बहुएं चाहती हैं आजाद जि़ंदगी

बहुएं चाहती हैं आजाद जि़ंदगी

अक्सर देखा जाता है कि बेटे की शादी होने की देर होती है कि बेटे-बहू अपने परिवार से अलग हो जाते हैं। बहू क्योंकि अपने मां-बाप का घर छोड़कर ससुराल आती है इसलिए वह ससुराल में सास-ससुर के साथ नहीं रहना चाहती। वह अपने पति के साथ अलग रहना चाहती है। मां और बीवी के बीच पिसने से बेहतर लड़का भी अलग रहने के लिए तैयार हो जाता है। संयुक्त परिवार आज की युवा पीढ़ी को पसंद नहीं हैं। अपनी आजादी पर यह पीढ़ी जरा भी प्रतिबंध बर्दाश्त नहीं कर सकती।
जहां तक नौकरी का सवाल है, लड़कियां शादी के बाद भी नौकरी करना चाहती हैं। ससुराल में उनकी नौकरी पर प्रतिबंध वे बर्दाश्त नहीं कर सकतीं। कैरियर आज के युवाओं के लिए इतना महत्त्वपूर्ण हो गया है कि वे अपने बुजुर्गों से न चाहते हुए भी अलग हो जाते हैं।
सभी के साथ ऐसा ही हो, यह जरूरी नहीं। अगर परिवार में बहू ऐसी आ जाती है जो अपने दायित्व को सास-ससुर के प्रति निष्ठा से निभाती भी है और अपने कैरियर पर भी ध्यान देती है, वह उस परिवार से अलग नहीं होना चाहती। घर और बाहर दोनों की जिम्मेदारियां निभाकर उसे पूर्णता का एहसास होता है। यदि सास और ससुर अपने बहू-बेटे के साथ सहयोग कर सकते हैं तो उन्हें अलग होने की जरूरत ही नहीं रहती।
सच बात तो यह है कि मां-बाप अपने बेटे को तो समझ लेते हैं मगर बहू को नहीं। ऐसा ही बहू के साथ होता है। वह सास-ससुर को गलत समझ लेती है। कोई भी बात उसे अलग घर बसाने के लिए मजबूर कर देती है। जब बच्चे पढऩे-लिखने की उम्र में होते हैं, अपने मां-बाप की बातें तो वे तभी टालना शुरू कर देते हैं। बड़े होकर वे पूरी आजादी चाहते हैं इसलिए वे अलग हो जाते हैं।
माता-पिता को भी यह समझना चाहिये कि जब तक वे अपने बच्चों की उंगली पकड़ कर चलें, तब तक वे उन पर कोई भी प्रतिबंध लगा सकते थे लेकिन जब वे ही बच्चे इस समाज के जिम्मेदार नागरिक हो जाते हैं तो उन पर प्रतिबंध नहीं लगाये जा सकते। अब वे अपनी मर्जी के मालिक हैं। जब आप यह मानने लगेंगे तो वे आपसे अलग होने की बात सोचेंगे भी नहीं। यह भी देखा गया है कि मां-बाप द्वारा पूरी आजादी दिये जाने के बावजूद बहू-बेटे घर छोड़कर अलग बस जाते हैं। यह उनकी सोच पर निर्भर करता है। अब गलती बहू-बेटे करते हैं। जब उन्हें जीने की पूरी आजादी मिल जाती है तब वे बुढ़ापे में अपने परिवार वालों को क्यों ठुकराते हैं। यदि वे समझदार हैं तो घर छोड़कर नहीं जायेंगे।
अपनी-अपनी जगह कभी-कभी दोनों पक्ष जिम्मेदार होते हैं अत: आधुनिकीकरण को इसका पूरा जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। कई बार परिस्थितियां भी परिवार को अलग होने को मजबूर कर देती हैं।
-शिखा चौधरी

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