सुंदरता के लिये आवश्यक है संपूर्ण स्वास्थ्य

सुंदरता के लिये आवश्यक है संपूर्ण स्वास्थ्य

सुंदरता एक ऐसी चीज है जिसके पीछे संसार ही पागल-सा बना रहता है। सुंदरता हर एक को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। सौंदर्य से व्यक्ति को जो आनंद मिलता है, उसे शब्दों द्वारा व्यक्त करना मुश्किल है। अंग्रेजी की एक कहावत है कि सुन्दर वस्तु निरंतर आनंद का स्रोत बहाती है।
दांपत्य जीवन में सुंदरता बेहद जरूरी है। विशेष रूप से महिलाओं के वास्ते तो सुंदरता वरदान है। पतियों को रिझाने और आकर्षित करने के लिये उनके पास सबसे बड़ी दौलत सुंदरता ही तो है। कुछ घरेलू महिलायें सुंदरता बनाये रखने की महत्ता को बहुत कम समझती हैं। अपने स्वास्थ्य और सुंदरता की ओर वे ध्यान ही नहीं देती और घरेलू कामों में ही उलझी रहती हैं। यही कारण है कि पति का रूझान पत्नी की ओर कम हो जाता है।
कई बार रूपवती महिलाओं के दिमाग में यह बात घर कर जाती है कि सौन्दर्य उन्हें प्रकृति से उपहार स्वरूप प्राप्त है, इस कारण वे अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह बनी रहती है। कुछ ही समय के बाद उनके अंगों में ढीलापन आ जाता है और छोटी उम्र में ही बुढ़ापे के चिन्ह प्रकट होने लगते हैं। यह बिल्कुल सच बात है कि कोई भी चीज रख रखाव के अभाव में अधिक दिन आकर्षक नहीं बनी रहती। एक कहावत है कि पुरूष तब बूढ़ा होता है जब वह अपने को बूढ़ा महसूस करने लगे और स्त्री तब बूढ़ी होती है जब वह बूढ़ी दिखाई पडऩे लगे।
आइए सौंदर्य और स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिये कुछ आवश्यक बातों को जान लें।
स्नान:- साबुन से खूब रगड़ कर नहा लेना स्नान नहीं है। साबुन भले ही इस्तेमाल न करें लेकिन घर्षण अवश्य करना चाहिये। इसकी विज्ञान सम्मत विधि यह है कि सूखे शरीर के सभी अंगों को हथेलियों से खूब रगडऩा चाहिये। पांच-दस मिनट इसी तरह रगडऩे के बाद खूब पानी में नहाइये। फिर हथेलियों से ही रगड़-रगड़ कर शरीर को सुखा लीजिये या खुरदरे तौलिये से बदन को खूब रगड़ कर पोंछे। इस तरह के घर्षण से रक्त प्रवाह तेज होकर त्वचा कोष्ठों में ताजे रक्त का संचार होता है तथा रोमकूप खुलकर उनमें शुद्ध और ताजी हवा प्रवेश पाती है। इससे त्वचा सजीव और आभायुक्त बनती है।
हमेशा ठंडे जल से स्नान करने को प्राथमिकता प्रदान करनी चाहिये क्योंकि गरम जल के स्नान से त्वचा पर रूखापन और खुश्की आती है तथा स्नायुमंडल कमजोर पड़ जाता है।
नींबू का प्रयोग:- दूध की तरह ही नींबू का प्रयोग भी त्वचा की स्निग्धता के लिये उत्तम है। स्नान करने वाले जल में कागजी नींबू का रस निचोड़ कर नहाना चाहिये। जिसके मुंह पर कील, मुंहासे और झाइयां हों, उन्हें चाहिये कि स्नान करने से दस पन्द्रह मिनट पहले आधे नींबू को काटकर चेहरे पर मलें और उसके बाद स्नान कर लें।
बाल:- महिलाओं के काले, लम्बे, घने और घुंघराले बाल केश सौंदर्य के प्रतीक माने जाते हैं। प्रत्येक भारतीय महिला को यह इच्छा रहती है कि उसके बाल घने और लंबे हों। लम्बे घने बालों का जूड़ा नारी की सुंदरता में चार चांद लगा देता है। काले लम्बे हवा में लहराते हुए खुले बालों से घिरा गोरी का मुखड़ा चांद की तरह चमकता है। कहते हैं कि स्त्री के सुन्दर बालों में काम निवास करता है। बालों से फूटती हुई किसी सुगन्धित तेल की मंद मंद सुगन्ध पुरूषों को मस्त कर कामप्रेरक बना देती है। बाल उगाने वाली ग्रन्थियां सिर की त्वचा के नीचे रहती हैं, इसलिये बालों में पोषक तेल की मालिश ऐसे ढंग से करनी चाहिये जो जड़ों तक पहुंच जाये।
गुप्तांग सफाई:- बगलों और गुप्तांगों के फालतू बालों को हमेशा साफ रखना चाहिये। इन स्थानों पर पसीना सूखकर दुर्गन्ध आने लगती है। पुरूषों को अपने लिंग की त्वचा पीछे की तरफ करके सुपारी के पीछे जमा हुआ मैल रोजाना साफ करना चाहिये। लिंग के पीछे मैल जमा होने यहां खुजली होती है जो उत्तेजित करती है। इससे स्वप्नदोष और शीघ्रपतन हो सकता है। दाद-खुजली जैसे रोगों का भी भय बना रहता है।
स्नान और गुप्तांगों की साफ सफाई के बाद पाउडर छिड़कना उपयोगी रहता है। महिलाओं को स्नान करते समय अपने गुप्तांगों की साफ सफाई अवश्य करनी चाहिये। लघु और वृहत भगोष्ठों की तह को पानी से धोकर साफ कर लेना चाहिये। थोड़ी दूर तक अंगुली डालकर योनि को भी धोना और साफ कर लेना चाहिये। याद रहे गुप्तांगों की दुर्गन्ध और गंदगी सहयोगी को संभोग विरक्त बना सकती है।
दांत:- स्वास्थ्य व सुन्दरता की दृष्टि से दांतों की सफाई का बड़ा महत्व है। दूध से सफेद और चमकीले दांत आपकी मुस्कान में आकर्षण भर देते हैं। दांतों की साफ सफाई की उपेक्षा करते रहने से मसूड़े दुर्गंधयुक्त हो जाते हैं और मुंह से बदबू आने लगती है जो सहवास और यौन क्रीड़ाओं के समय सहयोगी को विमुख बना देती है।
हाथ:- कोमलता, स्वच्छता और सुन्दरता की दृष्टि से हाथ विशेष महत्व रखते हैं। नरम नरम और साफ सुथरे हाथों का स्पर्श कितना सुखद होता है इसे प्रेमी युगल अच्छी तरह से जानते हैं और महसूस करते हैं। घर गृहस्थी के कामों से महिलाओं की हथेलियों की त्वचा कुछ मोटी, रूखी और खुरदरी हो जाती है जिससे हथेलियों की स्वच्छता, कोमलता और चमक खराब हो जाती है लेकिन थोड़ा सा यत्न करके इनकी स्वच्छता और सुंदरता को बरकरार रक्खा जा सकता है। बेसन, कागजी नींबू का रस, ग्लिसरीन मिलाकर लोशन बना लें और रात को सोते समय प्रतिदिन हाथों में मलकर सो जाइये। नाखूनों की सफाई के प्रति भी पूर्ण सावधानी बरतनी चाहिये।
भीतरी सफाई:- शरीर यदि भीतर से गंदा है तो बाहरी टीप-टाप चाहे जितनी भी कर लीजिए, स्वास्थ्य में असली रौनक और आकर्षण कभी भी नहीं आयेगा। इसलिये पाचन संस्थान का सही और दुरूस्त होना बहुत आवश्यक है। चेहरे पर बिखरती रौनक, आंखों का पानी, शरीर की चुस्ती और स्फूर्ति तथा फूल बिखरेती हुई मुस्कान इस बात पर टिकी हुई है कि आप भोजन कैसे करते हैं। भोजन हजम होता है या नहीं? शौच साफ होता है या नहीं?
यदि कब्ज रहता है तो उसे दूर करने का प्रयत्न करना चाहिये। कब्ज के कारण कई तरह के यौनेन्द्रिय रोग खड़े हो जाते हैं जैसे स्वप्नदोष, शीघ्रपतन और स्त्रियों में प्रदर आदि रोग हो सकते हैं। बार बार के कब्ज से चेहरे का आकर्षण लुप्त हो जाता है और कील मुहांसे और झाइयां पड़ जाती है। श्वास भी दुर्गंधित हो जाती है तो दूसरे पक्ष के लिये कष्टदायक और असह्य होती है।
व्यायाम:- अच्छे स्वास्थ्य के लिये व्यायाम बहुत आवश्यक है। व्यायाम से पाचन क्रिया दुरूस्त रहती है। रक्त प्रवाह सजीव बना रहता है। शरीर की पेशियां चुस्त और क्रियाशील बनती हैं। व्यायाम सौन्दर्य, स्वास्थ्य और लम्बी उम्र प्रदान करता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से योगासनों का व्यायाम सबसे बढिय़ा माना गया है। योगासनों को बढिय़ा इसलिए माना गया है क्योंकि इससे मांसपेशियों पर खिंचाव पड़ता है, जिससे उनकी लचक बढ़ती है और वे अधिक क्रियाशील बनती हैं।
यूरोपीय महिलायें व्यायाम को बहुम महत्व देती हैं जिस कारण वे चुस्त और फुर्तीली बनी रहती हें। ग्रामीण महिलायें और घरेलू स्त्रियां जो घर के काम धंधों में कड़ी मेहनत करती है वे भी व्यायाम की परिभाषा में आ जाती हैं। चक्की पीसना कुएं से पानी खींचना आदि ऐसे ही व्यायाम है। गांव की स्त्रियां ऐसे कामों की अभ्यस्त होती हैं इस वजह से उनका शरीर गठीला सुन्दर और आकर्षक होता है। उरोज विशेष रूप से गठीले बने रहते हैं।
आहार:- अच्छा भोजन ही स्वास्थ्य का मूल आधार है। यदि भोजन सही है और उससे सभी पोषक तत्व मिल जाते हैं तो निसंदेह आपका स्वास्थ्य ईष्र्या करने योग्य बन सकता है। त्वचा का गुलाबीपन और आभा, तथा शारीरिक आकर्षण अच्छे भोजन की ही देन होती है।
आहार विहार विज्ञान आज की दुनियां में काफी आगे बढ़ चुका है। नई नई खोजों ने नवीन के मार्ग को प्रशस्त किया है, इसलिये अच्छे स्वास्थ्य के लिये अच्छी पुस्तकें पढऩी चाहिये।
-परशुराम संबल

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