कैसे बचें छेड़छाड़ से

कैसे बचें छेड़छाड़ से

आज नारी घर की चारदीवारी में कैद नहीं है। वह शिक्षित होकर पुरूष की बराबरी हर क्षेत्र में करने लगी है। आज कोई ऐसा क्षेत्र नहीं रहा जिसमें महिलाओं की पहुंच नहीं हो।
शिक्षित होकर सिर्फ नौकरी के लिये ही नहीं, वैसे भी औरत के घर से बाहर निकलने पर हजारों जोड़ी आंखों द्वारा घूरा जाता है। इसके लिये औरत का खूबसूरत होना जरूरी नहीं है न ही यह जरूरी कि औरत अश्लील और उत्तेजक कपड़े पहने या सौंदर्य प्रसाधनों का प्रयोग करके हीरोइन की तरह सजे संवरे।
औरत को घूरने के लिये उसका स्त्री होना ही काफी है। मतलब एक मजदूर औरत से लेकर उच्चतम पद पर बैठी औरत तक को घूरा जाता है। पुरूषों की भूखी निगाहें औरत को घूरने के लिये उसकी हैसियत नहीं देखती बल्कि उसका औरत होना देखती है।
अब सवाल उठता है, छेड़छाड़ किसे कहते हैं। आदमी की ऐसी कोई भी हरकत या क्रियाकलाप जो औरत को शारीरिक मानसिक रूप से नुकसान पहुंचाये या सार्वजनिक और सामाजिक रूप से प्रताडि़त करे, छेड़छाड़ कहलाती है।
एक औरत को छेडऩे का अधिकार आज मजदूरी करने वाले से लेकर उच्च पद पर बैठा तक रखता है। ये लोग औरत को देखकर अश्लील हरकतें कर सकते हैं, गंदे इशारे कर सकते हैं, गाली गलौज कर सकते हैं। छींटाकशी या छीना झपटी कर सकते हैं, औरत को छू सकते हैं, द्विअर्थी संवाद बोल सकते हैं। भद्दे और अश्लील फिल्मों गाने गा सकते हैं। भरी बस या भीड़भाड़ वाली टे्रन में औरत के जिस्म को रगड़ सकते हैं। औरत के मुंह पर सिगरेट या बीड़ी का धुआं छोड़ सकते हैं। मतलब आदमी घर से बाहर निकलने वाली औरत के साथ कुछ भी कर सकता है।
छेडऩे वाला पुरूष किसी भी उम्र और वर्ग का हो सकता है। शिक्षित और अशिक्षित भी हो सकता है।
छेड़छाड़ की घटनायें पहले इक्का दुक्का होती थी परन्तु अब इनमें बेतहाशा वृद्धि हो चुकी है। शहरों और महानगरों में तो हर साल इनका प्रतिशत बढ़ता जा रहा है।
छेड़छाड़ की घटनाओं में वृद्धि के पीछे अनेक कारण हैं। आज युवक-युवती के मिलने के अवसर बढ़े हैं। कोएज्यूकेशन और स्त्री-पुरूष के साथ काम करने की वजह से भी इनमें बढ़ोत्तरी हुई है। फिल्में छेड़छाड़ की घटनाओं में वृद्धि करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। फिल्मों में नये-नये तरीके छेड़छाड़ के दिखाये जाते हैं।
छेड़छाड़ के जितने भी मामले होते हैं उनमें से ज्यादातर पुलिस के पास नहीं पहुंचते। ज्यादातर औरतें शर्म, झिझक और सार्वजनिक बदनामी के डर से छेड़छाड़ की शिकायत पुलिस से करने की जगह उस घटना को नजर अंदाज कर देना या भूल जाना बेहतर समझती हैं।
सवाल उठता है कि इसे रोका कैसे जाये? छेड़छाड़ रोकने की पहल औरत को ही करनी होगी। शरम झिझक की वजह से औरत को छेड़छाड़ होने पर उस घटना को दबाने के बजाए उसका विरोध करना चाहिये। इसके लिये औरतों को आगे आना होगा। अगर किसी औरत के साथ कोई पुरूष छेड़छाड़ करता है तो दूसरी औरतों का विरोध करना चाहिये, तभी इसे रोका जा सकता है या ऐसी घटनाओं में कमी लाई जा सकती हैं
इसके अलावा सरकार को भी चाहिये कि ऐसे कानून बनाये कि छेड़छाड़ की घटनाओं पर तुरन्त कारवाई हो। छेड़छाड़ करने वाले को सजा अवश्य मिलनी चाहिये।
- किशन लाल शर्मा

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