दहेज में दीजिये सुसंस्कारों की सौगात

दहेज में दीजिये सुसंस्कारों की सौगात

हमारे प्राचीन भारतीय समाज में बेटी को पराया धन माना जाता है। भारतीय संस्कृति एवं परम्पराओं के अनुसार बेटी का विवाह कर अप्रत्यक्ष रूप से दान कर दिया जाता है। युवा होते ही बेटी मां के साथ गृह कार्यों में हाथ बंटाती है, भाई-पिता का ख्याल रखती है। जब योग्य वर मिल जाता है तो घर की इस रौनक को अश्रुपूरित नेत्रों और आल्हादित हृदय से ढेरों आशीर्वाद दुआएं देते हुए परिवार वाले उसके सुखी जीवन की कामना करते हैं। 'विवाह' जैसे पावन अवसर पर बाबुल के आंगन छोड़ पराये घर जाती अपनी लाडो को ढेरों मूल्यवान उपहार देने के साथ अमूल्य सुझाव देना भी नितांत आवश्यक है ताकि नाजों पली पलकों के साये में रही आपकी बेटी ससुराल में शांतिमय और सुखपूर्वक जीवन व्यतीत कर सके।
- अपनी बेटी को घरेलू कार्यों में निपुण अवश्य करायें ताकि ससुराल में कोई भी काम करने से हिचके नहीं। इससे वह परिवार के सदस्यों का मन जीत लेगी।
- बेटी को यह सीख जरूर दें कि जिस प्रकार मायके में मां बाप की आज्ञा का पालन प्रेमपूर्वक करती थी, उसी प्रकार ससुराल में भी सभी की आज्ञा का पालन प्रेमप्रर्वक करे।
- बेटी ससुराल में अपने पीहर का गुणगान न करें क्योंकि बेटी बहू बनकर दो परिवारों, दो संस्कारों को जोड़ती है। दोनों परिवारों की मान-मर्यादा, प्रतिष्ठा की रक्षा करती है, परम्पराओं का निर्वाह करती है।
- अपने रूप, सौन्दर्य, कला, प्रतिभा, योग्यता पर स्वाभिमान करें अभिमान कदापि न करे।
- पति के दिल में जगह बनाने के लिए बेटी पति की अच्छाई को अपनाए, साथ ही बुराई को खत्म करने की कोशिश करें। बेटी को यह सीख जरूर दें कि पति के दिल को जीत कर ही वह अन्य पारिवारिक सदस्यों से अपनत्व और स्नेह पा सकेगी। पति की सच्ची प्रियतमा और ईमानदार जीवनसाथी बने।
- दहेज के सामान पर अपना एकाधिकार न जमायें।
- असत्य न बोले, न ही किसी की निंदा करे वरन् धैर्य रख, विनम्रतापूर्वक व्यवहार कर सहनशीलता रखे।
- ससुराल में अपनी व्यवहार कुशलता यथासंभव बनायें ताकि उसकी किसी भी अनुचित व्यवहार या बात से ससुराल वालों को दुख न हो।
- अपनी बेटी को यह सीख जरूर दें कि शिष्टाचार को जीवन की शैली अवश्य बनाये पर दब्बू न बने। दूसरों को इज्जत, सम्मान देकर स्वयं भी उसका प्रतिफल अवश्य प्राप्त करेगी।
- बेटी के आंचल में यह बात जरूर पिरो दें कि ससुराल में ऐसी मधुर वाणी बोले जो सबको भाये। इस प्रकार आपकी थोड़ी सी सूझ-बूझ से बेटी को दहेज में सुसंस्कारों की सौगात मिल जायेगी जिसे निभाकर वह ताउम्र बेटी खुशियों को अपने आंचल में समेटती रहेगी।
- सुमित्र यादव

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