क्या है औरतों पर अत्याचार के पीछे

क्या है औरतों पर अत्याचार के पीछे

स्त्रियों पर अत्याचार कोई नई बात नहीं है। अत्याचार बहुत पहले से होते आ रहे हैं। स्त्री अबला है, इसलिए पुरूष उस पर अत्याचार करता है। स्त्रियों को पुरूषों के अत्याचार का प्रतिकार करना चाहिए।
महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचारों में बलात्कार सबसे घिनौना कृत्य है। अखबारों में बलात्कार संबंधी समाचार हर रोज आते हैं। खूब हाय तौबा मचाई जाती है और महिलाओं के प्रति पुरूष बर्बरता का राग अलापा जाता है पर एक सच यह भी है कि जिन्हें हम बलात्कार कहते हैं, वे सभी बलात्कार नहीं होते। कुछ तो राजी खुशी के सौदे होते हैं पर पकड़े जाने पर बलात्कार घोषित कर दिए जाते हैं।
वैसे स्त्री के प्रतिकार के सामने अकेला पुरूष उसे बाध्य नहीं कर सकता। चाकू छुरी दिखाकर अकेले किसी औरत के साथ बलात्कार जैसी मनमानी कर सके, यह भी संदिग्ध है क्योंकि यदि स्त्री को अपनी इज्जत प्यारी है तो वह मौत से डरने की बजाय अपनी हर संभव कोशिश करके पुरूष के इरादे ध्वस्त भी कर सकती है।
हकीकत में या तो ऐसे मामले बहुत कम आते हैं या तब आते हैं तब किसी अन्य के जान जाने की आशंका पैदा हो जाती हैं।
कारण: जो मूल हैं अनाचार का
घर में पति पत्नी के बीच या घर के अन्य सदस्यों के बीच होने वाले झगड़े तो घर घर की कहानी हैं। अब कौन किस पर अत्याचार करता है, यह समझना जरा मुश्किल है। फिर भी यदि इस प्रश्न का जवाब ढूंढने से पहले निम्न बातों पर ध्यान दिया जाए तो उचित और बेहतर होगा।
मां-बाप ने अगर किसी लड़की को कम दहेज दिया हो तो इसके खिलाफ एक स्त्री भले ही सास, ननद, जेठानी होती है। खुद पति कुछ नहीं कहता।
अक्सर देखा जाता है कि कारण छोटा हो या बड़ा, झगड़ा होते समय पुरूष की बजाय स्त्री की जुबान ज्यादा चलती है। वह आपे से बाहर हो जाती है। पुरूष भी स्त्री का पक्ष लेने लगते हैं जिससे स्त्रियों की मनमानी बढ़ती है। इसे पुरूष के महिला पर अत्याचार का नाम दे दिया जाता है।
बराबर का अधिकार पाने के लिए स्त्रियां अपने सास ससुर का कहना नहीं मानती। वे सभी शिष्टाचार भूल जाती हैं। जिस घर में वे रहती हैं उनको अनदेखा कर देती हैं। यदि स्त्री के इस व्यवहार से पति, ससुर व देवर क्षुब्ध हों तो जिम्मेदार कौन?
किसी-किसी घर में तो सामान इधर-उधर बिखरा पड़ा रहता है व बहुत सा कीमती सामान नष्ट हो जाता है या खो जाता है। ऐसे में पति, सास-ससुर चिढ़ कर खुद कार्य करने लगते हैं। पुरूषों को बड़बड़ाने की आदत पड़ जाती है। उन्हें गुस्सा आता है।
शादी से पहले लड़की वाले के लिए सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण ससुराल वाले होते हैं मगर फिर भी शादी के बाद स्त्री अपने मायके वालों को अधिक महत्त्व देती है। मायके वाले यदि घर आ जायें तो काफी आवभगत करती है। यदि ससुराल से कोई आ जाये तो खाना बनाने में सिरदर्द होता है इसलिए भी उस से ससुराल वाले जैसे पति, ससुर, देवर, जेठ, नाराज हो जाते हैं और यदि प्रतिक्रिया स्वरूप वे कुछ कहते है तो उसे भी अंतत: औरतों पर होने वाला अत्याचार कहा जाता है।
कुछ स्त्रियों को झगड़ा करना अच्छा लगता है। इसके बिना उन्हें चैन नहीं मिलता। किसी न किसी बात पर झगड़ा करना उनका काम हो जाता है।
ऐसे घर की लड़कियां बड़ी होकर झगड़ालू बन जाती हैं। कुछ औरतें इसी कारण अपने पति से पिटती रहती हैं? ऐसी स्त्रियां जहां भी जाती हैं, बड़बड़ाती रहती हैं। देखते देखते बात का बतंगड़ बन जाता है। उनकी यही स्थिति कभी-कभी तलाक का रूप धारण कर लेती है।
स्त्री पर होने वाले अत्याचारों में स्त्री की अनैतिकता सबसे ज्यादा जिम्मेदार है। पति अपने घर के लिए, पत्नी के लिए, बच्चे के लिए क्या-क्या नहीं करता। वह दिन रात जूझता रहता है। कभी-कभी तो वह झूठ बोलता है ताकि उसके बीबी बच्चे आराम से रहें। व्यापार में उसे घाटा भी मिलता है। यदि ऐसे समय में पत्नी अपने पति को धोखा दे दे या किसी अन्य के साथ शारीरिक संबंध बनाये तो वह कैसे चुप बैठ सकता है।
समाज में जिस प्रकार अनैतिकता पुरूष में होती है, वह स्त्री में भी होती है। अत्याचार की सबसे ज्यादा जिम्मेदार स्त्री ही होती है जिसे बाद में समाज द्वारा औरत पर अत्याचार का नाम दे दिया जाता है। ध्यान रहे जीवन में हर वक्त सावधानी की जरूरत होती है पर जब स्त्री ऐसा नहीं कर सकती तो उसे अत्याचारों का ही सामना करना पड़ता ह्रै।
- बीना राठौर

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