सुंदरता को ताकत बनाओ, कमजोरी नहीं

सुंदरता को ताकत बनाओ, कमजोरी नहीं

सुंदरता भी समय के बंधन से प्रभावित हुए बगैर नहीं रह पाती। सुन्दरता को अपनी ताकत बनाएं, कमजोरी नहीं। कमजोरी बनते ही आप महज एक भोगी बन जायेंगे और जिस सुंदर वस्तु ने आपको मोहित किया, आप उसके उपभोग के जुगाड़ में व्यस्त हो जायेंगे। उपभोग से संतुष्टि घटते ही आपकी सुंदरता के प्रति सोच, व्याख्या सब कुछ बदल जाएगी। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि आप सुंदरता के कायल नहीं हुए बल्कि गुलाम हो गए। यही वजह है कि स्त्री जाति भोग वस्तु बनकर रह गई।
भोग्या बनकर स्त्री पुरूष को अपनी कमजोरी का शिकार बनाती है। सुंदरता बखान चाहती है। नारी देह प्रदर्शन को सदियों से विवादास्पद विषय बनाया गया। सौंदर्य से प्रभावित होकर ही मूर्तिकारों ने मूर्तियों को सजीव कर दिया। खजुराहो के मंदिर तक आलोचकों के निशाना बन गए। चित्रकारों पर भी बवाल मचा। देह दर्शन से संतुष्टि मिलती है। स्त्रियां पुरूषों में और पुरूष स्त्री में सुन्दर काया ही तो खोजते हैं।
देह दर्शन को लेकर ही भ्रांतियां हैं। अधिकतर पुरूषों की निगाहें सर्वप्रथम किसी भी स्त्री के वक्षस्थल पर ही जाती है। उसके बाद कमर, जांघें और फिर होंठ और आंखों पर घूरती हुई नजरें ठहर जाती है। यहां सौंदर्य का मूल्यांकन नहीं होता। यहां तो सिर्फ वासना जागृत होती है।
फैशन का कमाल ही कहना पड़ेगा कि आजकल पहरावा इस तरह का होता जा रहा है कि देखने वाले उत्तेजित हो जा रहे हैं। उत्तेजना बढऩे की एकमात्र वजह यह है कि शारीरिक सौंदर्य में हम काम वासना खोजते हैं। यही वजह है कि लड़की देखते ही कुछ लोग उत्तेजित हो उठते हैं। उनके मुंह से ठीक उसी तरह लार टपकाने लगता है जैसे खाद्य सामग्री को देख खाने वालों के मुंह से लार टपकने लगती है। यहां विकृति जन्म लेने लगती है।
मनुष्य का स्वभाव ऐसा होता है कि मन कभी भी बेकाबू हो सकता है, नियंत्रण खो सकता है। फिर दो विपरीत सेक्स एक दूसरे को न केवल आकर्षित करते हैं, बल्कि एक-दूसरे की जरूरत को पूरा करने को भी जागृत हो उठते हैं। एक छोटी सी भूल इसे ही कहा गया है। यह भूल मर्यादाएं तोडऩे पर बाध्य कर देती है। इन्हें अवैध शारीरिक संबंध कहा गया है। कुछ लोगों में विकृत मानसिकता इतनी बढ़ जाती है कि वे राक्षस बन जाते हैं। ऐसे ही बलात्कारी घृणा के पात्र बन जाते हैं।
अप्राकृतिक तरीके से सेक्स संतुष्टि करने वाले कहीं न कहीं मानसिक विकृतियों से निश्चित ही ग्रस्त रहते हैं। उन्हें ज्ञात होता है कि वे जो कुछ कर रहे हैं या कर चुके हैं वह अनैतिक था। बावजूद इसके वे स्वयं को नैतिक पतन की ओर बढऩे से नहीं रोक पाते। इसलिए बेहतर होगा कि हम अपनी सोच में बदलाव लाएं और सुंदरता को अपनी ताकत बनाएं, कमजोरी नहीं।

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