कहीं आप पति पर शक तो नहीं करती

कहीं आप पति पर शक तो नहीं करती

दांपत्य जीवन में कटुता आने का कारण पति-पत्नी का एक दूसरे को न समझना होता है। दूसरे शब्दों में पति-पत्नी का एक दूसरे पर शक करना कहा जा सकता है। इस प्रकार की मानसिकता अक्सर घरेलू जीवन में जहर तो घोलती ही है, उसके साथ ही अच्छे भले परिवार को पतन की ओर ले जा सकती है।
कम पढ़ी लिखी स्त्रियां ही नहीं, पढ़ी-लिखी महिलाएं भी अक्सर शक रूपी मानसिक रोग का शिकार हो जाती हैं जिसका परिणाम कई बार विपरीत भी निकलता है। शक करना मनुष्य की प्रवृत्ति है। केवल महिलाएं ही नहीं, कुछ पुरूष भी शक्की-मिजाज होते हैं मगर मनोवैज्ञानिक आधार पर महिलाओं में शक करने की आदत पुरूषों की अपेक्षा अधिक होती
है।
इस प्रकार की घटनाएं अक्सर पढ़े लिखे परिवारों में भी हो जाती हैं। रवि की अभी नई शादी हुई थी। उसकी पत्नी भी पढ़ी-लिखी होने के बावजूद शक का शिकार हो गई क्योंकि रवि के साथ कार्यालय में महिलाएं भी थीं, इसलिए रवि का खुला व्यवहार होना स्वाभाविक था मगर उसकी पत्नी ने उसे गलत दृष्टिकोण से लिया। इसके फलस्वरूप अब बात तलाक तक पहुंच चुकी है।
ऐसी बात नहीं है कि संदेह केवल नारी जाति ही करती है। बहुत से पुरूष भी शक्की किस्म के होते हैं मगर हमारे देश में अधिकांश महिलाएं आफिस की बजाय गृह कार्य में लिप्त रहती हैं। व्यस्त रहने के कारण पुरूषों के दिमाग में यह बात ही नहीं आती। एक पत्नी जो घर की चार दीवारी से बाहर नहीं निकल पाती, उसमें संदेह की आदत स्वाभाविक हो सकती है।
अगर ध्यान से देखा जाए तो शक करना कोई बहुत बड़ी समस्या नहीं है। पति-पत्नी का आपसी विश्वास इस समस्या को काफी हद तक दूर कर सकता है। जीवन में विश्वास की लौ को जलाए रखने के लिए दोनों का ही योगदान होना अनिवार्य है।
यदि आप किसी कार्यालय में कार्य करते हैं तो भूलकर भी सहयोगी महिलाओं की प्रशंसा पत्नी के आगे न करें। अपनी पत्नी की कभी आफिस सहयोगियों के सामने उपेक्षा भी नहीं करनी चाहिए। अपने आफिस के बाद का अत्यधिक समय अपने परिवार को दें। एक समझदार पत्नी को भी चाहिए कि वह सुनी-सुनाई बातों पर विश्वास न करे।
आपका पति के मित्रों से अत्यधिक खुलापन पति के मस्तिष्क में शक रूपी मानसिकता को जन्म दे सकता है। अपना व्यवहार संतुलित रखें। अपने चुगलखोर मित्रों से बचने का प्रयास करें। यदि परिवार में कोई ऐसी-वैसी बात बन भी जाए तो उसे तमाशा बनाने की बजाय शांति से सुलझाएं। इसी में पति-पत्नी, परिवार तथा समाज की भलाई है। इस भलाई से जहां आपका परिवार खुशहाल रहेगा, वहीं समाज में भी आपको पूरा सम्मान मिलेगा।
- महेन्द्र बोस 'पंकज'

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