पत्नी के अंतरंग साथी बनिये

आधुनिक युग की दौड़ भाग में एकल परिवारों के होते हुए गृहस्थी की गाड़ी जल्दी चरमराने लगती है क्योंकि जो जिम्मेदारियां पहले पूरे परिवार में मिलजुल कर निभाई जाती थीं, वही जिम्मेदारियां अब पति पत्नी को मिलकर निभानी होती हैं। पति-पत्नी में समझदारी और सहयोग की भावना हो तो गृहस्थी रूपी गाड़ी के पहिये ठीक पटरी पर चलते हैं।
पहले तो पुरूषों की जिम्मेदारी केवल धनोपार्जन होती थी और महिलाएं घर-गृहस्थी की जिम्मेदारी, घर के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर निभा लेती थीं परन्तु समय बदलने से महिलाएं भी पुरूषों के साथ मिलकर धनोपार्जन के लिए घर से बाहर निकलना शुरू हो गई हैं। तब से कई समस्याएं भी बढ़ गई हैं। यदि पति, पत्नी को पूरा सहयोग दे तो समस्याओं का समाधान घर पर ही मौजूद है।
चाहे पत्नी घरेलू महिला भी क्यों न हो, किसी न किसी समय उसे भी सहयोग की जरूरत पड़ती है। लड़कों को भी शादी करने से पूर्व अपना मन बना लेना चाहिए कि सारे सहयोग की आशा केवल लड़की से न रखकर अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने से मुंह न मोड़ें। हमेशा यह न सोचें कि पत्नी को सहयोग तब देना है, जब वह उसकी मांग करे। कुछ बातों में अपनी जिम्मेदारियों को नजर में रखते हुए स्वयं उसे सहयोग दें।
बच्चे
बच्चों की जिम्मेदारी पति-पत्नी दोनों का समान कर्तव्य है। बच्चे छोटे हैं तो उनकी परवरिश, समय-समय पर चिकित्सक के पास ले जाना, पत्नी रसोई के कामों में व्यस्त है तो बच्चों को उस समय में देखना, बच्चे स्कूल जाने वाले हैं तो उन्हें स्टाप तक छोडऩा, पढ़ाने में मदद करना, अवकाश के दिन बच्चों के साथ पूरा समय व्यतीत करना, बच्चों की बीमारी में मिल बांटकर छुट्टी लेना आदि कार्यों में पति को पत्नी का हाथ बंटाना चाहिए। घर का राशन लाना, बिलों का भुगतान आदि करना, घर की मरम्मत आदि करवाना और घरेलू उपकरणों का रख रखाव मूलत: पति की जिम्मेदारी है पर यदि पत्नी आपकी सहायता हेतु यह जिम्मेदारियां उठाये तो उसकी सराहना करते हुए उसके साथ सहयोग करने का प्रयास करना चाहिए।
दोनों ओर के परिजनों के साथ लेन-देन, अतिथियों के घर आने पर, घर के कुछ कार्यों में हाथ बंटाने पर, घर के मीनू तैयार करने पर, समारोहों आदि में जाने पर और उनको किस प्रकार के उपहार देने चाहिए, इन बातों में दोनों के विचार विमर्श और सम्मति की अति आवश्यकता होती है।
आर्थिक मामले
पति-पत्नी को मिलकर घर की कुल आमदनी को ध्यान में रखकर घर की जरूरतों की प्राथमिकता के आधार पर लिस्ट बना लेनी चाहिए। पति-पत्नी को एक-दूसरे से आय के बारे में कोई दुराव-छिपाव नहीं रखना चाहिए। बैंकों में जमा पूंजी की भी दोनों को पूरी जानकारी होनी चाहिए। यदि आय कम है और खर्चे अधिक, तो भी मिलकर कैसे आमदनी को बढ़ाया जाए या कुछ खर्चे कैसे कम किए जायें, इस पर मिलकर विचार करें।
पत्नी की बीमारी में
पत्नी की तबीयत खराब है तो पति को पूरा सहयोग करना चाहिए। रसोई के कामों में उसकी जितनी मदद कर सकते हैं, करें और पत्नी के बीमार होने पर जैसा भोजन बनाने में सक्षम हैं, उसमें कमियां न निकालें। पत्नी की बीमारी में दवा के साथ-साथ उसकी देखभाल भी करें। अगर छुट्टी भी लेनी पड़े तो कतरायें नहीं जिससे उसे अकेलेपन का अहसास नहीं होगा।
रसोई
कभी-कभी पत्नी को आराम दें। उसकी पसंद को ध्यान में रखते हुए कुछ बनाएं या बाजार से मंगवाएं। जब कभी पत्नी कहीं बाहर किसी काम से गई हो तो घर आने पर मौसम अनुसार चाय-पानी पिलाकर उसे आराम के लिए कहकर आप उसका कितना ध्यान रखते हैं, इसका अहसास उसे कराएं। उस दिन कुछ हल्का-फुल्का बना कर खाएं और उसे भी खिलाएं।
पत्नी की मूक भाषा को भी समझने का यत्न करें। वह किन बातों से प्रसन्न रहती है, उनका ध्यान रखें। छोटे-छोटे उपहार आदि देकर उसका मन जीतते रहें। उसकी बनाई हुई वस्तुओं पर ध्यान दें और उचित प्रशंसा करें। समय को ध्यान में रखते हुए हंसते खेलते कमियों को भी बीच-बीच में उजागर करें। यह भी एक जरूरी सहयोग है क्योंकि आपसे बढ़ कर उसका अतरंग साथी और कोई नहीं है।
- नीतू गुप्ता

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