अपने दांपत्य को सुखी बनाइए

अपने दांपत्य को सुखी बनाइए

विवाहोपरांत पति-पत्नी के रूप में मिलने वाले दो जिस्म रूहानी स्तर पर एक हो जाते हैं। उनका आपसी रिश्ता फूल व खुशबू की तरह का होता है किंतु वक्त की नासमझ आंधी कभी-कभी फूल और खुशबू के बीच के कांटों की चुभन पैदा कर देती है। दांपत्य का यह सुगंधित फूल आपसी मनमुटाव, घृणा व द्वेष के कांटों से बिंध जाता है।
पति-पत्नी जो कभी एक दूसरे पर प्राण न्यौछावर करते थे, आपस में एक-दूसरे को देखना तक पसंद नहीं करते हैं। उनका जीवन गर्हित व नारकीय बन जाता है। दांपत्य जीवन के इस मन-मोहक पुष्प की सुरभि गायब हो जाती है।
यही नहीं, आपसी मनमुटाव के कांटों से बिंधे इस खुशबूदार फूल का बड़ा ही हृदय-विदारक अंत होता है। दांपत्य जीवन में सदाबहार रहे, इसका प्रतिपल सुरक्षित सुरभित रहे और यह गुलशन कभी न मुरझाए, इसके लिए पति-पत्नी को कुछ बातों पर ध्यान देना चाहिए।
दांपत्य जीवन एक लंबी यात्र है, जिसमें पति-पत्नी के मन-मस्तिष्क में एक-दूसरे के प्रति कभी-कभार शंका का बीजारोपण कोई आश्चर्य की बात नहीं। अत: शंका के मूलांकुरित होते ही उसे उखाड़ कर नष्ट कर दीजिए। दोनों एक-दूसरे के सामने उसे प्रकट कर दीजिए। कभी भी मन में हरगिज मत रखिए।
स्वभाव की लाख समानताओं के बावजूद भी पति-पत्नी के बीच कुछ असमानताएं रहती हैं। कुछ बातों को पति पसंद करते हैं, पत्नी नहीं और जिसे पत्नी पसंद करती हैं, पति नहीं, अत: अक्सर ऐसे अवसरों पर पति-पत्नी आपस में तुनकते रहते हैं किंतु नहीं, स्पष्ट शब्दों में अपनी पसंदगी-नापसंदगी की बात एक-दूसरे को कहिए, तुनकिए मत।
यदि संयोगवश यह तुनकना आपसी झगड़े का रूप ले ले तो इसके बीच रिश्तेदारों और इष्ट-मित्रों को प्रवेश मत दीजिए। वे इसे सुलझाने की जगह उलझाएंगे। अत: प्रत्येक उन बातों का फैसला, जिनके कारण आपका मधुर संबंध तिक्त हुआ, मिल-बैठकर दोनों स्वयं सुलझा लीजिए।
समस्याएं सबके जीवन में आती हैं - कृपया इन्हें सार्वजनिक नहीं बनायें। आपकी सहायता करने वाला कोई भी नहीं आएगा। हां, आपकी हंसी अवश्य उड़ेगी।
मुद्दे की बातों पर टिके रहकर समस्या पर प्रहार कीजिए। अनावश्यक बातों को तूल देकर कभी अनावश्यक रूप से झगड़े मत बढ़ाइए।
क्रोध में रहने पर पति-पत्नी कोई बहस न करें। बहस से सुंदर रिश्ते में दरार आती है।
सिर्फ अपने अधिकारों पर ही बल मत दीजिए, कर्तव्य भी देखिए। याद रखिए अपने कर्तव्यों के निर्वाह किए बिना अधिकारों की सुरक्षा संभव नहीं।
प्रत्येक व्यक्ति की कुछ मौलिकताएं होती हैं जो उसका प्राण हैं, अत: कभी भी अपने जीवन साथी में आमूल परिवर्तन लाने की भूल मत करिए।
कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं है। सबमें कुछ न कुछ कमी रहती है। अत: अपने जीवन साथी की कमी को नजरअंदाज करते हुए उसके गुणों को याद कीजिए। यही आपसी प्रेम का सर्वश्रेष्ठ तरीका है।
वैवाहिक जीवन की लंबी यात्र में सामंजस्य एक पड़ाव की तरह है, जहां व्यक्ति अपनी थकान मिटाता है। विवाह के पूर्व दो भिन्न स्वभावी व्यक्ति विवाहोपरान्त एक दूसरे के निकट आते हैं। उनकी यह निकटता सामंजस्य से ही स्थाई रह सकती है।
आए दिन पति की छोटी आमदनी से उत्पन्न आर्थिक अभाव भी आपसी मनमुटाव को बढ़ाता है। पत्नी का कर्तव्य है कि इस परिस्थिति में वह कभी भी मन मलिन न करे। आपसी सहयोग व प्रेम इस संकट पर विजय प्राप्त कर लेगा।
पति पत्नी एक-दूसरे के गुणों की सबसे प्रशंसा करें। यह दांपत्य जीवन के सुख का मूलमंत्र है। सिर्फ इसे अपनाकर भी आप दांपत्य जीवन को खुशबुदार बना सकते हैं। आपका दांपत्य जीवन सुखी रह सकता है और दांपत्य के इस गुलशन की हरीतिमा बरकरार रह सकती है।
- विपिन कुमार

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