बचिए आग की दुर्घटनाओं से

बचिए आग की दुर्घटनाओं से

तुलसी के स्वरस में बराबर मात्र में अदरक के रस को मिलाकर एक-एक चम्मच की मात्र में दिन में तीन बार पिलाने से शरीर के अंदर का ताप मिटता है।
- जले हुए स्थान पर गाय का घी या शहद चुपडऩे से अप्रत्याशित लाभ होता है।
- ठण्डे पानी की पट्टी देते रहने से चमड़े पर काला-धब्बा नहीं पड़ता।
- अंगूर का रस, संतरे का रस पिलाते रहने से घाव में मवाद नहीं आता है और घाव जल्दी सूखता है।
- आग से घायल अंग को शीतल पानी में लगभग आधे घंटे तक डुबो कर रखने से उसकी जलन कम होती है।
- जले हुए भाग पर तुलसी के पत्ते एवं प्याज की लुगदी को थोप देने से घाव नहीं बनता।
जल जाने पर रोगी को अधिक प्यास लगती है क्योंकि जलने पर शरीर का तरल कम हो जाता है। रोगी को पानी पीने के लिए दिया जा सकता है परन्तु एक साथ काफी पानी कभी न देकर घूंट-घूंट करके पिलाना चाहिए। रोगी को एक-एक चम्मच पानी या शिकंजी देना उचित होता है। अगर कम मात्र में जला हुआ हो तो निम्नांकित उपचार घर पर भी किया जा सकता है।
प्राथमिक उपचार:- रोगी को चिकित्सालय ले जाने से पहले आवश्यक प्राथमिक उपचार अवश्य कर देना चाहिए। जले हुए भाग पर गोबर, गीली मिट्टी, नीली स्याही या टूथ पेस्ट आदि कभी भी नहीं लगाना चाहिए। इनके लगाने से संक्र मण होने का भय बन जाता है। अगर अस्पताल दूर है तो रोगी को दर्द दूर करने की दवा दी जा सकती है।
बिजली की आग को रोकने के लिए तत्काल 'मेन स्विच' को बंद कर दीजिए। उसके बाद आग में फंसे लोगों को निकालने का उपाय कीजिए। रसायनों से लगी आग को बुझाने के लिए बालू, मिट्टी आदि का प्रयोग करना चाहिए। बालू न होने पर संबंधित व्यक्ति को कम्बल में लपेटकर या जमीन पर लुढ़कवाकर आग पर काबू पाया जा सकता है।
पानी छोडऩे से फफोले अवश्य पड़ जाते हैं परन्तु रोगी की जान बचने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। इससे रोगी के शरीर का ताप कम होकर उसे ठंडक मिलती है और उसकी जलन व दर्द कम होता है।
लोगों का मानना होता है कि आग लगने पर पानी को छिड़कने से नुकसान होता है। यह बात सही नहीं है। जल रहे व्यक्ति पर पानी छोडऩे से अधिक उत्तम उपाय और कोई नहीं होता।
आग लगने पर क्या करें:- अगर दुर्भाग्यवश आग लग ही जाए तो घबराना नहीं चाहिए बल्कि सबसे पहले आग से बाहर निकलने का प्रयास करना चाहिए। कपड़ों को आग ने पकड़ लिया तो बिना एक पल की देरी किए आग को बुझाने का प्रयास करना चाहिए। बिजली या कुछ खास पदार्थों से लगी आग को छोड़कर अन्य किस्म की आग को बुझाने के लिए रोगी पर तत्काल पानी का प्रयोग करना चाहिए।
बिजली तार के ताप के प्रभाव से व्यक्ति या तो बुरी तरह से जलकर मर सकता है या उसके बदन का कोई हिस्सा जल सकता है। बिजली के करंट से व्यक्ति की रक्त वाहिकाएं निर्जीव हो जाती हैं, चेतना शून्य हो जाती है अत: आयरन करते समय, हीटर का इस्तेमाल करते समय, गीजर का प्रयोग करते समय, मिक्सी को चलाते समय या रेफ्रिजरेटर तथा वाशिंग मशीन के प्रयोग के समय सचेत रहना आवश्यक होता है।
घरों में अनेक तरह के बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल होता है। कच्ची वायरिंग तथा जगह-जगह पर तार के जोड़ों से चिंगारियां निकल सकती हैं। अगर वायरिंग टेम्परेरी है तो उसके अगल-बगल में कपड़ों को कतई न रखें। बिजली से या आग के दुर्घटना के बचाव के लिए अपने यहां 'सर्किट ब्रेकर' अवश्य लगवा लें।
अगर गैस सिलेंडर का प्रयोग करती हों तो उसकी हर रोज सफाई करें। जलाने से पहले उसके रबड़ ट्यूब को देख लें। चूहे या रसोई के उपकरणों की ठोकर से ट्यूब क्षतिग्रस्त तो नहीं हो गई है। पका हुआ खाना कभी भी सिलेंडर के पास न रखें। बंद करते समय सिलेंडर की नॉब के साथ ही चूल्हे की नॉब को भी बंद करना न भूलें।
इससे बचने के लिए आवश्यक है कि स्टोव में तेल हमेशा छानकर ही भरें। जलते स्टोव में कभी भी तेल न डालें। स्टोव खरीदते समय अच्छे किस्म का प्रमाणित स्टोव ही खरीदें। बत्तियों वाला स्टोव अच्छा होता है। इनकी ताप क्षमता भी काफी अच्छी होती है।
अगर प्रेशर स्टोव का इस्तेमाल करती हों तो बेहद सावधानी बरतें। ताप-क्षमता भी गैस के समान होती है। तेल में कचरा होने के कारण कभी-कभी स्टोव जलते-जलते एकाएक बुझ जाता है। स्टोव में पिन लगाने पर मिट्टी का तेल भभक के साथ समीप बैठे व्यक्ति पर पड़ता है और आग लग जाती है।
गृहणियों को भोजन बनाते सूती वस्त्र ही पहनने चाहिए। नाइलोन, पॉलिस्टर और रेशमी कपड़ों को पहन कर रसोई घर के काम नहीं करने चाहिए क्योंकि ये वस्त्र आग की गरमी को पाकर बदन से चिपक जाते हैं। भोजन बनाते समय लंबे-चौड़े, ढीले-ढाले, घिसटने वाले वस्त्र भी नहीं पहनने चाहिएं। सर्वेक्षण के आधार पर यह पाया गया है कि साड़ी की अपेक्षा सलवार कुरता पहनने वाली औरतों को आग-हादसे का सामना कम करना पड़ता है।
देश में अभी भी हजारों गृहणियां प्रति वर्ष भोजन बनाते समय आग की चपेट में आ जाती हैं। गांवों में जहां मवेशियों को मच्छरों से बचाने के लिए कूड़ों के ढेर में आग लगा कर धुआं किया जाता है, वहां आग भड़कने की अधिक संभावना बनी रहती है। इस स्थिति में विशेष सावधानी रखनी होती है।
आग कभी भी और कहीं भी लग सकती है। आग से धन संपत्ति के साथ-साथ अमूल्य मानव जीवन भी नष्ट हो सकता है। आवश्यक सावधानी बरतने पर जान-माल के नुकसान को रोका जा सकता है।

- पूनम दिनकर-

- पूनम दिनकर-

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