी टिप्स को अपनाइए और अपने दांपत्य जीवन को फिर से सजीव बनाइए।
- संगीता

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