लड़की का रिश्ता पक्का करने से पहले जरा सोचिए

लड़की का रिश्ता पक्का करने से पहले जरा सोचिए

लड़की का रिश्ता तय करते वक्त अक्सर लोग जल्दबाजी कर देते हैं जिसका उन्हें बाद में काफी पछतावा होता है। मां-बाप को चाहिए कि वे अपनी लड़की के लिए ऐसा वर देखें जो आत्मनिर्भर हो। आपकी कन्या का भरण-पोषण करने में समर्थ हो। केवल पिता की संपत्ति या पद देखकर किया गया रिश्ता बाद में हमेशा दुख का कारण बनता है।
लड़के-लड़की की योग्यता ही वास्तविक संपदा है। पिता अथवा पूर्वजों की अर्जित संपत्ति के जाते देर नहीं लगती। धन-संपत्ति की अपेक्षा लड़के के गुण, शील व परिवार की संस्कृति को विेशष महत्त्व दें। जहां तक संभव हो लड़के के विषय में पूर्ण जानकारी प्राप्त करके उसकी इच्छा से ही रिश्ते की बात आगे बढ़ाएं।
यदि लड़की का रिश्ता तय कर रहे हो तो सबसे पहले यह पता लगाएं कि लड़की की होने वाली सास कहीं कलह प्रिय, झगड़ालू, लोभ प्रवृत्ति की तो नहीं है अन्यथा आपकी लड़की का जीवन खतरे में पड़ सकता है।
रिश्ता करने में जल्दबाजी बिलकुल न करें। कोई संबंध चाहे कितना ही उत्तम दिखाई देता हो, आपके निकटतम रिश्तेदार भी चाहे कितनी प्रशंसा क्यों न कर रहे हो आप सिर्फ उनकी बातों पर ही विश्वास कर अपनी लड़की या लड़के के जीवन को अंधकार के गर्त में न धकेलें।
स्वयं और व्यक्तिगत रूप से गहरी जानकारी के बाद ही रिश्ता स्थापित करें और लड़के तथा लड़की की इच्छा को भी जान लें। उन्हें नितांत अंधेरे में न रखें। कई बार निकट के रिश्तेदार भी स्वार्थ या दबाव के वशीभूत हो कन्या के जीवन को नरक में धकेल देते हैं।
कितना भी बड़ा, धनी परिवार क्यों न हो, यदि लड़का शराबी, जुआरी, नपुंसक तथा अन्य लड़कियों से संबंध बनाए रखने वाला हो तो वह त्याज्य है। लड़के और लड़की की आयु, रूप-रंग, शिक्षा एवं शरीर के ढांचे की बनावट में बहुत अधिक अंतर न हो। अवस्था में भी 4-5 वर्ष से अधिक का अंतर न हो, अन्यथा हीनता की भावना संबंधों में दरार पैदा कर सकती है।
अपने से ऊंचा संबंध देखने वाले दुखी और अपने समान अथवा अपने आर्थिक स्तर से न्यून परिवार में संबंध स्थापित करने वाले प्राय: सुखी रहते हैं। रिश्ता समान शील, गुण, स्तर वालों के साथ ही अच्छा रहता है।
जिस लड़के के माता-पिता अधिक लालची हों, उनसे अपनी कन्या के विवाह की बात तुरंत समाप्त कर दें। उनको सुधारने का यही इलाज है।
दूसरों की देखा-देखी अथवा झूठी-शान और दिखावे के लिए विवाह में इतना खर्च न करें कि वह आपके या आपके परिवार की बर्बादी का कारण बन जाए। वैवाहिक संबंधों में सरलता और सादगी बरतें।
- उमेश कुमार गिरधर

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