स्वस्थ रखे सही दिनचर्या

स्वस्थ रखे सही दिनचर्या

आजकल की व्यस्त जीवनशैली के कारण अनेक बीमारियों को जल्द उपजने एवं शरीर में घर बनाने का अवसर मिलता है। इनमें से अनेक बीमारियों को दिनचर्या सही रखकर कम या दूर कर स्वस्थ रहा जा सकता है।
चालीस की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते सभी आधी आयु जी लेते हैं और जीवनसंघर्ष की समाप्ति के साथ-साथ बीमारियों का सिलसिला या समय आ जाता है।
यह अवधि बीमारियों के होने या उससे बचने के लिए होता है। इस आयु में बीमारियों को सही दिनचर्या, नियमित व्यायाम, उचित पौष्टिक खानपान और सतत डॉक्टरी जांच से रोका व काबू में किया जा सकता है।
कारण और संभावित बीमारियां:- आधुनिक वातावरण, अव्यवस्थित जीवनशैली, असंतुलित खानपान, शारीरिक श्रम की कमी, भाग-दौड़ भरी जिंदगी, दोहरी जिम्मेदारी, मानसिक तनाव, अनिद्रा एवं बढ़ता प्रदूषण आदि के कारण रोगों को होने का अवसर मिलता है जिससे इस उम्र में तनाव, अवसाद, मधुमेह, अल्सर, बी.पी, हृदयरोग, अपच, कैंसर, खून की कमी, घुटने में दर्द, कमर में दर्द होने की संभावना बढ़ जाती है।
रोगों से बचाव के उपाय
उचित आहार:- बढ़ती उम्र के साथ खानपान का तालमेल बिठाना आवश्यक होता है। 40 वर्ष की उम्र तक शरीर अपनी बनावट पूर्ण कर उस मुकाम में पहुंच जाता है जब वह अधिक खानपान से व्यर्थ शारीरिक विस्तार पाता है और शरीर में चर्बी, मोटापा, वजन बढ़ता जाता है। अतएव इस आयु में पहुंच कर जंक फूड, फास्ट फूड, तेल, घी, नमक, शक्कर कम या बंद करना आरंभ कर देना चाहिए। भोजन की मात्र कम कर फल-फूल, सब्जी, सलाद, अंकुरित अनाज जैसी चीजों पर ध्यान देना चाहिए। बिना मलाई के दूध, दही व मटठे का उपयोग करना चाहिए जिससे मोटापा, वजन कोलेस्ट्राल आदि की वृद्धि से बचेंगे।
इनसे दूर रहें:- हर हाल में नशे से दूर रहें। मदिरा, धूम्रपान, तंबाकू, गुटखा, मांस, तली भुनी बाहरी चीजों का कदापि सेवन न करें। एक बारगी ज्यादा या आवश्यक न खाएं। इससे एसिडिटी, अल्सर, कैंसर, हृदय, लिवर व सांस रोग आदि से बच सकते हैं।
नियमित श्रम व्यायाम करें:- आजीविका व जीवन का आनंद उठाते श्रम व्यायाम को न त्यागें। व्यस्त जीवन में समय निकालकर श्रम व्यायाम को नियमित जारी रखें। इससे रक्त प्रवाह सही रहेगा। शुगर, बी. पी., हृदय रोग, कोलेस्ट्राल अपच नहीं होगा। हड्डियां मजबूत रहेंगी, जोड़ों में दर्द नहीं होगा। चेहरे व त्वचा में चमक रहेगी।
सफाई पर ध्यान दें:- शरीर की भीतरी व बाहरी सफाई पर जरूर ध्यान दें। कपड़े सदैव साफ सुथरे रखें किन्तु ज्यादा साबुन, तेज डिटरजेंट या तीव्र सुगंध का उपयोग न करें। दांतों की दो बार सफाई करें। हर हाल में गंदगी व संक्रमण से बचें।
भरपूर नींद लें:- आपाधापी, तनाव एवं व्यस्त जीवन के बीच गहरी व भरपूर नींद के लिए जगह जरूर रखें। नींद ही शारीरिक टूट-फूट व जरूरत की भरपाई करती है। सूर्य की घड़ी से अपनी जैविक घड़ी का तालमेल बनाएं रखें। यह तनाव, बी.पी. शुगर को कम करेगा।
छुट्टी का आनंद उठाएं:- छुट्टी का अवसर मिले तो उसका अपने परिवार या साथियों के बीच रहकर भरपूर आनंद उठाएं। तनावमुक्त व हंसमुख रहें।
मौसमी फल सब्जी जरूर लें:-
अपने मौसम में आने वाले फल सब्जी की अपनी विशेषता है। अतएव इनका उचित ढंग से सेवन जरूर करें। ये शरीर की आवश्यकता की पूर्ति कर रोगों एवं मौसम से बचाते हैं। सलाद जरूर खाएं।
पानी भरपूर पिएं:- पानी भरपूर पीना चाहिए। इससे शरीर की भीतरी संपूर्ण सफाई होती है। पानी वजन, मोटापे पर नियंत्रित रखता है और बी.पी. को कंट्रोल करता है। त्वचा में चमक बरकरार रखता है।
- सीतेश कुमार द्विवेदी

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