विवाह बंधन को अतीत से मुक्त रखें

विवाह बंधन को अतीत से मुक्त रखें

किशोरावस्था में अक्सर प्रेम जैसी नाजुक भावना उमडऩे लगती है। अक्सर ऐसा प्रेम इंसान के जेहन में कुछ बातें हमेशा के लिए डाल देता है जिन्हें व्यक्ति अपनी पूरी उम्र में कभी भूल नहीं पाता। हमारे समाज के विचार भी इतने विकसित नहीं हैं कि इस अवस्था के प्रेम को स्वीकृति दे सके। यही कारण है कि यह प्रेम रहता तो वर्षों है लेकिन पनप नहीं पाता।
इसलिए हमारे समाज में युवक-युवतियों को अपना प्रेम त्याग कर समाज और माता पिता की पसंद से शादी करनी पड़ती है और प्रेम की बलिवेदी पर चढऩा पड़ता है उन प्रेमियों के निर्दोष जीवन साथियों को जो समाज के निर्देशानुसार इनसे विवाह के बंधन में बंधते हैं। व्यक्ति हर दुख:दर्द रहने की ताकत रखता है लेकिन विवाह बंधन में किसी तीसरे की आहट से ही वह बौखला उठता है चाहे वह अतीत ही क्यों न हो।
बड़े शहरों में ब्वायफ्रेंड और गर्लफ्रेंड का चलन काफी जोरों पर है लेकिन छोटे शहरों में यह उतनी ही बुरी प्रथा मानी जाती है। एक गृहस्थ जीवन को बर्बाद करने में किसी एक का भी प्रेम प्रसंग का जिक्र काफी है। अक्सर यह राज शादी के बाद ही सामने आते हैं जिससे शादी का बंधन टूटने की कगार तक पहुंच आता है इसलिए जरूरी हो जाता है कि विवाह के पश्चात भूल कर भी पूर्व प्रेमी प्रेमिका का जिक्र न करें।
इन बातों को बताना तो आसान है लेकिन इस पर आपके जीवनसाथी की जो प्रतिक्रिया होगी, उसका सामना करना बड़ा मुश्किल होता है। उसे विश्वास में लें और अपनी और उसकी शादी को कोई समझौता न कहकर अपनी पसंद की शादी ही कहें। यदि आप सच्चे हैं तो उसे आपके ऊपर विश्वास जरूर होगा बशर्ते कि ऐसे नाजुक हालात में उससे बेरूखी से पेश न आयें।
अपने बीच कोई दरार न उत्पन्न होने दें। अपने पूर्व प्रेमी या प्रेमिका की तारीफें उसके सामने न करें, न ही उससे उनकी तुलना करें। अपने जीवनसाथी में खामियां भी न निकालें बल्कि उसकी खूबियों को गिनवायें और बतायें कि वह भी बेहतर है। बात-बात में उसके सामने अपने पूर्व-प्रेम की बातें न करें। अपने जीवनसाथी के जज्बातों को महसूस करें। उसकी भावनाओं को दबायें नहीं। उसकी भी सुनें और उसे समझाने का प्रयास भी करें।
विवाह बिना प्रेम सफल नहीं हो सकता और प्रेम एकतरफा हो तो कामयाब भी नहीं हो सकता। वैवाहिक जीवन तभी सफल होता है जब एक दूसरे की भावनाओं की कद्र की जाये और एक-दूसरे पर विश्वास किया जाये।
विवाह तभी सफल हो सकता है जब अतीत का कोई प्रेम उसके आड़े न आये। एक-दूसरे से उच्च आकांक्षायें बांधने की बजाय जमीनी हकीकत का सामना करते हुए विवाह बंधन को निभायें। एक-दूसरे का ख्याल रखें और एक-दूसरे पर विश्वास रखें। इससे विवाह बंधन में प्रेम जन्मेगा और भावी जीवन की आधारशिला रखी जायेगी।
- शिखा चौधरी

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