बच्चे के दैहिक विकास के लिए आवश्यक है उबटन की मालिश

बच्चे के दैहिक विकास के लिए आवश्यक है उबटन की मालिश

नवजात शिशु लड़का हो या लड़की, उसे उबटन एवं मालिश की सख्त जरूरत होती है। उबटन न लगाने से बच्चों में अनेकानेक चर्मरोग एवं हड्डी के रोगों की संभावनाएं बनी रहती हैं। वही बच्चा जब बड़ा होता है तो हरदम सुस्त-सा रहता है और उसका शारीरिक एवं मानसिक विकास अवरूद्ध-सा होकर रह जाता है। अगर यूं कहा जाये कि उबटन शिशुओं के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए एक अनोखा टॉनिक है तो अतिशयोक्ति न होगी।
मालिश की उपयोगिता के संबंध में आयुर्वेद में कहा गया है कि नियमित रूप से मालिश करने से वात संबंधी सभी बीमारियां नष्ट हो जाती हैं तथा अंग पुष्ट होते हैं। दृष्टि में चमक बढ़ जाती है, निद्रा सुखपूर्वक होती है। शरीर में शक्ति उत्पन्न होती है तथा शरीर का रक्तसंचार नियमित एवं व्यवस्थित हो जाता है। शरीर की विभिन्न अंगों की क्रियाशीलता, पाचनशक्ति, रस नि:सरण, बचे हुए भोजन से उत्पन्न पस का अवशोषण तथा सफाई (उत्सर्जित पदार्थों-मल, मूत्र, पसीना आदि) के लिए यह सर्वोत्तम व्यायाम होता है।
मालिश से धमनियां एवं शिराओं की शिथिलता दूर होकर किसी भी अंग का सूनापन समाप्त हो जाता है। इसमें मांसपेशियों की थकान दूर होती है। फेफड़े, जिगर, तिल्ली, छोटी एवं बड़ी आंतों, गले की ग्रन्थियां, रीढ़ के चक्रों की बीमारी, खराबी एवं कमजोरी दूर होती है।
पक्षाघात वाले अंग, चोट लगे स्थानों का सूनापन भी नष्ट हो जाता है। इससे शरीर की रोग निरोधक क्षमता में वृद्धि होती है तथा मांसपेशियों की वृद्धि एवं विकास के साथ-साथ अधिक भार उठाने की क्षमता का विकास भी होता है। पेडू की मालिश से कब्ज दूर होती है तो सन्धि वाले स्थानों की मालिश से शरीर सुडौल बनता है। पक्षाघात, अपच, सायटिका, पथरी, लिवर की दुर्बलता, तथा हृदय की दुर्बलता आदि की बीमारियों को तो उबटन करने वाले शरीर के निकट आते हुए भी भय लगता है।
उबटन बनाने के लिए पीली या काली सरसों 250 ग्राम लेकर उसे दूध में एक उबाल देकर छान लिया जाता है। उसके बाद उसे छानकर धूप में सुखा दिया जाता है। पूरी तरह से सूख जाने के बाद दो संतरों के सूखे छिलकों में 25 ग्राम चिरौंजी को मिलाकर मिक्सी में या सिल बट्टे पर बारीक से पीसकर बोतल में भरकर रख लें। जब उबटन लगाना हो तो बराबर मात्र में इस तैयार पाउडर और पानी को मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें। गेहूं के आटे में चुटकी भर हल्दी (पाउडर) को दूध में मिलाकर घोलें। बरसात के मौसम में नीम या तुलसी की 2-3 ताजा या सूखी पत्तियों को भी मिला दें। इससे बरसाती फोड़े-फुंसियों से बचाव होता है।
भयंकर गर्मी में पुदीने की पत्तियों को मिला देने से बच्चे का शरीर ठण्डक महसूस करता है तथा गर्मी के दुष्प्रभावों से वह बचा हुआ रहता है। गर्मी में घमौरियां न निकलने देने या निकल आने पर इनसे बचाव के लिए चुटकी भर अजवाइन का पाउडर बच्चों के उबटन पेस्ट में मिला दें।
जाड़े के मौसम में त्वचा खुश्क हो जाती है। इस समय तैलयुक्त पदार्थों का उबटन अधिक उपयुक्त होता है। कड़ए बादाम और चिरौंजी का पाउडर पीस कर उसे एक साफ बोतल में रख दें। थोड़े से बेसन और मलाई में बादाम और चिरौंजी पाउडर कटोरी में अच्छी तरह से मिलाकर उबटन तैयार कर लें। उबटन के साथ संतरे का छिलका, चिरौंजी एवं बेसन को मिलाकर लगाने से चेहरे की सुन्दरता में निखार आता है।
उबटन के साथ चंदन पाउडर मिलाकर लगाने से शीतलता आती है। बच्चे के पतले माथे को चौड़ा करने के लिए भीगी हुई एवं पिसी मेथी के दानों को उबटन में मिलाकर लगायें। सूखने पर थोड़ा-सा सरसों का तेल हथेली पर मलकर उबटन को छुड़ाएं। कई दिन इस क्रिया को लगातार करने से माथा गोल, साफ एवं चिकना हो जाता है।
गुलाब की पंखुडिय़ों को पीसकर उबटन में मिलाकर लगाने से चेहरे की आभा बढ़ जाती है। नवजात शिशुओं की मालिश करने में अत्यधिक सतर्कता की आवश्यकता होती है क्योंकि उनके शरीर पर छोटे-छोटे रोएं भी होते हैं जो बाल की शक्ल में रहते हैं। हालांकि वे उबटन लगाने से साथ-साथ टूटकर साफ भी हो जाते हैं परन्तु बेरहमी से टूटने पर वे घाव की शक्ल भी ले सकते हैं।
सुबह नहाने से आधा घण्टा पहले और रात में सोने से एवं आखिरी बार दूध पिलाने से पहले मालिश करनी चाहिए।
सरसों के तेल, तिल के तेल, जैतून का तेल या डाबर लाल तेल, जिससे भी सुविधा हो, का इस्तेमाल अपनी इच्छा से किया जा सकता है। कई बच्चों की कोमल त्वचा पर किसी तेल के प्रयोग से अगर लाल-लाल फुंसी जैसे दाने निकल जाते हों तो ऐसी दशा में तुरंत उस तेल विशेष का उपयोग बंद कर देना चाहिए।
- आनंद कुमार अनंत

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