सौंदर्य के प्रति जागरूकता किस हद तक?

सौंदर्य के प्रति जागरूकता किस हद तक?

सौंदर्य की चाह और अहमियत हमेशा से रही है और आगे भी रहेगी लेकिन पिछले कुछ वर्षों से सौंदर्य के प्रति जागरूकता पागलपन की हद तक पहुंच गई है। आज सही फिगर व आकर्षक रंग रूप पाने की खातिर लड़कियां कुछ भी कर गुजरने को तैयार हैं।
फिगर मेनटेन करने के लिए पूरे पूरे दिन भूखे रह जाना, हानिकारक दवाइयां लेना अब आम बात हो गई है जबकि कुछ ही दशक पहले तक सौंदर्य को बनाए रखना सजना संवरना, फिल्मों, पत्र पत्रिकाओं में छपी सुंदर तस्वीरों में या फिर शादी ब्याह आदि मौकों पर ही दिखाई देता था।
सौंदर्य प्रसाधनों के विज्ञापन भी सीमित ही हुआ करते थे और समाज के बड़े समुदाय के लिए तो नामी गिरामी साबुनों से नहाना और दो तीन नामी कंपनियों के टेल्कम पाउडरों का इस्तेमाल ही सौंदर्य की सुरक्षा के लिए पर्याप्त था।
ठंड के मौसम में घी, दूध, मलाई आदि में बेसन मिलाकर त्वचा पर लेप कर उसे कोमल बनाए रखना ही चलन में था। खास डिजाइन के कपड़े, मेकअप के सामान का इस्तेमाल और इत्र की खुशबू जैसी साज श्रृंगार की चीजें त्योहारों और शादी ब्याह के मौकों पर ही उचित मानी जाती थीं लेकिन आज यही सारी चीजें रोजमर्रा की जरूरतें बन गई हैं।
आइए कुछ दशक पहले की फिल्मी नायिकाओं के सौंदर्य पर नजर डालें। तब की प्रमुख नायिकाएं मीनाकुमारी, नर्गिस और मधुबाला थीं।
पहले मीनाकुमारी को ही लें जो अपनी भाव प्रधान भूमिकाओं के लिए प्रसिद्ध थीं। उनका सौम्य, मासूम और भारतीय नारी का प्रतिनिधित्व करने वाला सौंदर्य दर्शकों का मन मोह लेता था। उनकी मांसल देहयष्टि जिसे आज की पीढ़ी मोटापा ही कहेगी, किसी की नजर में नहीं खटकती थी। वह जैसी भी थीं, उसी अंदाज में दर्शकों ने उन्हें सुंदरता की प्रतिमा मान लिया था।
इसी तरह नर्गिस को अपनी लम्बी नाक और आगे के दो दांतों के बीच की खाली जगह से कोई शिकायत न थीं। यह सब उनके व्यक्तित्व में शामिल था। शायद इसी कारण उन्होंने कभी नाक की प्लास्टिक सर्जरी कराने की या दांतों की दूरी कम कराने की नहीं सोची और अपने स्वाभाविक अभिनय व सादगी भरी अदाओं से दर्शकों का मन मोह लिया।
मधुबाला की सुंदरता और चंचलता की सराहना आज भी कुछ कम नहीं होती जबकि उनके चेहरे पर काफी मुंहासे थे लेकिन अपने मुंहासों से न तो वह स्वयं परेशान थी और न ही कभी दर्शकों का ध्यान इस तरफ गया। कला के प्रति समर्पित मधुबाला ने कई यादगार भूमिकाएं निभाई और एक कभी न भूलने वाली अदाकारा के रूप में स्थापित हो गई और भी बहुत सी ऐसी अभिनेत्रियां हैं जो अपने मूल सौंदर्य को ही प्रदर्शित करने में विश्वास रखती थीं।
खूबसूरती का सबसे बड़ा मूलमंत्र है हर हाल में खुद को प्यार करना। जब आप खुद अच्छा महसूस करेंगी तो उसकी ताजगी आपके चेहरे पर भी नजर आएगी जो दूसरों की नजरों से भी छुपी नहीं रह सकती। अपनी किसी कमी को छुपाने की खातिर जिसने जो बताया, वही इस्तेमाल करने के बजाय खुद को अपनी उसी कमी के साथ स्वीकारें। जहां तक संभव हो, उसमें सुधार लाने की कोशिश करें। फिर देखिए आपकी कमी ही खूबसूरती में बदल जाएगी।
साथ ही व्यायाम और पौष्टिक खान पान की सहायता से आप चुस्त दुरूस्त रह सकती हैं। इससे चेहरे पर निखार भी आएगा और आप स्वस्थ नजर आएंगी। व्यक्तित्व में ताजगी का एहसास और चेहरे पर आत्म विश्वास की झलक लिए आप निश्चय ही सुंदर लगेगी।
- एम. कृष्णा राव 'राज'

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