औरत पति चाहती है नौकर नहीं

औरत पति चाहती है नौकर नहीं

औरत क्या चाहती है? कोई भी पुरूष लाख इस बात का दम भरे कि मुझसे ज्यादा कोई औरत को नहीं समझ सकता, बहुत जल्दी उसकी गलतफहमी दूर हो जाएगी। कई बार तो औरत स्वयं ही नहीं समझ पाती है कि वह पुरूष से आखिर चाहती क्या है। यह न समझ पाना ही उसमें कुंठा जगाता है, उसे परेशान कर के रख देता है।
जब पति पत्नी दोनों ही कामकाजी हों तो स्वाभाविक है कि औरत चाहेगी पति उसके काम में हाथ बंटाये लेकिन किस सीमा तक और कैसे, यह इसके लिये जान लेना जरूरी है। होता यह है कि चूंकि पुरूष का स्वभाव अक्सर उथला ही देखने में आता है, उसमें ठहराव व गंभीरता की कमी पाई जाती हैं। वह जीवन भर कई बातों को लेकर बच्चा ही बना रहता है। पत्नी का मां का रूप उसे आजीवन शिक्षित व दंडित करता रहता है।
अगर उसमें अपनी गलतियां रियलाइज करने की समझ है तो उनका दांपत्य कड़वाहट से नहीं भरता। दंभी प्रवृत्ति दांपत्य को चट्टान के मुहाने तक पहुंचा देती है। पति में अहम् और अहंकार दोनों अक्सर प्रचुर मात्रा में होते हैं। यह पत्नी पर निर्भर रहता है कि वह इसे कैसे कम करती है या उल्टा अपनी नादानी से और बढ़ा देती है।
एक दूसरे किस्म के पति भी हैं जिन्हें वैसे देखा जाए तो पत्नियां आइडियिल हसबैंड मानती हैं। उनमें अहम् का स्तर बिलकुल नहीं होता और अहंकार उनसे कोसों दूर रहता है। वह अपने से ज्यादा हमेशा दूसरों के लिए सोचते हैं, फिर पत्नी की बात क्या, वे उसे बिलकुल रानी महारानी की तरह रखना चाहते हैं। ऊर्जा का स्तर इनमें ज्यादा होता है। एक सेवक की भांति वे सदा पत्नी सेवा को तत्पर रहते हैं।
पत्नी को गृहकार्यों में मदद करना और बात है और हर समय उसकी नौकरी बजाना और। नौकरी बजाते रहने से अक्सर औरतों में कामचोरी और मक्कारी आने लगती है।
रेशम को ही लें। उसके पति का मानो जिंदगी में एक ही मकसद था पत्नी सेवा। लोग रेशम का इस बात को लेकर हमेशा मजाक बनाते। रेशम कामचोरी के कारण चाहती तो थी कि पति ही सब काम करें और वह मेकअप करके घूमे फिरे, ऐश करे लेकिन साथ ही पति के रूप में उसे डेशिंग पर्सनेलिटी वाला मर्द चाहिए था जो गृहकार्यों में उलझा पति कभी नहीं दिख सकता था।
यह केवल एक उदाहरण है लेकिन आज की ज्यादा से ज्यादा स्त्रियों की यही मानसिकता बन गई है। चूंकि वे स्वयं नौकरीपेशा बन गई हैं तो गृहकार्यों के लिये उनके पास स्टेमिना नहीं रह जाता।
पतियों को यह बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि गृहकार्यों का भार वहन करने की उनकी हद कहां तक है। कहीं वे पत्नी की आदतें तो नहीं बिगाड़ रहे हैं। उसके मन में अपनी इज्जत तो नहीं खो रहे हैं। कहीं वह उसे 'टेकन फार ग्रंटेड मान कर तो नहीं चलने लगी हैं।
- उषा जैन शीरीं

Share it
Top