सास बहू में समझौता हो

सास बहू में समझौता हो

सास-बहू का संबंध इस लिए बार बार चर्चा का विषय बन जाता है क्योंकि यह संबंध प्राय: सुधरने के बदले बिगड़ता जाता है। अनेकों परिवार ऐसे हैं जहां सास-बहू परस्पर रूठी रहती हैं। कुछ परिवार ऐसे भी हैं जहां सास-बहू का कलह पड़ोसियों की भी शांति को भंग कर डालता है। कहीं कहीं हाथापाई की नौबत तक आ जाती है।
यह बात तो तय है कि प्राय: हर बहू को थोड़े बहुत दिनों के लिए सास के साथ रहना पड़ता है। किसी किसी परिवार में जहां पति विदेश में काम कर रहा है और उसका वेतन इतना ज्यादा नहीं कि वह अपना परिवार भी साथ रख सके।
बहू और सास को परिवार में साथ-साथ रहना पड़ता है। वहाँ यदि सास बहू मन-मुटाव या असहयोग आंदोलन की मानसिकता लिए रहें तो क्या स्थिति होगी ? चौबीसों घंटे दोनों को घुटन का कड़वा घूंट पीते रहना होगा। 'जीवन भी है भार बना' वाली स्थिति।
ऐसी स्थिति को बदलने के उपाय क्यों न सोच लिए जाएं ? क्यों न कुछ मुद्दों पर ही सही, सास बहू में समझौता किया जाए? इस समझौते का लक्ष्य बस यही होना चाहिए कि जब तक बहू और सास को साथ साथ जीना होगा, तब तक आपसी सद्भाव के साथ जिएं ताकि दोनों एक दूसरे के लिए हाई ब्लड प्रेशर का कारण न बनें और परिवार में इतनी शांति बनाएं रख सकें कि दोनों के कलह के कारण परिवार के दूसरे सदस्यों या पड़ोसियों की शांति भंग न होने पाए।
अब सोचिये कौन कौन से ऐसे मुद्दे हैं जिन पर समझौता किया जा सकता है?
मेरे ख्याल में घर के जो काम अब तक सास को अकेले करने पड़ते थे उनका ऐसा बंटवारा किया जाना चाहिए जिससे सास को लगे कि बहू के आने पर मेरा बोझ जरा हल्का हो गया है। घरेलू काम काज की मात्र और प्रकार हर परिवार के लिए भिन्न हो सकती है। हम तो सामान्य मध्यवर्गीय परिवार की बात सोचें जहां नौकरानी रखने का पैसा नहीं है।
कमरों में झाड़ू देना, बर्तन मांजना, भोजन पकाना, बजार से तरकारी, तेल, आटा आदि खरीद लाना, बच्चों को समय पर स्कूल भेजना उन के होम वर्क में सहायता करना, बिजली, पानी फोन, मोबाइल इत्यादि के बिल का भुगतान करना, घरेलू खर्च का लेखा जोखा रखना इत्यादि अनेकों काम हैं जिन का बंटवारा न किया जाए तो सारे काम का बोझ अकेले सास को बहन करते जाना होगा। ऐसी स्थिति में वह बहू को मन ही मन कोसती जाए तो उसे कैसे दोष दे सकते हैं ?
यदि काम का बंटवारा करने की उदारता बहू में आ गई है तो सोचें, बंटवारे का आधार क्या हो। यह बात तो स्वीकार करनी होगी कि जिससे जितना हो सके, उतना ही बोझ एक एक को लेना है। घरेलू काम करने के लिए भी ऊर्जा चाहिए, मांसपेशियों में शक्ति चाहिए जो बहुत कुछ आयु पर भी निर्भर करता है।
चूंकि सास ढलती आयु की है और बहू चढ़ती जवानी में है, इसलिए निश्चित रूप से बहू ज्यादा कठोर काम करने की स्थिति में है और सास हल्के हल्के काम ही आराम से कर पाती है। इसलिए अच्छा यही है कि जो जो कठिन काम हैं।
उसे बहू स्वेच्छा से अपने हिस्से में ले ले और जो हल्के फुल्के काम हैं वे सास के लिए छोड़े। हां, यदि सास की शारीरिक क्षमता इतनी अच्छी है कि वह कठिन शारीरिक परिश्रम करना पसंद करती है तो यह उचित ही है कि कुछ कठिन काम भी वह अपने हिस्से में ले ले।
यदि एक बार समझौता हो गया तो फिर दोनों सह-अस्तित्व की स्थिति में परस्पर आनंद बांटते हुए शांतिपूर्ण जीवन बिता पाएँगी।
-के.जी. बालकृष्ण पिल्लै

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