कहीं आपकी बेटी भी तो नकचढ़ी नहीं है?

कहीं आपकी बेटी भी तो नकचढ़ी नहीं है?

कुछ दिनों पूर्व मैं एक परिचित मित्र के घर गया तो बातों ही बातों में यूं ही आजकल की फिल्मों व दूरदर्शन पर आने वाले प्रोग्रामों के बारे में बात चल पड़ी। तभी परिचित की युवा पुत्री शिवानी तपाक से हमारी बात को काटते हुए बोली-क्या अंकल, आप भी टीवी पर आने वाले सडिय़ल से कार्यक्रमों की बातें कर रहे हैं। कोई अच्छी फिल्म या ग्लैमर की बात करें। पापा तो बस! और मुंह बिचका कर दूसरे कमरे में चली गयी।
मैं कुछ कहता, इतने में परिचित की पत्नी बोली-बेटी को तो हल्के प्रोग्राम, घटिया पिक्चरें, खाना, मेल जोल वाले जरा भी पसंद नहीं है। उसके तो ऊंची सोसायटी वाले मित्र हैं। बड़ी बिंदास टाइप है। क्या करें, एक ही तो लड़की है। उधर परिचित भी मुस्कुरा कर अपनी बेटी का समर्थन ही कर रहे थे। मैं अवाक्-सा दोनों को देखकर मन ही मन सोचने लगा, यह भी भला कोई व्यवहार है?
यह व्यवहार न केवल शिवानी जैसी घमंडी लड़की का है अपितु कई परिवारों में लड़के व लड़कियों दोनों का ही आचरण ऐसे ही देखने को मिलता है। ऐसे व्यवहार निश्चय ही बेहूदे व आपत्तिजनक होते हैं। अपने आप को सुपर समझना, दूसरों को नीचा दिखाना, छोटों-बड़ों का लिहाज तक न रखना, व छोटी-छोटी बातों पर नाराज हो मुंह फुलाना, यह किसी शिष्ट परिवार के बड़े बच्चों को शोभा नहीं देता है और विशेषकर लड़कियों के बारे में तो कतई अच्छा नहीं लगता।
कई माता-पिता इस तरह के व्यवहार को बड़ी ही सहजता से लेते हैं, जो उनकी नासमझी का परिचायक होता है। वे सोचते हैं, बड़ी होने पर समझ आ जायेगी लेकिन बचपन में जो बच्चे इस तरह का व्यवहार करने लगते हैं, वे युवावस्था तक ऐसा ही करते हैं क्योंकि वे जल्दी-जल्दी अपने व्यवहार में सुधार नहीं ला पाते।
माता-पिता को लड़कियों के बारे में यह समझ होनी जरूरी है कि वे एक दिन ससुराल जायेंगी और यदि बेटी का यही आचरण शादी के पश्चात भी रहा तो पति तो क्या, ससुराल के किसी भी सदस्य से वह तालमेल नहीं बैठा पायेंगी। उनके व पति के बीच शीघ्र ही मनमुटाव तो पैदा होगा ही, हो सकता है आपकी नकचढ़ी बेटी को फिर से मां-बाप के घर बैठना पड़े। ऐसे अशिष्ट व गैर जिम्मेदाराना व्यवहार के लिए माता-पिता ही दोषी माने जाते हैं। तभी तो हरेक के मुंह से निकलता है-मां बाप ने अच्छे संस्कार दिये हों, तब न? इसलिए परिवार में मां की भूमिका सर्वाधिक अहमियत रखती है। सबसे ज्यादा जिम्मेदारी मां के कंधे पर है कि वह अपनी बेटी को उचित-मार्ग दर्शन देकर एक योग्य व सफल गृहिणी बनायें। उसे लाड़-प्यार अवश्य दें परन्तु एक सीमा में रहकर। उसकी हर मांग मौन-स्वीकृति से पूरी न करें। हर तरह के गलत आचरण के लिए उसे अवश्य टोकें व बाद में प्यार से भी समझाएं। प्राय:, परिवारों में बच्चों की अनुशासनहीनता देखने व सुनने को मिलती है लेकिन उनमें तुरन्त सुधार की आवश्यकता को मद्देनजऱ रख, यदि माता-पिता को कठोर कदम भी उठाना पड़े तो संकोच नहीं करना चाहिए चूंकि उनकी भी तो इज्जत है। बच्चों में अच्छी आदतों का समावेश यदि शुरू से ही कराएं तो कभी माता-पिता को नीचा नहीं देखना पड़ेगा। अच्छे व अनुशासित बच्चे सदैव आपकी ही प्रतिष्ठा बढ़ायेंगे व हर किसी की जुबां पर आपके परिवार का नाम होगा।
- चेतन चौहान

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