मानसिक तनाव से हो सकता है गर्भपात

मानसिक तनाव से हो सकता है गर्भपात

कुछ समय पूर्व लंदन के एक अस्पताल ने इस बात पर शोध किया कि मानसिक तनाव का गर्भवती स्त्रियों पर कितना असर पड़ता है। इस वैज्ञानिक अनुसंधान से यह पता चला है कि अधिक तनाव से महिला को गर्भपात भी हो सकता है। इस अनुसंधान के अनुसार गर्भावस्था में तनावग्रस्त और चिंतातुर रहने वाली महिलाओं के बच्चों का वजन औसतन बहुत कम रहता है।
चिकित्सकों ने इसका कारण यह बताया है कि तनाव से धमनियों में रक्त प्रवाह कम हो जाने से गर्भाशय में रक्त संचरण प्रभावित हो जाता है। इसका परिणाम यह होता है कि जन्म के समय बच्चे का वजन औसत से कम होता है, जिसकी वजह से यह अस्वस्थ शिशु कभी-भी दम तोड़ सकता है।
लंदन के क्वीन कैरोलेटल एण्ड चेलसिया अस्पताल के चिकित्सा विज्ञानियों ने लंदन एवं अन्य शहरों की सैंकड़ों गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य का लगातार अध्ययन करके यह निष्कर्ष निकाला है। चिकित्सा विज्ञानियों के अनुसार हमेशा मानसिक रूप से तनावग्रस्त रहने वाली तथा अत्यधिक चिंता करने वाली गर्भवती महिलाओं में रक्त संचरण न केवल असामान्य बना हुआ था वरन् उसकी गति बाधित हो रही थी।
इन चिकित्सकों ने अपने शोध में यह पाया कि गर्भावस्था के दौरान मां की मानसिक स्थिति से भ्रूण के विकास की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसके कारण ही बच्चों का वजन कम हो जाता है। कम भार के बच्चे अस्वस्थ होते हैं तथा अधिकांश बच्चे पैदा होने के कुछ समय बाद ही मर सकते हैं।
गर्भवती महिलाओं को चाहिए कि वे हमेशा प्रफुल्ल रहें। मानसिक तनाव बेहद घातक होता है तथा गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला के तनावग्रस्त रहने से पैदा होने वाले शिशु में मानसिक विकृतियां जन्म ले सकती हैं।
कम वजन वाले नवजात बच्चों में आगे चलकर स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इन बच्चों को भविष्य में हृदय रोग, लिवर का कमजोर होना, मधुमेह एवं अवसाद की शिकायत हो सकती है। मानसिक तनाव से नोटएड्रेनेलिन नामक हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। रक्त शिराओं के निर्माण में इस हार्मोन की महत्ती भूमिका होती है।
वरिष्ठ चिकित्सकों की गर्भवती महिलाओं को सलाह है कि वे सदैव प्रसन्नचित रहें तथा तनाव एवं चिंता को अपने पास भी न भटकने दें। इसके लिए नियमित व्यायाम करने की सलाह दी गई है। नियमित व्यायाम तमाम व्याधियों का सरलतम उपचार है।
डा. राबर्ट एस. ब्राउन के अनुसार- व्यायाम से आदमी ऐसे रासायनिक एवं मानसिक परिवर्तन महसूस करता है जिससे वह उत्तरोत्तर मानसिक स्वास्थ्य को प्राप्त करता है। मनोदशा को प्रभावित करने वाले मस्तिष्क के रासायनिक पदार्थ Óबटा एडोफिल' की मात्र भी व्यायाम से बढ़ती है। अतएव बेहतर है कि यदि आपको स्वस्थ शिशु चाहिए तो खुद को तरोताजा रखना बेहद आवश्यक है।
- महेन्द्र कुमार कुशवाह

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