कैसे करें अपने परिधानों की हिफाज़त?

कैसे करें अपने परिधानों की हिफाज़त?

कुछ महिलाओं की आदत होती है कि कहीं बाहर से आने पर वे अपने अच्छे कपड़ों को उतार कर अलमारी में यूं ही ठूंस देती हैं। उन्हें तह कर रखने या टांगने की तकलीफ गंवारा नहीं करती। इसी कारण कभी दुबारा उसी साड़ी या सलवार कुर्ते या अन्य किसी परिधान को पहनने के अवसर पर उसे मुड़ा हुआ या सिलवटें पड़ा देखकर खीझती हैं या अन्त में निराश होकर कोई और लिबास पहनने को मजबूर हो जाती हैं।
आइये परिधानों के रख-रखाव से जुड़े कुछ ऐसे सुझावों की चर्चा करें जिन्हें अमल में लाकर आप लाभ उठा सकती हैं-
- एक जैसे परिधानों को हैंगर पर टांगिये व एक ही जगह पर रखिये। यदि तह भी बनानी हो तो एक जैसी साडिय़ों, जैसे सिल्क, शिफॉन, पॉलिएस्टर आदि को अलग-अलग तह में एक ही जगह पर रखिये ताकि पहनते समय कपड़ों के चुनाव में असुविधा न हो।
- कोट, जैकेट आदि को हैंगर पर टांगते समय देख लीजिए कि उसके कंधों आदि को हैंगर पर ठीक से लटकाया है या नहीं व साथ ही आगे के बटन बंद कर दीजिये ताकि दुबारा निकाल कर पहनते समय उनकी शेप खराब न हो व बिना प्रेस किये भी आप उसे दो-तीन बार पहन सकें।
- जहां तक हो सके, लोहे के नंगे तार वाले हैंगर का प्रयोग न करें। इनके स्थान पर चौड़े किनारे वाले व प्लास्टिक के कवर युक्त हैंगर का प्रयोग करें जिनसे कपड़ों पर टंगे रहने पर किनारों पर सिलवट न पड़ें और हैंगर के तार पर नमी से जंग लगने पर कपड़ों पर दाग लगने का डर भी न हो।
- अपनी कीमती साडिय़ों, खासतौर पर जऱी आदि के काम वाले कपड़ों को सफेद मलमल या किसी सूती कपड़े मेें लपेट कर ही रखें ताकि जरी काली न पड़े।
- ऑरगेंजा, टिश्यू आदि से बने परिधानों को बहुत से कपड़ों की तह से दबा कर न रखें। इससे तह के किनारों पर से कट जाने की आशंका रहती है।
- शिफॉन जैसे नाजुक कपड़े की साडिय़ों व अन्य परिधानों को जहां तक हो सके, हैंगर पर ही टांगें। बार-बार बहुत दबाकर इस्त्री न करवायें। इससे इस कपड़े की प्राकृतिक सिलवटें (टिकल्स) खत्म हो जाती है और परिधान की शोभा नहीं रह जाती। उन्हें कई बार पहन लेने पर हल्के हाथों से ही प्रेस करवायें। खास तौर से शिफॉन की साडिय़ों को बार-बार ड्राईक्लीनिंग व रोलिंग के लिए न दें। इससे भी इनकी नज़ाकत व प्राकृतिक कोमलता पर कुप्रभाव पड़ता है।
- सभी परिधानों को जहां तक हो सके, प्रयोग में लायें। परिधान गिनती में भले ही कम हों परन्तु उत्कृष्ट व उत्तम क्वालिटी व मनपसंद डिजाइन के हों, ताकि कई बार पहनने के बाद भी आपका मन ऊबे नहीं। लम्बे अरसे तक किसी एक कपड़े को न पहनें। यूं ही टंगे रहने देने या अलमारी की तह में रखे रहने से भी वह आउट ऑफ फैशन हो सकता है। अत: उतने ही कपड़े सिलवायें या खरीदें जो बार-बार इस्तेमाल किये जा सकें।
- ऊनी कपड़ों का इस्तेमाल न करने पर नेप्थलीन की गोलियों या नीम की पत्ती अथवा ओडोनिल डालकर ही बक्सों में रखें। याद रखें, ऊनी कपड़े, सदैव साफ करके ही संदूकों में बंद करें, नहीं तो उस मैले स्थान पर उनके कट जाने का अंदेशा रहता है।
- कपड़ों को उनकी क्वालिटी के अनुरूप तापमान पर ही प्रेस करें। बहुुत अधिक गर्म इस्त्री के प्रयोग से कपड़ों के रोयें आदि का नष्ट होने का डर रहता है। जऱी का साडिय़ों को हमेशा उल्टी तरफ से ही प्रेस करें।
- कपड़ों को मौसम के अनुसार समय-समय पर धूप में रखते रहना आवश्यक होता है। कपड़ों को धूप में रखते समय आपको यह भी ध्यान रखना होगा कि अधिक कीमती परिधानों पर सूर्य का सीधा प्रकाश न पडऩे पाये, क्योंकि सूर्य की सीधी रोशनी आपके कीमती कपड़ों के रंग व उसके सूत को बिगाड़ भी सकते हैं।
- बरसात के मौसम में जब तक कपड़े अच्छी तरह सूख न जायें, तब तक उन्हें तह करके नहीं रखना चाहिए। ऐसे कपड़ों को पूरे सूख जाने के बाद व आयरन करके ही रखना चाहिए।
- कुछ महिलाएं कपड़ों की अलमारी में ही बच्चों की मिठाई व टॉफियां भी रख देती हैं, ऐसा नहीं करना चाहिए। इन वस्तुओं की मिठास से कीमती परिधानों में चीटियां भी लग सकती हैं और उन परिधानों को नष्ट कर सकती हैं।
- आरती रानी

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