कई औषधीय गुण हैं मेंहदी में

कई औषधीय गुण हैं मेंहदी में

मेंहदी का नाम आते ही याद आती है शादी विवाह तथा त्योहारों की। मेंहदी का प्रयोग हमारे भारत वर्ष में मंगलकारी उत्सवों में किया जाता है। वैसे भी दुल्हन और मेंहदी का संबंध अटूट होता है। जहां मेंहदी का प्रयोग सौंदर्य निखारने तथा हाथ पैरों को रंगने के लिए किया जाता है वहीं मेंहदी चिकित्सा की दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण स्थान रखती है। मेंहदी को ठंडा माना जाता है और इसका प्रयोग आयुर्वेदिक दृष्टि से बहुतायत से किया जाता है। यह कई प्रकार के रोगों में भी औषधि का काम करती है जैसे:-
द्वगर्मी के दिनों में लोग गर्मी से बेहद परेशान रहते हैं। इस गर्मी को शांत करने के लिये मेंहदी को भिगो कर पैरों के तलवों पर लगाने से राहत मिलती है।
- यदि शरीर का कोई अंग जल जाए तो मेंहदी भिगोकर जले स्थान पर लगाने से जलन तुरंत शांत हो जाती है।
- यदि मुख में छाले हो जाएं तो मेंहदी के पत्तों को रात्रि में स्वच्छ जल में भिगो दें। सुबह पत्तों को पानी से निकालकर इस पानी से कुल्ले करें। छाले शीघ्रता से दूर हो जायेंगे।
- दाद हो जाने पर मेंहदी के पत्तों को पीसकर लगाने से दाद में फायदा होता है।
- पैर में यदि छाले हो जाए या चप्पल काट खाए तो नारियल के तेल में मेंहदी मिलाकर उक्त स्थान पर लगायें। छालों की जलन से रातों रात छुटकारा मिल जायेगा।
- यदि गुम चोट लग जाए और दर्द सहा न जाये तो मेंहदी के पत्तों को पीस कर उसमें थोड़ी सी हल्दी मिलाकर उक्त स्थान पर बांध्ंों। दर्द में राहत मिलेगी।
द्वलू लगने की स्थिति में मेंहदी में प्याज का रस मिला लें। पैरों के तलवे पर इस घोल को लगायें। लाभ होगा।
- ललिता रोहिला

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