क्यों भूल जाते हैं आप

क्यों भूल जाते हैं आप

'भूलना' अपने आप में एक बीमारी होती है जिसे स्मरण न रहना भी कहा जाता है। कभी-कभी ऐसा देखा गया है कि घर में कुछ देर पहले ही जिस सामान को रख दिया गया था उसको आवश्यकता पडऩे पर ढूंढने में घंटों लग जाते हैं।
स्मरण शक्ति के क्षीण होने के कुछ विशेष कारण होते हैं। अगर यह एक बार जान लिया जाये कि स्मरण शक्ति क्षीण क्यों होती है तो निश्चित रूप से अपनी स्मरण शक्ति को बढ़ाने का उपाय किया जाएगा।
कुछ बातों को भूलने का अर्थ यह नहीं होता कि स्मरण शक्ति क्षीण होती जा रही है बल्कि इसलिए भूल जाते हैं कि हम एक बार में ही बहुत-सी बातों को याद करना चाहते हैं अथवा किसी दूसरी बात के विषय में सोचते समय कुछ विशेष बातों को याद भी रखना चाहते हैं।
एक व्यक्ति जो तनाव से घिरा रहता है, उसके मस्तिष्क में विभिन्न प्रकार के विचार चक्कर काटते रहते हैं और वह व्यक्ति बार-बार उन्हीं बातों के विषय में सोचता रहता है। ऐसी दिशा में उस व्यक्ति की स्मरण शक्ति क्षीण हो जाती है। तनाव से ग्रस्त महिला व पुरूष शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से सुस्त हो जाते हैं।
नशीले पदार्थों का सेवन करने से भी स्मरण शक्ति क्षीण हो जाती है। यदि नशीले पदार्थों का सेवन बहुत कम मात्रा में किया जाये तो स्मरण शक्ति प्रभावित नहीं होती परन्तु अधिक मात्रा में नशीले पदार्थों के सेवन करने से स्मरण शक्ति धीरे-धीरे क्षीण होने लगती है।
स्मरण शक्ति पर आयु का प्रभाव भी पड़ता है क्योंकि मस्तिष्क ही स्मरण-शक्ति को नियंत्रित करता है। उम्र बढऩे के साथ-साथ मस्तिष्क की कार्य क्षमता भी कम होने लगती है जिसका प्रभाव व्यक्ति की स्मरण शक्ति पर पड़ता है।
शारीरिक एवं मानसिक बीमारी का प्रभाव भी स्मरण शक्ति पर पड़ता है। प्राय: देखा गया है कि सिर में चोट लगने से अथवा मिरगी का दौरा पडऩे से भी स्मरण शक्ति प्रभावित हो जाती है।
अगर किसी को यह ज्ञात हो जाए कि उसकी स्मरण शक्ति क्षीण होने का कारण उसकी शारीरिक अथवा मानसिक बीमारी है तो उसके निदान के लिए अविलम्ब चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए। कुछ ऐसे भी व्यक्ति हैं जो न तो किसी प्रकार के तनाव के ही शिकार हैं और न ही किसी बीमारी से ही ग्रसित हैं, फिर भी उनकी स्मरण-शक्ति ठीक कार्य नहीं करती। इसका कारण लापरवाही होता है। ऐसे लोग चाहें तो प्रत्येक छोटी-छोटी बातों का भी विशेष ध्यान रखकर स्मरण-शक्ति को बढ़ा सकते हैं।
उदासीनता स्मरण-शक्ति के लिए अत्यन्त घातक होती है। प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक व दार्शनिक 'इमरसन' ने कहा है कि 'अपने मन के द्वार सदा उत्साह, उमंग और आनन्द के लिए खुले रखिये व उदासीनता को पास फटकने मत दीजिये। पूरे मनोयोग से काम करते हुए मन के तमाम विकारों पर नियंत्रण रखिए। ऐसा करते रहने से स्मरण-शक्ति सदैव बनी रहकर आपकी चाकरी करेगी।'
- पूनम दिनकर

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