फैशन और व्यक्तित्व की पहचान: सलवार-कमीज

फैशन और व्यक्तित्व की पहचान: सलवार-कमीज

जब कभी आधुनिकता और फैशन का जिक्र होता है तो इसके साथ सर्वप्रथम महिलाओं की छवि ही उभर कर आती है। वास्तव में हमारी जिज्ञासा यह जानने की होती है कि इनका महिलाओं पर क्या असर पड़ता है। ऐसा शायद इसलिए भी है कि फैशन का संबंध श्रृंगार से होता है और जब श्रृंगार की बात चली है तो महिलाएं भला कहां पीछे रह सकती हैं।
महिलाओं के इस श्रृंगार की चर्चा आज नहीं, पौराणिक काल से चली आ रही है, अत: उनके एक नहीं, सोलहों श्रृंगार में नख से शिख तक का वर्णन आवश्यक है लेकिन इन सब में परिधान का अपना अलग ही महत्त्व है। इस एक श्रृंगार सामग्री का चुनाव आपने यदि अपने व्यक्तित्व के अनुरूप नहीं किया तो बाकी सारा बनाव श्रृंगार बेतुका जान पड़ता है।
परिधान हमारे सुंदर और सजीले व्यक्तित्व को प्रभावी बनाने में कामयाब होते हैं, इसलिए फैशन की इस रंग-बिरंगी दुनियां में युवतियां अपने कपड़े या परिधानों में विशेषकर सलवार-कुरते के प्रति कुछ ज्यादा ही सजग होती हैं। आज हम विभिन्न तरह के परिधानों में से बहुचर्चित परिधान सलवार-कुर्ते के फैशन के दौर की चर्चा कर रहे हैं।
परिधानों का चुनाव अक्सर महिलाएं और लड़कियां मौसम के अनुसार ही करती हैं। आपने भी देखा होगा कि हरेक छह माह या साल बीतते-बीतते बाजार में नये डिजाइन के सलवार-सूट नजर आते हैं। फिर बदलते मौसम के अनुरूप सलवार-कुर्ते का चुनाव एक अलग परेशानी का कारण होता है। इन सबसे क्या हम सबके मन में यह प्रश्न नहीं उठ खड़ा होता कि वास्तव में इतनी जल्दी सलवार-कुर्ते के फैशन के बदलने का कारण क्या है? इसका एक बड़ा कारण समाज में डे्रस डिजाइनरों की बढ़ती तादाद है।
आज कोई एक भी व्यवसाय हो, बाजार में उसके आते ही एक नहीं, सौ व्यवसायियों की बाढ़ आ जाती है। परिणाम होता है कि हर डिजाइनर की सलवार-कमीज के डिजाइन में थोड़ा बहुत अंतर नजर आयेगा। कुल मिलाकर बाजार में सौ डिजाइनों के सलवार-कमीज आ जाते हैं लेकिन इनमें से कुछ ही उपभोक्ता वर्ग में लोकप्रिय हो पाते हैं।
पहले सलवार-कुर्ता ज्यादातर किशोरियों के उपयोग किये जाने वाले वस्त्र के रूप में ही प्रचलन में था लेकिन आज भाग-दौड़ के इस दौर में चाहे ऑफिस जाने वाली महिला हो या किसी पार्टी में जाना हो या फिर कहीं घूमने जाना हो, बाजार जाने के लिए सलवार-कुरते को ही उपयुक्त और पसंदीदा डे्रस माना जाने लगा है। क्योंकि हर उम्र में इसे कैरी करना आसान होता
है।
साथ ही फैशन के अनुरूप वस्त्रों की खरीदारी में महिलाओं ने तो विशेषकर कीमतों के समक्ष घुटने टेक दिये हैं। इनकी कीमतें व्यवसायी के मन और बाजार के अनुसार परिवर्तित होती रहती हैं। इसकी कोई निश्चित सीमा नहीं है। फिर भी नये नये फैशन के अनुरूप डिजाइन आते रहते हैं और महिलाओं को लुभाते रहते हैं।
-पूनम दिनकर

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